Sonam Wangchuk Hunger Strike लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 16 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना वह अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। इस बीच जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है, जिससे समर्थकों और डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है।
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Sonam Wangchuk Hunger Strike क्यों शुरू हुआ?
Sonam Wangchuk Hunger Strike की शुरुआत 29 जून को हुई, जब सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे शिक्षा सुधार आंदोलन में शामिल होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।
यह आंदोलन Cockroach Janta Party (CJP) नामक व्यंग्यात्मक नागरिक समूह चला रहा है। संगठन की मुख्य मांग है कि NEET-UG परीक्षा पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय की जाए।
हालांकि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है।
Sonam Wangchuk Hunger Strike के दौरान स्वास्थ्य लगातार बिगड़ा
सोमवार को जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार सोनम वांगचुक का वजन 8.2 किलोग्राम कम हो चुका है।
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार—
- रक्तचाप (BP): 107/70
- ब्लड शुगर: 67 mg/dL
- कुल वजन में कमी: 8.2 किलोग्राम
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि अब उन्हें खड़े होने और चलने में भी चक्कर आते हैं। यहां तक कि वॉशरूम तक जाने में भी कठिनाई हो रही है।
इसके बावजूद सोनम वांगचुक का कहना है कि उन्होंने जो संघर्ष शुरू किया है, उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना उनका कर्तव्य है।
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डॉक्टरों और समर्थकों ने अनशन समाप्त करने की अपील की
Sonam Wangchuk Hunger Strike के चलते डॉक्टरों ने भी उनकी बिगड़ती हालत पर चिंता जताई है।
आंदोलन के संयोजक अभिजीत दिपके के अनुसार डॉक्टरों ने साफ कहा है कि वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति में अनशन जारी रखना सुरक्षित नहीं है।
देशभर से हजारों लोग सोशल मीडिया और संदेशों के माध्यम से वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक अपना निर्णय नहीं बदला है।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद हैं।
उन्हें कृत्रिम हिमनद “आइस स्तूप” (Ice Stupa) तकनीक विकसित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। यह तकनीक सर्दियों में पानी को बर्फ के रूप में संग्रहित करती है और गर्मियों में किसानों के लिए पानी उपलब्ध कराती है।
उन्हें वर्ष 2018 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
साल 2009 में आई सुपरहिट फिल्म ‘3 Idiots’ का प्रसिद्ध किरदार फुंसुख वांगडू उनके जीवन और कार्यों से प्रेरित माना जाता है। वे अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति में भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हो चुके हैं।
पिछले वर्ष भी रहे थे चर्चा में
साल 2025 में लद्दाख में प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
सरकार ने उन पर प्रदर्शन भड़काने का आरोप लगाया था, जबकि वांगचुक ने इन आरोपों से इनकार किया। बाद में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप वापस ले लिए गए और उन्हें रिहा कर दिया गया।
सरकार और प्रदर्शनकारियों का पक्ष
Sonam Wangchuk Hunger Strike को लेकर कई विपक्षी सांसद, सामाजिक कार्यकर्ता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जंतर-मंतर पहुंचकर समर्थन जता चुके हैं।
हालांकि आंदोलन से जुड़े नेताओं का दावा है कि अब तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई प्रतिनिधि उनसे औपचारिक बातचीत करने नहीं पहुंचा है।
दूसरी ओर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले ही आंदोलन का विरोध करते हुए इसे सरकार को अस्थिर करने की कोशिश बता चुके हैं और इस्तीफे की मांग को खारिज कर चुके हैं।
20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी
प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की है कि यदि सरकार बातचीत के लिए आगे नहीं आती है तो 20 जुलाई, संसद के आगामी सत्र के पहले दिन, वे संसद तक मार्च करेंगे।
आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।
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Sonam Wangchuk Hunger Strike अब केवल एक व्यक्ति का अनशन नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है। एक ओर डॉक्टर उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वांगचुक अपने उद्देश्य से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार प्रदर्शनकारियों से संवाद शुरू करती है या आंदोलन आगामी दिनों में और व्यापक रूप लेता है।
