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पहाड़ी कोरवा और बिरहोर विशेष पिछड़ी जनजाति के 142 युवा बने सहायक शिक्षक, सीएम ने वितरित किए नियुक्ति पत्र

रायपुर (छत्तीसगढ़)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जशपुर जिले के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर विशेष पिछड़ी जनजाति के 142 युवाओं को सहायक शिक्षक के पदों पर वर्चुअल रूप से नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने युवाओं को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज परंपरागत रूप से विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ समाज है। इस समाज में कुछ समुदाय बहुत ज्यादा पीछे रह गए हैं। इन समुदायों को हम विशेष पिछड़ी जनजातीय के रूप में जानते हैं। राज्य की विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए राज्य शासन द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। इन समुदायों के पढ़े-लिखे नौजवानों को शासकीय सेवाओं में उनकी पात्रता के अनुसार सीधी नियुक्ति दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि इन युवाओं ने बहुत विषम परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई की है। आज जब उन्हें सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्ति मिल रही है, तब निश्चित रूप से इन समुदाय में पढ़ाई के लिए उत्साह बढ़ेगा। ये सहायक शिक्षक अपने समुदाय के लिए प्रेरणा बनेंगे। शासकीय नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र प्राप्त युवाओं ने मुख्यमंत्री बघेल से चर्चा के दौरान उनके प्रति आभार प्रकट किया। असीमा ने मुख्यमंत्री से कहा कि बगीचा में भेंट-मुलाकात के दौरान आपने विशेष पिछड़ी जनजातियों के युवाओं को 10 दिन में नियुक्ति दिलाने की घोषणा की थी। इस घोषणा पर जल्द अमल होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।

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इन अभ्यर्थियों में हायर सेकंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा उतीर्ण 124, स्नातक उत्तीर्ण 11 एवं स्नातकोत्तर उत्तीर्ण 06 पहाड़ी कोरवा शामिल है। बिरहोर समुदाय के भी 01 अभ्यर्थी को नियुक्ति दी गई है। जो हायर सेकंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा उत्तीर्ण है। प्रदेश में अब तक विशेष पिछड़ी जनजाति के 708 युवाओं को शासकीय नौकरी दी जा चुकी है। इससे पहले भी जशपुर जिले के विभिन्न शासकीय विभागों में पहाड़ी कोरवा जनजाति के अभ्यर्थियों को उनकी पात्रता के अनुसार 57 पदों पर नियुक्तियां दी गई है।

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इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए हमने पेसा कानून के सबसे बेहतर नियम लागू किए हैं। 65 प्रकार की वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और उनके प्रसंस्करण से वनवासियों को रोजगार और आय के अच्छे साधन मिल रहे हैं। कोदो-कुटकी- रागों का समर्थन मूल्य तय करके उनकी खरीदी की व्यवस्था की गई है। इन फसली के लिए भी राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत इनपुट सब्सिडी दी जा रही है।