4thnation

Tax विवाद में रिटायर्ड ONGC कर्मचारी को बड़ी राहत

Tax से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जिसमें चेन्नई स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने एक रिटायर्ड ONGC कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया है। इस फैसले के बाद कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के समय प्राप्त ₹19.06 लाख की लीव एन्कैशमेंट राशि पर पूर्ण Tax छूट का लाभ मिला है।

यह मामला उन लाखों कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है जो सेवानिवृत्ति के समय लीव एन्कैशमेंट प्राप्त करते हैं और उस पर लागू Tax नियमों को लेकर असमंजस में रहते हैं।


Tax विवाद कैसे शुरू हुआ?

रिपोर्ट के अनुसार, बालासुब्रमण्यम वेंकटाचलपेरुमल वित्त वर्ष 2019-20 में ONGC से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के दौरान उन्हें ₹19.06 लाख की लीव एन्कैशमेंट राशि प्राप्त हुई।

29 अक्टूबर 2021 को आयकर रिटर्न दाखिल करते समय उन्होंने आयकर अधिनियम की धारा 10(10AA)(ii) के तहत पूरी राशि पर Tax छूट का दावा किया। इसके बाद उन्होंने अपनी कुल कर योग्य आय ₹31.62 लाख घोषित की।

हालांकि आयकर विभाग ने उनके दावे को स्वीकार नहीं किया।

यह भी पढ़ें: kunal shah को मिली Meta में बड़ी जिम्मेदारी


आयकर विभाग ने क्यों किया दावा खारिज?

आयकर विभाग ने नोटिस जारी कर कहा कि कर्मचारी केवल ₹3 लाख तक की छूट के पात्र हैं।

विभाग ने शेष राशि को कर योग्य आय में जोड़ दिया, जिससे उनकी कुल कर योग्य आय बढ़कर ₹47.68 लाख हो गई।

यहीं से यह Tax विवाद शुरू हुआ और मामला कानूनी लड़ाई में बदल गया।


📢 Join 4thNation Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


ONGC कर्मचारी ने क्या तर्क दिया?

वेंकटाचलपेरुमल ने आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष दलील दी कि सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSU) के कर्मचारियों को भी सरकारी कर्मचारियों की तरह लीव एन्कैशमेंट पर अधिक Tax छूट मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में तय की गई ₹3 लाख की सीमा को संशोधित किया जाना चाहिए और इसे सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली ₹25 लाख तक की छूट के बराबर माना जाना चाहिए।

उनका तर्क था कि PSU कर्मचारी भी सार्वजनिक क्षेत्र में कार्य करते हैं, इसलिए उन्हें समान लाभ मिलना चाहिए।


Tax छूट पर CIT(A) का फैसला

आयकर आयुक्त (अपील) ने कर्मचारी की दलील को स्वीकार नहीं किया।

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि PSU कर्मचारी केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं माने जा सकते। इसलिए वे सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली विशेष Tax छूट के पात्र नहीं हैं।

हालांकि अधिकारी ने यह माना कि कर्मचारी धारा 10(10AA)(ii) के तहत कुछ छूट पाने के पात्र हैं।

इस निर्णय से असंतुष्ट होकर उन्होंने ITAT चेन्नई का दरवाजा खटखटाया।


ITAT चेन्नई ने सुनाया बड़ा फैसला

4 मई 2026 को ITAT चेन्नई ने इस महत्वपूर्ण Tax मामले में कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि लीव एन्कैशमेंट छूट सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख करना लगभग दो दशक बाद किया गया एक बड़ा संशोधन था।

न्यायाधिकरण ने माना कि इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों के बीच मौजूद अंतर को कम करना था।

इसके आधार पर कर्मचारी को राहत प्रदान की गई और उसे बढ़ी हुई Tax छूट का लाभ दिया गया।


फैसले का अन्य कर्मचारियों पर क्या असर होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में समान मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

कई PSU और निजी क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारी लीव एन्कैशमेंट पर Tax छूट को लेकर विवादों का सामना करते हैं। ऐसे में ITAT का यह फैसला उनके लिए राहत की उम्मीद पैदा कर सकता है।

हालांकि प्रत्येक मामले का अंतिम निर्णय उसके तथ्यों और संबंधित कानूनों के आधार पर ही होगा।


Tax नियमों में लीव एन्कैशमेंट का प्रावधान

भारतीय आयकर कानून में लीव एन्कैशमेंट पर मिलने वाली Tax छूट का प्रावधान धारा 10(10AA) में किया गया है।

सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय प्राप्त लीव एन्कैशमेंट पर पूरी छूट मिल सकती है। वहीं गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए निर्धारित सीमा और अन्य शर्तें लागू होती हैं।

इसी प्रावधान की व्याख्या को लेकर यह पूरा Tax विवाद उत्पन्न हुआ था।


यह फैसला दर्शाता है कि Tax कानूनों की सही व्याख्या और न्यायिक समीक्षा कई बार करदाताओं को महत्वपूर्ण राहत दिला सकती है। ONGC के रिटायर्ड कर्मचारी की यह जीत न केवल उनके लिए बल्कि अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है। आने वाले समय में ऐसे मामलों में यह Tax फैसला संदर्भ के रूप में देखा जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *