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Prasanta Kumar Dutta ED Case: पूर्व असम DIG की ₹53.28 करोड़ की संपत्तियां ईडी ने कीं अटैच

Prasanta Kumar Dutta ED Case में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व असम पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) Prasanta Kumar Dutta से जुड़े लगभग ₹53.28 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।

ईडी के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों में गुवाहाटी स्थित चार होटल और मुंबई के अंधेरी (पश्चिम) स्थित समर्था दीप रिहायशी परिसर के दो फ्लैट शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि मामला आय से अधिक संपत्ति और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।

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Prasanta Kumar Dutta ED Case में किन संपत्तियों को किया गया अटैच?

ईडी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार Prasanta Kumar Dutta ED Case में जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, उनमें शामिल हैं—

  • गुवाहाटी में स्थित चार होटल
  • मुंबई के अंधेरी (पश्चिम) स्थित समर्था दीप रिहायशी परिसर के दो फ्लैट

इन सभी संपत्तियों का कुल अनुमानित बाजार मूल्य ₹53.28 करोड़ बताया गया है।

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मामला कैसे शुरू हुआ?

इस मामले की शुरुआत असम एंटी करप्शन एंड विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर से हुई थी।

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि Prasanta Kumar Dutta ने वर्ष 1992 से 2019 के बीच अपनी सेवा अवधि के दौरान अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।

इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।


Prasanta Kumar Dutta ED Case में आय से अधिक संपत्ति का आरोप

ईडी की जांच में दावा किया गया है कि सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और उनकी पत्नी ने मिलकर लगभग ₹79 करोड़ की संपत्तियां अर्जित कीं।

एजेंसी के अनुसार—

  • घोषित संयुक्त आय: ₹7.23 करोड़
  • कुल घोषित व्यय: ₹9.04 करोड़
  • अर्जित संपत्तियों का अनुमानित मूल्य: ₹79 करोड़

ईडी का आरोप है कि घोषित आय और अर्जित संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर कथित अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) की ओर संकेत करता है।

हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।


कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

Prasanta Kumar Dutta ED Case में ईडी ने आरोप लगाया है कि कथित अवैध धन को तीन कंपनियों के माध्यम से निवेश किया गया।

इनमें Ishan Commercial नामक कंपनी भी शामिल है। जांच एजेंसी के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान लगभग 3.70 लाख शेयर कथित रूप से डमी और फर्जी शेयरधारकों के नाम से हटाकर प्रसांत कुमार दत्ता के नाम स्थानांतरित किए गए, जिससे वह कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारक बन गए।

ईडी का दावा है कि अटैच किए गए चार होटलों में से तीन का वास्तविक लाभकारी स्वामित्व (Beneficial Ownership) इसी कंपनी के पास है।

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जांच में क्या-क्या खंगाला जा रहा है?

जांच एजेंसी फिलहाल कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच कर रही है, जिनमें शामिल हैं—

  • शेयरहोल्डिंग पैटर्न
  • लाभकारी स्वामित्व (Beneficial Ownership)
  • बैंकिंग लेनदेन
  • संपत्तियों की खरीद से जुड़े दस्तावेज
  • डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड
  • कंपनी के शेयर ट्रांसफर

साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित मनी लॉन्ड्रिंग में अन्य व्यक्ति या संस्थाओं की कोई भूमिका रही या नहीं।

वित्तीय अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी Triveni Singh ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में शेयरहोल्डिंग पैटर्न, बैंकिंग ट्रेल, लाभकारी स्वामित्व और डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच वास्तविक मालिकों और धन के स्रोत का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


Prasanta Kumar Dutta ED Case में ईडी की यह कार्रवाई देश में वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों पर सख्ती का संकेत देती है। फिलहाल एजेंसी ने ₹53.28 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है और जांच जारी है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ईडी के आरोप जांच के चरण में हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष एवं दोष तय करना संबंधित न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा। Prasanta Kumar Dutta ED Case में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी।

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