China Arunachal Border Road को लेकर नई हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्र में एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने तिब्बत-भारत सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के उस क्षेत्र के निकट नई सड़क का निर्माण किया है, जिस पर भारत अपना दावा करता है लेकिन जो वर्तमान में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पार स्थित है।
हालांकि, भारतीय सेना ने हालिया मीडिया रिपोर्टों में किए गए चीनी घुसपैठ और नए सैन्य शिविरों के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी खबरें “गलत और निराधार” हैं।
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China Arunachal Border Road: सैटेलाइट तस्वीरों में क्या सामने आया?
हालिया सैटेलाइट विश्लेषण के अनुसार, चीन ने अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले से सटे क्षेत्र में एक नई सड़क का निर्माण किया है। यह सड़क 2021 में बनाए गए एक चीनी गांव को वर्ष 2024 से विकसित किए जा रहे नए गांव से जोड़ती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नया गांव लगभग 9.42 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है और सड़क नेटवर्क के जरिए दोनों बस्तियों को जोड़ा गया है। सड़क के कुछ हिस्से तैयार हो चुके हैं जबकि कुछ हिस्सों में अभी निर्माण कार्य जारी है।
China Arunachal Border Road और सीमा विवाद
China Arunachal Border Road जिस क्षेत्र में बनाई जा रही है, वह भारत द्वारा आधिकारिक नक्शों में दर्शाई गई मैकमोहन रेखा (McMahon Line) के भीतर दावा किए जाने वाले इलाके से जुड़ा है।
हालांकि, भारत और चीन के बीच इस सीमा का औपचारिक सीमांकन कभी नहीं हुआ। दोनों देशों की सीमा को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं हैं। भारत इस क्षेत्र पर अपना दावा बनाए रखता है, जबकि वर्तमान में यह भारतीय सेना की नियमित गश्त वाली LAC से आगे स्थित बताया जाता है।
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स्थानीय समुदाय ने क्या आरोप लगाए?
हाल ही में नाह (Nah) जनजाति का प्रतिनिधित्व करने वाली एक कल्याण समिति ने अपर सुबनसिरी के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि पिछले छह वर्षों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने उनके पारंपरिक चरागाह, शिकार और कृषि भूमि के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर वहां सड़कें, शिविर और अन्य ढांचागत निर्माण किए हैं।
हालांकि इन दावों पर भारतीय सेना ने सहमति नहीं जताई है।
भारतीय सेना का क्या कहना है?
China Arunachal Border Road से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय सेना ने स्पष्ट किया कि मीडिया में प्रकाशित हालिया घुसपैठ और नए चीनी सैन्य शिविरों की खबरें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
सेना के बयान में कहा गया कि ऐसी रिपोर्टें “गलत और बिना किसी आधार के” हैं। फिलहाल सरकार या सेना की ओर से किसी नए चीनी अतिक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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विशेषज्ञों ने क्या कहा?
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने कहा कि चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य चौकियों, सीमा गांवों और सड़कों के जरिए अपनी मौजूदगी धीरे-धीरे मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
वहीं भू-स्थानिक खुफिया शोधकर्ता Damien Symon के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों में नए गांव के पास हेलिपैड, सौर ऊर्जा संयंत्र और कई तैयार इमारतें दिखाई देती हैं, जिससे संकेत मिलता है कि वहां आंशिक रूप से आबादी बस चुकी है या बसाने की तैयारी चल रही है।
अरुणाचल में भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर अभियान
सीमा क्षेत्रों में चीन के निर्माण कार्यों के बीच भारत भी अरुणाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे का विकास कर रहा है।
इसका प्रमुख हिस्सा अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे (NH-913) है, जिसकी लंबाई लगभग 1,748 किलोमीटर होगी। लगभग ₹40,000 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना को 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा Vibrant Villages Programme के तहत सीमावर्ती गांवों में सड़क, सामुदायिक केंद्र, पर्यटन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। सीमा सड़क संगठन (BRO) भी कई रणनीतिक सड़क और सुरंग परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, जिनमें सेला टनल जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
China Arunachal Border Road को लेकर सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने भारत-चीन सीमा विवाद पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित किया है। जहां रिपोर्टों में चीन द्वारा नए गांव और सड़क निर्माण का उल्लेख किया गया है, वहीं भारतीय सेना ने हालिया घुसपैठ के दावों को खारिज किया है। चूंकि दोनों देशों के बीच सीमा का अंतिम सीमांकन नहीं हुआ है, इसलिए इस प्रकार के दावों और प्रतिदावों के बीच आधिकारिक सूचनाओं और तथ्यों के आधार पर स्थिति का आकलन करना आवश्यक है। इसी के साथ भारत भी सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से मजबूत कर रहा है।
