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79वें स्वतंत्रता दिवस की थीम ‘नया भारत’, लाल किले से प्रधानमंत्री देंगे राष्ट्र को संदेश

नई दिल्ली, 14 अगस्त 2025।
केंद्रीय सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि इस वर्ष 15 अगस्त को मनाए जाने वाले 79वें स्वतंत्रता दिवस की थीम “नया भारत” होगी। यह थीम देश को समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की उस महत्वाकांक्षा को दर्शाती है, जिसके जरिए सरकार वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

लाल किले के ऐतिहासिक प्रांगण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह राष्ट्रीय ध्वज फहराकर राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए भारतीय वायुसेना को मुख्य समन्वयक सेवा की जिम्मेदारी दी गई है। समारोह में पारंपरिक गार्ड ऑफ ऑनर, 21 तोपों की सलामी और विशेष फ्लाईपास्ट शामिल होगा, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का ध्वज लहराया जाएगा।

लाल किले पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह करेंगे। इसके बाद उन्हें दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार से मिलवाया जाएगा, जो उन्हें सलामी मंच तक लेकर जाएंगे।

गार्ड ऑफ ऑनर की कमान विंग कमांडर ए.एस. सेखों संभालेंगे। इसमें भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस के 96 जवान शामिल होंगे। ध्वज फहराने में प्रधानमंत्री की सहायता फ्लाइंग ऑफिसर रशिका शर्मा करेंगी। ध्वज फहराते ही 105 मिमी स्वदेशी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी जाएगी और वायुसेना बैंड राष्ट्रीय गान बजाएगा।

समारोह के दौरान आकाश से फूलों की वर्षा के बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करेंगे। उनके भाषण के अंत में एनसीसी कैडेट्स और ‘माई भारत’ के स्वयंसेवक राष्ट्रगान गायेंगे। लगभग 2,500 कैडेट्स और स्वयंसेवक ज्ञानपथ पर बैठकर ‘नया भारत’ का लोगो बनाएंगे।

देशभर में देशभक्ति की भावना को और प्रबल करने और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की विजय का जश्न मनाने के लिए पहली बार स्वतंत्रता दिवस की शाम को पूरे भारत में सैन्य बैंड प्रदर्शन आयोजित होंगे। सेना, नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक बल, एनसीसी, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी, बीएसएफ, आईडीएस, आरपीएफ और असम राइफल्स के बैंड 140 से अधिक प्रमुख स्थलों पर प्रदर्शन करेंगे।

इस वर्ष लाल किले पर होने वाले मुख्य समारोह में लगभग 5,000 विशेष अतिथि और विभिन्न राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों से पारंपरिक वेशभूषा में आए 1,500 लोग शामिल होंगे, जो इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनेंगे।