Honey-Trap से जुड़े एक कथित मामले की जांच में राजस्थान एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) को कई नए सुराग मिले हैं। जयपुर से गिरफ्तार की गई बाबिता धाकड़ उर्फ खदीजा से पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल शुरू की है।
अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और सामने आए सभी आरोपों की पुष्टि सबूतों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर की जाएगी। फिलहाल एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की जांच कर रही हैं।
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बाबिता धाकड़ उर्फ खदीजा की गिरफ्तारी का मामला
राजस्थान ATS ने हाल ही में बाबिता धाकड़ उर्फ खदीजा को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह कथित तौर पर एक आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्क में थी।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि वह पिछले लगभग दो वर्षों से पाकिस्तान स्थित संदिग्ध हैंडलर्स के संपर्क में थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
जांचकर्ताओं का मानना है कि संदिग्ध डिजिटल माध्यमों के जरिए संपर्क बनाए रखे गए थे।
Honey-Trap मॉड्यूल को लेकर जांच में क्या सामने आया?
जांच एजेंसियों के अनुसार, Honey-Trap से जुड़े संभावित मॉड्यूल की भी पड़ताल की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय सुरक्षा बलों के कर्मियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा सकती थी। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ऐसे प्रयास शुरुआती स्तर से आगे बढ़े थे या नहीं।
इसी कारण Honey-Trap एंगल को जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि अभी तक उपलब्ध जानकारी की विस्तृत जांच की जा रही है।
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सोशल मीडिया और ऑनलाइन कट्टरपंथ की जांच
ATS और अन्य एजेंसियां संदिग्ध की ऑनलाइन गतिविधियों की गहन जांच कर रही हैं।
जांच के दौरान कथित तौर पर कुछ इंटरनेट सर्च और डिजिटल सामग्री सामने आई है, जिन्हें एजेंसियां कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़कर देख रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऑनलाइन नेटवर्क कितना व्यापक था।
Honey-Trap और युवतियों की भर्ती के आरोप
जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे संकेत भी मिले हैं जिनसे पता चलता है कि कई राज्यों में लोगों से संपर्क साधा गया था।
अधिकारियों को संदेह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवतियों को प्रभावित करने और उन्हें कथित नेटवर्क से जोड़ने के प्रयास किए गए हो सकते हैं।
हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की पुष्टि करने में जुटी हैं।
क्रिप्टोकरेंसी फंडिंग की भी जांच
मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू संभावित वित्तीय लेनदेन है।
जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि कहीं किसी प्रकार की आर्थिक सहायता क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भेजने या प्राप्त करने की कोशिश तो नहीं हुई थी।
वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल भुगतान से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
डिजिटल फॉरेंसिक जांच में जुटी एजेंसियां
जांचकर्ताओं के अनुसार संदिग्ध ने कथित तौर पर कई मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया और समय-समय पर चैट, फोटो, वीडियो तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड हटाए।
अब फॉरेंसिक विशेषज्ञ डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास कर रहे हैं। एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे नेटवर्क, संपर्कों और गतिविधियों के बारे में और जानकारी मिल सकती है।
ATS फिलहाल संदिग्ध के डिजिटल फुटप्रिंट, वित्तीय कनेक्शन, सोशल मीडिया गतिविधियों और संचार चैनलों की मैपिंग कर रही है।
आगे की जांच पर क्या है फोकस?
जांच एजेंसियां अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ, डिजिटल साक्ष्य और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सभी आरोपों और दावों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। इसलिए जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष को अंतिम नहीं माना जा सकता।
Honey-Trap एंगल के साथ सामने आया यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर जांच का विषय बन गया है। राजस्थान ATS डिजिटल रिकॉर्ड, कथित संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और सोशल मीडिया गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य इस मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने ला सकते हैं। फिलहाल Honey-Trap मामले की जांच जारी है और सभी आरोप सत्यापन की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
