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Class 9 Social Science Textbook: NCERT की नई किताब में बड़ा बदलाव, प्रस्तावना हटाई गई, Emergency पर नया अध्याय शामिल

Class 9 Social Science Textbook को लेकर देशभर में नई बहस छिड़ गई है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक जारी की है, जिसमें संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और “Secular” तथा “Secularism” जैसे शब्द शामिल नहीं हैं। वहीं, पहली बार वर्ष 1975 की Emergency पर विस्तृत अध्याय जोड़ा गया है। इन बदलावों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं।

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NCERT की नई Class 9 Social Science Textbook में क्या बदला?

नई Class 9 Social Science Textbook को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के तहत तैयार किया गया है।

इस बार इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र की अलग-अलग पुस्तकों की जगह “Understanding Society: India and Beyond – Part 1” नामक एकीकृत पुस्तक जारी की गई है। यह 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होगी।

नई पुस्तक में संविधान निर्माण, मौलिक अधिकार, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक मूल्यों पर चर्चा की गई है, लेकिन संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया गया है।


Class 9 Social Science Textbook से प्रस्तावना क्यों हटाई गई?

पुरानी पुस्तक Democratic Politics-I में संविधान की प्रस्तावना को विस्तार से पढ़ाया जाता था। इसमें Sovereign, Socialist, Secular, Democratic और Republic जैसे शब्दों का अर्थ समझाया गया था।

नई Class 9 Social Science Textbook में संविधान की प्रस्तावना को प्रकाशित नहीं किया गया है। इसके साथ ही पुस्तक में “Secular” और “Secularism” शब्द भी नहीं दिखाई देते।

हालांकि, पुस्तक में स्वतंत्रता (Liberty), समानता (Equality), न्याय (Justice) और बंधुत्व (Fraternity) जैसे संवैधानिक मूल्यों का उल्लेख किया गया है।

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Class 9 Social Science Textbook में Emergency पर नया अध्याय

नई पुस्तक में पहली बार 1975-77 की Emergency को कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

अध्याय “Challenges to Democratic Practices in India” में बताया गया है कि जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया था। इस दौरान कई मौलिक अधिकार निलंबित हुए, प्रेस पर सेंसरशिप लगी और अनेक राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

पुस्तक में यह भी लिखा गया है कि 1977 में चुनाव होने के बाद जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय व्यक्त की और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती सामने आई।


Emergency अध्याय पर क्यों छिड़ा राजनीतिक विवाद?

नई Class 9 Social Science Textbook जारी होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई पीढ़ी को Emergency के “काले अध्याय” के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि इतिहास और पाठ्यपुस्तकों को राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के सामने आज भी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं।

उधर, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा कि Emergency संविधान में उपलब्ध प्रावधानों के तहत लागू की गई थी और संविधान का सम्मान किया जाना चाहिए।


चुनाव आयोग से जुड़े अध्याय में भी बदलाव

नई Class 9 Social Science Textbook में चुनाव आयोग से संबंधित सामग्री में भी बदलाव किया गया है।

पुरानी पुस्तक में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और व्यापक शक्तियों पर विस्तार से चर्चा की गई थी। वहीं, नई पुस्तक मुख्य रूप से आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारियों और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव कराने की भूमिका पर केंद्रित है।


NCERT ने क्या कहा?

NCERT के महानिदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने पुस्तक की भूमिका में लिखा है कि नई सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों को समाज, शासन, पर्यावरण, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और मानवीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित करना है।

हालांकि, प्रस्तावना हटाने और नए बदलावों पर NCERT की ओर से अलग से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।


नई किताब कब से लागू होगी?

नई Class 9 Social Science Textbook शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी।

यह पुस्तक 220 पृष्ठों की है और इसमें इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान तथा अर्थशास्त्र के दो-दो अध्याय शामिल किए गए हैं।


Class 9 Social Science Textbook में किए गए बदलाव शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गए हैं। जहां एक ओर संविधान की प्रस्तावना और “Secular” शब्दों के हटने पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं Emergency को पहली बार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में शामिल करने का समर्थन भी किया जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन बदलावों पर शैक्षणिक और राजनीतिक स्तर पर कैसी प्रतिक्रिया सामने आती है।

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