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₹1600 crore coal scam: क्या सच में 40 लाख टन कोयला गायब हुआ?

1600 crore coal scam को लेकर देश में नई बहस छिड़ गई है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के स्टॉक से करीब 40 लाख टन कोयला गायब हो गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1,600 करोड़ रुपये है। हालांकि SCCL ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि कंपनी की कोयला उत्पादन, परिवहन और भंडारण प्रणाली पूरी तरह डिजिटल निगरानी में संचालित होती है।

कंपनी का कहना है कि उसके पास ऐसी मजबूत तकनीकी व्यवस्था है जो बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी या गायब होने की संभावना को लगभग असंभव बना देती है।

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SCCL ने आरोपों पर क्या कहा?

सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड ने स्पष्ट किया कि 1600 crore coal scam से जुड़े आरोप निराधार हैं और कंपनी की वास्तविक संचालन प्रक्रिया को नहीं दर्शाते।

SCCL के अनुसार, कोयले के उत्पादन से लेकर अंतिम आपूर्ति तक हर चरण की निगरानी SAP, Coal Net, RFID, GPS ट्रैकिंग, CCTV सर्विलांस और इलेक्ट्रॉनिक वेब्रिज जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जाती है।

कंपनी का दावा है कि हर टन कोयले का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है और पूरे सप्लाई चेन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।

1600 crore coal scam में 40 लाख टन कोयले का दावा

आरोप कैसे सामने आए?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर मीडिया रिपोर्टों में सामने आए कथित कोयला गायब होने के मामले की जांच कराने की मांग की।

रिपोर्टों में दावा किया गया कि SCCL के स्टॉक से लगभग 40 लाख टन कोयला गायब है, जिसकी कीमत करीब 1,600 करोड़ रुपये आंकी गई है।

हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है।

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विपक्ष ने भी उठाए सवाल

1600 crore coal scam के आरोप सामने आने के बाद विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने भी विस्तृत जांच की मांग की है।

राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे ने तेलंगाना में नई बहस को जन्म दिया है और सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ाया है।

कोयला परिवहन और निगरानी प्रणाली कैसे काम करती है?

डिजिटल तकनीक पर आधारित है पूरी व्यवस्था

SCCL के अनुसार उसके कुल कोयला परिवहन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा रेलवे के माध्यम से किया जाता है, जबकि 15 प्रतिशत कोयला सड़क मार्ग से भेजा जाता है।

कोयला आवंटन, परिवहन, ग्राहक विवरण और आपूर्ति की मात्रा SAP आधारित प्रणाली में दर्ज की जाती है।

RFID और GPS से होती है निगरानी

सड़क मार्ग से परिवहन किए जाने वाले कोयले की निगरानी इलेक्ट्रॉनिक वेब्रिज, RFID बैरियर, GPS/GPRS ट्रैकिंग और जियोफेंसिंग तकनीक के जरिए की जाती है।

रेलवे वैगनों में लोडिंग और डिस्पैच से जुड़ी जानकारी भी डिजिटल रूप से रिकॉर्ड की जाती है।

SCCL का कहना है कि ऐसी प्रणाली के रहते बड़े पैमाने पर कोयले का गायब होना बेहद कठिन है।

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SCCL की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है?

कंपनी ने बताया कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था में 24×7 CCTV निगरानी, RFID सिस्टम, फ्लाइंग स्क्वाड, सुरक्षा कर्मी, चेक पोस्ट और स्टॉकयार्ड मॉनिटरिंग शामिल हैं।

इसके अलावा होलोग्राम चालान, नियमित निरीक्षण और अचानक जांच जैसे उपाय भी लागू किए गए हैं।

कंपनी का दावा है कि यह पूरा सुरक्षा ढांचा कोयले की चोरी या अनधिकृत परिवहन को रोकने के लिए तैयार किया गया है।

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने क्या कहा?

केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपने पत्र में कहा कि यदि 1600 crore coal scam से जुड़े आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका SCCL की वित्तीय स्थिति और भविष्य की विकास योजनाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तेलंगाना सरकार पर SCCL के 51,500 करोड़ रुपये से अधिक बकाया हैं, जिससे कंपनी पहले से वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है।

राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ा?

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों ने सरकार और SCCL प्रबंधन से जवाब मांगा है, जबकि कंपनी लगातार आरोपों को खारिज कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष और विस्तृत जांच आवश्यक है।

1600 crore coal scam को लेकर उठे सवालों ने देश के कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही पर नई चर्चा शुरू कर दी है। जहां एक ओर SCCL 40 लाख टन कोयला गायब होने के आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है, वहीं केंद्रीय मंत्री और विपक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। फिलहाल किसी आधिकारिक जांच में आरोप साबित नहीं हुए हैं। ऐसे में 1600 crore coal scam की सच्चाई संभावित जांच और उसके निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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