इधर नए संसद भवन का उद्घाटन, उधर जंतर-मंतर पर देश के गौरव पहलवानों पर बरसा पुलिस का कहर

नई दिल्ली। देश की राजधानी को आज एक साथ दो दृश्य देखने को मिले हैं। एक तरफ पीएम मोदी तमाम विरोधों के बाद नए संसद भवन का उद्घाटन कर रहे थे। वहीं कुछ ही दूरी पर न्याय की मांग कर रहे देश के लिए मेडल जीतने वाले पहलवानों पर पुलिस का कहर बरस रहा है। जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस की भारी मौजूदगी है और मीडियाकर्मियों को भी धरना स्थल तक नहीं जाने दिया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस ने धरना स्थल से पहलवाने के टेंट और गद्दों को भी हटा दिया है और यहां भारी बैरिकेडिंग की है। धरना स्थल से दिल्ली पुलिस ने सामान को वाहनों में भरवाकर यहां से हटा दिया है। जंतर-मंतर पर जिस समय ये कार्रवाई चल रही थी लगभग उसी समय यहां से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नव-निर्मित संसद भवन का उद्घाटन कर रहे थे।

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महिला पहलवानों ने अपने मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की अपील की थी। लेकिन प्रधानमंत्री या भारत सरकार के किसी मंत्री ने अभी इस विषय पर कुछ नहीं कहा है। पुलिस टीमें हिरासत में लेने के बाद पहलवानों और प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग थानों में लेकर गई हैं।दिल्ली के वसंत कुंज थाने में भी कई प्रदर्शनकारियों को लाया गया है।

बता दें कि महिला पहलवानों ने भारतीय जनता पार्टी के सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इन आरोपों पर एफआईआर दर्ज की हैं। लेकिन आरोपी बृजभूषण सिंह की अब तक गिरफ्तारी नहीं की है। जिसके विरोध में देश के लिए मेडल हासिल करने वाले पहलवान की दिनों से धरना पर बैठे है। इन पहलवानों को मौके से हटाने की कार्रवाई आज दिल्ली पुलिस कर रही है।जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहीं महिला पहलवानों ने रविवार को दिल्ली में महिला महापंचायत करने का आह्वान किया था।

मेरठ से आई एक महिला गीता चौधरी ने कहा, “मेरठ से हम पांच छह महिलाएं शनिवार रात आठ बजे जंतर मंतर पर पहलवानों का साथ देने के लिए आई थीं। पुलिस मेरे बाकी साथियों को अलग अलग थाने में लेकर गई है।” उन्होंने कहा, “पुलिस ने आज जो किया वो गलत है। हमें घसीटा गया। मोदी सरकार तानाशाही कर रही है, जब तक पहलवानों को न्याय नहीं मिलेगा तब तक घर वापस नहीं जाएंगे।” इससे पहले एक ट्वीट करके साक्षी मलिक ने बताया, “सभी पहलवानों और बुजुर्गों माताओं को हिरासत में लेने के बाद अब पुलिस ने जंतर मंतर पर हमारा मोर्चा उखाड़ना शुरू कर दिया है। हमारा सामान उठाया जा रहा है। ये कैसी गुंडागर्दी है?”

साक्षी मलिक ने ट्विटर पर पहलवानों से बदसलूकी का एक वीडियो भी शेयर किया है। इस पर टिप्पणी करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर कहा, “देश का मान बढ़ाने वाले हमारे खिलाड़ियों के साथ ऐसा बर्ताव बेहद ग़लत एवं निंदनीय।”

मीडिया से बात करते हुए ओलंपिक पदक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया ने कहा, “हमारे लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। हरियाणा में, दिल्ली में हमारे लोगों को पकड़ा गया है।”

एक और ट्वीट में साक्षी मलिक ने कहा, “ये भारतीय खेलों के लिए दुखद दिन है। यौन शोषण करने वाला गुंडा बृजभूषण आज संसद में बैठा है और हमें सड़क पर घसीटा जा रहा है।”

सोशल मीडिया पर तिरंगा हाथ में लिए हुए ज़मीन पर पड़ी पहलवान विनेश फोगाट की एक तस्वीर भी वायरल हो रही है। इसी वायरल तस्वीर को ट्विटर पर शेयर करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लिखा, “खिलाड़ियों की छाती पर लगे मेडल हमारे देश की शान होते हैं। उन मेडलों से, खिलाड़ियों की मेहनत से देश का मान बढ़ता है। भाजपा सरकार का अहंकार इतना बढ़ गया है कि सरकार हमारी महिला खिलाड़ियों की आवाज़ों को निर्ममता के साथ बूटों तले रौंद रही है। ये एकदम ग़लत हैहपूरा देश सरकार के अहंकार और इस अन्याय को देख रहा है।”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है।ममता बनर्जी ने एक ट्वीट में कहा है, “दिल्ली पुलिस ने साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और अन्य पहलवानों के साथ बदसलूकी की है। हमारे चैंपियनों के साथ इस तरह का बर्ताव शर्मनाक है। लोकतंत्र सहिष्णुता में बसता है लेकिन निरंकुश ताक़तें असंतोष को दबाने और अहिष्णुता से पनपती हैं। मैं पहलवानों के साथ खड़ी हूं और दिल्ली पुलिस से उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग करती हूं।”


गाजीपुर बार्डर घेरेंगे किसान
किसान नेता राकेश टिकैत ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है और दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन का आह्वान किया है। राकेश टिकैत ने ट्विटर पर लिखा है, “पहलवान बेटियों को जबरन सड़क पर घसीटने वाली केंद्र सरकार संसदीय मर्यादाओं की दुहाई देकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही है, लेकिन बेटियों की चीख आज हुक्मरानों को नहीं सुनाई दी। हमारी बेटियों को हिरासत से छोड़ने और न्याय मिलने तक किसान गाजीपुर बॉर्डर पर डटे रहेंगे।”