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बेटे के गवाही ने दिलाई पत्निहंता पिता को उम्रकैद की सजा, पत्नी को जलाया था जिंदा

शराब के लिए पैसे देने से इंकार करने पर एक शराबी ने अपनी पत्नी की जिंदा जलाकर जान ले ली। इस मामले में आरोपी का बेटा ही अदालत में मुख्य साक्षी था। जिसकी गवाही के आधार पर पिता को पत्नी की हत्या करने के आरोप अजीवन कारावास से दंडि़त किए जाने का फैसला अदालत ने सुनाया है। यह फैसला सत्र न्यायाधीश जी.के. मिश्रा की अदालत में बुधवार को सुनाया गया। प्रकरण में अभियाजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक सुदर्शन महलवार ने पैरवी की थी।

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दुर्ग (छत्तीसगढ़)। मामला छावनी थाना क्षेत्र का है। थाना क्षेत्र का केंप-2 निवासी सेवकराम पाटिला (46 वर्ष) आदतन शराबी है। पेंटिंग का काम करने वाला सेवकराम घटना के साल भर पहले से बेरोजगार था। वहीं उसकी पत्नी देवकी बाई भिलाई नगर निगम में सफाई कामगार थी। जिसकी कमाई से घर का खर्चा चल रहा था। शराब के लिए रकम मांगे जाने को लेकर सेवकराम का अपनी पत्नी देवकी बाई से प्राय: विवाद व मारपीट होती रहती थी। घटना दिनांक 19 सिंतबर 2018 की सबेरे सेवकराम टेंट हाउस के काम से गया हुआ था। वहीं देवकी दोपहर 2 बजे काम से घर लौटी थी। शाम लगभग 7.30 बजे जब देवकी घर में खाना बना रही थी सेवकराम घर पहुंचा और देवकी से उसका विवाद हो गया। विवाद के दौरान सेवकराम ने उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। आग की चपट से घिरी देवकी घर बाहर निकली और सेवकाराम मौके से भाग गया। आग से गंभीर रुप से झुलसी देवकी को मेकहारा अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां दूसरे दिन 20 सिंतबर 2018 को उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। इस मामले में छावनी पुलिस ने आरोपी पति को 21 सिंतबर 2018 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसके खिलाफ हत्या का अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण को विचारण के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया था।
इस मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा मृतका के पुत्र विजय कुमार पाटिला के साथ 18 गवाह बनाए गए थे। विजय ने अदालत को बताया कि घटना समय पर उसकी मां घर में अकेली थी। शाम को उसे दोस्त ,सोनू ने बताया कि उसकी मां आग से जल गई है। घर पहुंचने पर उसने देखा कि मां जली हुई स्थिति में उसके पडौस में रहने वाली बुआ उर्मिला के घर के सामने लेटी हुई है। अग्निदग्धा ने अपने पुत्र सहित आस पडौस के लोगों को उसके पति द्वारा आग से जलाने की जानकारी दी थी। इस मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा 18 गवाह न्यायालय के समक्ष पेश किए थे। जिनमें से अधिकांश ने अभियोजन पक्ष का समर्थन किया। मामले पर विचारण पश्चात सत्र न्यायाधीश जी.के. मिश्रा ने अभियुक्त सेवकराम को अपनी पत्नी की जला कर हत्या करने का दोषी माना और उसे अजावन कारावास की सजा से दंडि़त किए जाने का फैसला सुनाया। अभियुक्त को 1 हजार रु. के अर्थदंड से दंडि़त भी किया गया है। अर्थदंड की राशि अदा नहीं किए जाने पर उसे 6 माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।