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दत्तक केंद्र में मासूमों से बेहरमी, प्रोग्राम मैनेजर गिरफ्तार, WCD अधिकारी सस्पेंड

कांकेर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के कांकेर स्थित दत्तक केंद्र में मासूम बच्ची की पिटाई मामले में आरोपी प्रोग्राम मैनेजर सीमा द्विवेदी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसे लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। साथ ही कलेक्टर ने संचालन करने वाली संस्था प्रतिज्ञा विकास संस्थान दुर्ग का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की अनुशंसा की है। वहीं लापरवाही बरतने पर तत्कालीन WCD अधिकारी चंद्र शेखर मिश्रा को संस्पेंड करने के साथ ही बाल संरक्षण अधिकारी रीना लारिया को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें एक दिन में इसका जवाब देना है। उन पर मारपीट मामले में साक्ष्य छिपाने का आरोप है। 

वहीं दूसरी ओर इस मामले की जांच छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग करेगा। इसके लिए आयोग की टीम आज ही केंद्र पहुंचेगी। साथ ही जांच टीम को मौके पर जाकर प्रतिवेदल देने के आदेश दिए गए हैं। आयोग की ओर से इस संबंध में मामला दर्ज कराने के लिए भी कहा गया है। आयोग के अध्यक्ष तेजकुंवर नेताम ने सदस्य अगस्टीन बर्नाड को कांकेर में घटना स्थल पर जाकर विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने शाम तक जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। 

इससे पहले इस मामले की शिकायत महिला बाल विकास अधिकारी रहे सीएस मिश्रा तक भी पहुंची थी। आरोप है कि, अफसर ने 50 हजार लेकर मामला दबा दिया। कैमरे रात में बंद रहते हैं। दत्तक केंद्र में बच्चों की सुरक्षा के लिए बरामदे, गेट समेत अन्य जगह आठ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। मैनेजर रोजाना रात कैमरे बंद कर देती है। वहीं कलेक्टर प्रियंका शुक्ला ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है। साथ ही जांच के आदेश दिए हैं।

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दरअसल, शिवनगर स्थित दत्तक ग्रहण केंद्र में सीमा द्विवेदी एनजीओ के माध्यम से प्रोग्राम मैनेजर पदस्थ हैं। जहां का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें वह बच्चों की बेदर्दी से पिटाई करती दिख रही है। सीमा ने एक बच्ची को पहले हाथ से मारा फिर बाल से पकड़ उठाकर जमीन पर पटक दिया। जमीन पर गिरी बच्ची को दोबारा फिर से खड़ा किया, एक बांह पकड़कर पलंग पर पटक दिया। बच्ची चीखती है, चिल्लाती है, रोने लगती है। 

कांकेर के इस दत्तक ग्रहण केंद्र में 6 साल तक के यतीम बच्चों को रखा जाता है। प्रोग्राम मैनेजर का बॉयफ्रेंड है, जो अक्सर रात में संस्था में पहुंचता है। जबकि यहां बाहरी लोगों का आना प्रतिबंधित है। जब बॉयफ्रेंड से कभी विवाद हुआ तो बौखलाई मैनेजर इसका पूरा गुस्सा बच्चों पर उतारती है। यहां के बच्चे महीनों से प्रताड़ना सह रहे हैं। इसका विरोध करने वाले आठ कर्मचारियों को एक साल के अंदर केंद्र से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।