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Mahanadi Water Dispute पर बड़ा अपडेट

Mahanadi Water Dispute को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच समाधान की उम्मीद एक बार फिर बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 21 सितंबर 2026 को कहा कि दोनों राज्यों के हित में महानदी जल विवाद का समाधान जल्द हो सकता है। उन्होंने यह बात ओडिशा के दो दिवसीय दौरे के बाद रायपुर लौटने पर कही।

साय के मुताबिक, दोनों राज्यों के बीच बातचीत जारी है और अब मामला टकराव के बजाय संवाद और तकनीकी विचार-विमर्श के जरिए सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से भी मुलाकात की।

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साय-माझी के बीच हुई अहम बातचीत

ओडिशा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से भुवनेश्वर में मुलाकात की। दोनों नेताओं ने महानदी के अलावा दोनों राज्यों के बीच सहयोग, विकास और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की। माझी ने बैठक को सकारात्मक और उपयोगी बताया।

इससे पहले 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में साय और माझी की अहम बैठक हुई थी। केंद्र सरकार के अनुसार, बैठक का उद्देश्य बातचीत, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के जरिए विवाद का आपसी समाधान तलाशना था।

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CWC के जरिए समाधान की कोशिश

Mahanadi Water Dispute के समाधान के लिए अब Central Water Commission (CWC) की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि दोनों राज्यों के बीच चर्चा हुई है और CWC के जरिए तकनीकी स्तर पर समाधान की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है।

हालिया जानकारी के अनुसार दोनों राज्यों की तकनीकी टीमों के बीच CWC की अध्यक्षता में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सितंबर में Mahanadi Water Disputes Tribunal की सुनवाई भी आगे बढ़ाई गई, जबकि दोनों राज्य आपसी सहमति से समाधान तलाशने की प्रक्रिया में हैं।

इसका अर्थ यह है कि अभी अंतिम समझौते की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल बातचीत और तकनीकी आकलन की प्रक्रिया जारी है।

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आखिर क्या है Mahanadi Water Dispute?

Mahanadi Water Dispute छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के पानी के बंटवारे और उपयोग से जुड़ा अंतरराज्यीय विवाद है। महानदी का ऊपरी हिस्सा छत्तीसगढ़ में है, जबकि नदी ओडिशा से होकर आगे बंगाल की खाड़ी तक पहुंचती है।

ओडिशा लंबे समय से छत्तीसगढ़ में नदी के ऊपरी हिस्से में बनाए गए बैराजों को लेकर आपत्ति जताता रहा है। राज्य का कहना रहा है कि इन परियोजनाओं से विशेषकर कम बारिश वाले मौसम में ओडिशा की ओर जाने वाले पानी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

2016 से चला आ रहा है विवाद

महानदी विवाद की औपचारिक प्रक्रिया 2016 में तेज हुई, जब ओडिशा सरकार ने केंद्र के तत्कालीन जल संसाधन मंत्रालय के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। ओडिशा ने छत्तीसगढ़ में औद्योगिक उपयोग के लिए प्रस्तावित छह बैराजों पर आपत्ति जताई थी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने मार्च 2018 में Mahanadi Water Disputes Tribunal का गठन किया। यह कदम अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत उठाया गया था।

अब दोनों राज्यों ने न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ बातचीत और तकनीकी परामर्श के जरिए आपसी समाधान तलाशने की इच्छा दिखाई है।

दोनों राज्यों के लिए क्यों अहम है महानदी?

महानदी का पानी दोनों राज्यों के लिए कृषि, पेयजल, उद्योग और अन्य जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ सरकार के एक अधिकारी के अनुसार राज्य की करीब 78 प्रतिशत आबादी महानदी बेसिन में रहती है।

इसी वजह से नदी के पानी का प्रबंधन केवल दो राज्यों के बीच प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि इससे बड़ी आबादी की कृषि और जल आवश्यकताएं जुड़ी हैं।

ओडिशा सरकार ने भी जुलाई में हुई केंद्रीय बैठक के बाद अपने किसानों और राज्य के जल संसाधनों के हितों की रक्षा करते हुए आपसी सहमति से समाधान की प्रतिबद्धता जताई थी।

जल्द समाधान की उम्मीद

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हालिया बयान से Mahanadi Water Dispute के समाधान को लेकर उम्मीद बढ़ी है। हालांकि अभी अंतिम जल-बंटवारा समझौता सामने नहीं आया है और तकनीकी तथा संस्थागत प्रक्रिया जारी है।

केंद्र सरकार ने भी दोनों राज्यों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए CWC और जल शक्ति मंत्रालय के स्तर पर प्रयास किए हैं। ऐसे में आने वाले दौर की तकनीकी बैठकों और दोनों राज्यों की सहमति पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।

Mahanadi Water Dispute करीब एक दशक से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महत्वपूर्ण जल मुद्दा बना हुआ है। अब दोनों राज्यों के बीच बातचीत, CWC की तकनीकी भूमिका और केंद्र की मध्यस्थता से समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री साय ने जल्द समाधान की उम्मीद जताई है, लेकिन अंतिम समझौता होने तक विवाद को पूरी तरह समाप्त मानना जल्दबाजी होगी। आने वाले तकनीकी विमर्श और आधिकारिक निर्णय इस लंबे विवाद की अगली दिशा तय करेंगे।

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