Supreme Court Manipur मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और संदिग्ध मौतों से जुड़े मामलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 17 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मणिपुर सरकार से राहत शिविरों में हुई 25 संदिग्ध मौतों की विस्तृत जानकारी मांगी।
यह मामला 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़े यौन हिंसा मामलों की जांच और कार्यवाही से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया। सुप्रीम कोर्ट की उपलब्ध कार्यवाही सूची में 17 सितंबर की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ दर्ज है।
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Supreme Court Manipur ने चीफ सेक्रेटरी से मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव को 25 संदिग्ध मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में मौतों से जुड़े पोस्टमार्टम दस्तावेज और मृत्यु के कारणों से संबंधित जानकारी शामिल करने को कहा गया है।
अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि पूर्व जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रहीं न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति ने इन मौतों के संबंध में 4 जुलाई को जानकारी मांगी थी, तो उस पर राज्य सरकार की ओर से क्या कदम उठाए गए।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार से उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा। इस संबंध में समकालीन रिपोर्टिंग में अदालत की कड़ी टिप्पणी भी दर्ज की गई है।
राहत शिविरों में 640 मौतों का आंकड़ा
अदालत के समक्ष रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर के आठ जिलों के राहत शिविरों में कुल 640 मौतें दर्ज होने की जानकारी दी गई। इनमें से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम किए जाने की बात सामने आई।
सुप्रीम कोर्ट ने इस अंतर पर सवाल उठाया कि जब कई मामलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए थे, तो पोस्टमार्टम केवल 20 मामलों में ही क्यों किए गए। अदालत ने कुछ मामलों में दिए गए ₹20,000 से ₹30,000 के मुआवजे को लेकर भी जानकारी मांगी।
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Supreme Court Manipur में जांच को लेकर निर्देश
अदालत ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को संदिग्ध मौतों के मामलों में तत्काल कार्रवाई करने को कहा। निर्देश के अनुसार, जहां आवश्यक हो वहां सभी संदिग्ध मौतों के संबंध में FIR दर्ज कराने और मृत्यु के कारणों की उचित जांच सुनिश्चित करने की बात कही गई।
यह निर्देश उन मामलों की जांच से संबंधित है जिन्हें राहत शिविरों में हुई संदिग्ध मौतों के रूप में अदालत के समक्ष रखा गया है। अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
3,020 मामलों की जांच जारी
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जांच की स्थिति से जुड़ी जानकारी अदालत के सामने रखी।
बताया गया कि मणिपुर के आठ जिलों में 42 विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए हैं। कुल 3,020 मामले जांच के दायरे में हैं।
इनमें से 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है, जबकि 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई। इसके अलावा 1,135 मामलों में जांच जारी है और 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुके हैं।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी भी कई स्तरों पर जारी है।
विशेष अदालतों को लेकर भी चर्चा
पीड़ितों की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि गुवाहाटी की विशेष अदालत में मामलों की सुनवाई सप्ताह में केवल दो दिन हो रही है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सप्ताह में दो दिन सुनवाई से भी मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, CBI से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए दो विशेष अदालतें स्थापित करने की संभावना पर विचार करने की बात कही गई।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संबंध में गुवाहाटी हाईकोर्ट की आवश्यकताओं पर तत्काल विचार करने का निर्देश दिया।
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आगे क्या होगा?
Supreme Court Manipur मामले में अब मणिपुर सरकार की ओर से 25 संदिग्ध मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। पोस्टमार्टम, FIR, जांच और मौत के कारणों से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों से जुड़े मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी है। 2023 की हिंसा से संबंधित मामलों में जांच, चार्जशीट, क्लोजर रिपोर्ट और ट्रायल की प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर जारी है।
Supreme Court Manipur सुनवाई में राहत शिविरों की 25 संदिग्ध मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगना इस मामले की न्यायिक निगरानी में एक महत्वपूर्ण अगला कदम है। अदालत ने पोस्टमार्टम, FIR और जांच की स्थिति पर जानकारी मांगी है, जबकि 3,020 मामलों की जांच और 33 मामलों में ट्रायल शुरू होने की जानकारी भी सामने आई है। आगे की स्थिति मणिपुर सरकार की रिपोर्ट और संबंधित जांच की प्रगति से स्पष्ट होगी।
