Ravi Nigam के खिलाफ दुर्ग जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सुपेला क्षेत्र के रावण भाठा निवासी 35 वर्षीय रवि निगम को एक साल के लिए जिला बदर किया गया है।
जिला दंडाधिकारी ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत यह आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक रवि निगम को केवल दुर्ग ही नहीं, बल्कि राजनांदगांव, रायपुर, धमतरी, बालोद और बेमेतरा जिलों की सीमा से भी बाहर रहना होगा।
प्रशासन ने उसे एक सप्ताह के भीतर इन जिलों की सीमा से बाहर जाने का निर्देश दिया है। जिला बदर की अवधि के दौरान सक्षम अनुमति के बिना इन जिलों में प्रवेश करने पर कार्रवाई हो सकती है।
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Ravi Nigam के खिलाफ 13 साल में 5 मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार Ravi Nigam के खिलाफ वर्ष 2013 से 2025 के बीच सुपेला और पद्मनाभपुर थानों में कुल पांच आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
इन मामलों में गाली-गलौज, मारपीट, जान से मारने की धमकी, रास्ता रोकने, बलवा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराओं का उल्लेख है।
वर्ष 2013 के एक मामले में मारपीट और धमकी के आरोप दर्ज हुए थे। वहीं 2018 के मामले में मारपीट और धमकी के अलावा घर के दरवाजे को पत्थर मारकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था।
इन मामलों में आसपास के कुछ लोगों के साथ मारपीट किए जाने की शिकायत का भी उल्लेख सामने आया है। हालांकि, किसी मामले में आरोप दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के समान नहीं है।
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दुकान बंद कराने को लेकर भी विवाद
वर्ष 2023 में सुपेला थाने में दर्ज एक मामले में दुकान बंद कराने को लेकर विवाद सामने आया था। शिकायत के मुताबिक, Ravi Nigam, ज्योति शर्मा और उनके साथ आए लोगों पर दुकान के बाहर रखे सामान को डंडे से नुकसान पहुंचाने और दुकानदार को घेरकर धमकाने का आरोप लगाया गया।
इसी वर्ष एक अन्य मामले में मारपीट, बलवा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराएं लगाई गई थीं।
इसके बाद वर्ष 2025 में पद्मनाभपुर थाने में भी धमकी और मारपीट से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
पुलिस रिपोर्ट के बाद प्रशासन का फैसला
जिला बदर की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने रवि निगम से संबंधित आपराधिक रिकॉर्ड, पुराने मामलों के दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य सामग्री जिला प्रशासन के सामने रखी।
पुलिस रिपोर्ट में लोगों को डराने-धमकाने, मारपीट करने और विवाद की स्थिति में भीड़ जुटाकर कानून-व्यवस्था प्रभावित करने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया।
प्रशासन ने सुनवाई के बाद माना कि पहले की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का अपेक्षित असर नहीं हुआ। इसके बाद सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक साल के जिला बदर का आदेश जारी किया गया।
Ravi Nigam का संगठनात्मक विवादों से जुड़ा नाम
Ravi Nigam का नाम पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े विवादों में भी सामने आया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 17 जनवरी 2022 को उन्हें विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल से निष्कासित किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद वह छत्तीसगढ़ बजरंग दल से जुड़े और भिलाई जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
अप्रैल 2026 में चर्च से पैसे मांगने से संबंधित कथित ऑडियो को लेकर भी विवाद हुआ था। इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ बजरंग दल के सभी पदों से हटाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
इन घटनाओं के संबंध में अलग-अलग स्तर पर दावे और संगठनात्मक निर्णय सामने आए हैं, इसलिए इन्हें संबंधित पक्षों के बयानों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
Ravi Nigam का नाम भाजयुमो सूची में भी आया
अप्रैल 2026 में Ravi Nigam का नाम भारतीय जनता युवा मोर्चा की जिला कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष के रूप में शामिल होने की जानकारी सामने आई थी।
नाम सामने आने के बाद इसका विरोध हुआ। विवाद बढ़ने के बाद पूरी सूची को अमान्य कर नई सूची जारी किए जाने की बात सामने आई। नई सूची में रवि निगम का नाम नहीं था।
अब जिला बदर की कार्रवाई के बाद रवि निगम को एक साल तक दुर्ग सहित छह जिलों की सीमा से बाहर रहना होगा।
जिला बदर आदेश का क्या मतलब?
जिला बदर की कार्रवाई का उद्देश्य किसी व्यक्ति की गतिविधियों से कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति पर संभावित प्रभाव को रोकना होता है। इस मामले में प्रशासन ने उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आदेश जारी किया है।
रवि निगम को निर्धारित अवधि में संबंधित जिलों से बाहर रहना होगा। यदि वह अवधि के दौरान सक्षम अनुमति के बिना इन जिलों में प्रवेश करता है, तो आदेश के उल्लंघन की स्थिति में आगे की कानूनी कार्रवाई का सवाल उठ सकता है।
Ravi Nigam के खिलाफ दुर्ग जिला प्रशासन की एक साल की जिला बदर कार्रवाई कानून-व्यवस्था से जुड़ा अहम कदम है। पुलिस रिकॉर्ड में 2013 से 2025 के बीच पांच मामले दर्ज होने और पूर्व प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने का हवाला दिया गया है। अब उन्हें दुर्ग समेत छह जिलों की सीमा से बाहर रहना होगा। आगे इस आदेश के पालन और किसी संभावित कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।
