Paddy को लेकर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बड़ा संकट सामने आया है। प्रदेश के 114 संग्रहण केंद्रों में करीब 1.57 लाख टन धान खुले में पड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 487.98 करोड़ रुपये बताई जा रही है। लगातार हो रही बारिश के कारण इस धान के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
संग्रहण केंद्रों पर धान को तिरपाल और कैप कवर के नीचे रखा गया है। बारिश के बीच नमी बढ़ने, बोरियां भीगने, पानी लगने, सड़न और अंकुरण जैसी समस्याएं सामने आने की आशंका है।
यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि धान लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त और व्यवस्थित भंडारण व्यवस्था जरूरी होती है। उठाव में देरी होने पर बारिश के मौसम में नुकसान की संभावना और बढ़ जाती है।
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बारिश से Paddy खराब होने का खतरा
बारिश के कारण खुले में रखे Paddy की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। यदि बोरियों में पानी या अत्यधिक नमी पहुंचती है तो धान में फफूंद, सड़न और अंकुरण जैसी समस्या हो सकती है।
इसके अलावा संग्रहण केंद्रों पर तिरपाल की कमी और जलजमाव जैसी समस्याएं भी कई क्षेत्रों में चिंता का कारण बनी हुई हैं। बस्तर संभाग में करीब 1.46 लाख क्विंटल धान खराब होने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
धान के रखरखाव की समस्या केवल बारिश तक सीमित नहीं है। हर साल उठाव में देरी, सुखा, कीट और चूहों के कारण भी धान में शॉर्टेज और खराबी की स्थिति बनती है।
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बस्तर, रायपुर और दुर्ग में सबसे ज्यादा Paddy
प्रदेश के बस्तर, रायपुर और दुर्ग जिले इस समय सबसे अधिक चिंता वाले क्षेत्रों में हैं। इन तीन जिलों में ही करीब 51,064.671 टन धान अटका हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 158.30 करोड़ रुपये है।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बारिश के बीच खुले में रखे स्टॉक का जल्द से जल्द उठाव हो। यदि मौसम लगातार खराब रहता है तो धान की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और सरकार को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में संग्रहण केंद्रों से समय पर उठाव और सुरक्षित गोदामों में भंडारण बेहद जरूरी है।
Paddy शॉर्टेज ने भी बढ़ाई चिंता
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान के लेखा मिलान के दौरान प्रदेश के 26 जिलों में करीब 68,491 टन धान की कमी सामने आई थी। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सबसे अधिक कमी कांकेर जिले में दर्ज की गई थी।
इससे पहले भी धान के खुले में पड़े स्टॉक, उठाव में देरी और कस्टम मिलिंग से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में मौजूदा बारिश के दौरान बचा हुआ Paddy सुरक्षित रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
धान की कमी और खराबी का सीधा असर सरकारी खरीद व्यवस्था और सार्वजनिक संसाधनों पर पड़ता है। इसलिए स्टॉक का समय पर मिलिंग और सुरक्षित भंडारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मिलिंग में देरी, 122 मिलरों को नोटिस
धान के निराकरण में कस्टम मिलिंग की देरी भी प्रमुख कारणों में शामिल बताई जा रही है। वहीं, पक्के गोदामों की सीमित उपलब्धता के कारण कई जगह खुले में भंडारण की स्थिति बनी हुई है।
शासन ने चावल जमा करने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल 2026 निर्धारित की थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, समयसीमा के बाद भी कई मिलरों द्वारा चावल जमा नहीं किया गया। इसके बाद शासन ने कुल 122 मिलरों को नोटिस जारी किया है।
राज्य की धान खरीदी नीति में कस्टम मिलिंग को कम्प्यूटरीकृत प्रक्रिया से संचालित करने और खरीदी व्यवस्था की निगरानी के प्रावधान भी किए गए थे।
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किसानों और सरकारी व्यवस्था के लिए चुनौती
धान छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में बड़ी मात्रा में Paddy का खुले में पड़े रहना केवल भंडारण की समस्या नहीं बल्कि सरकारी संसाधनों और किसानों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा भी है।
बारिश के दौरान धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त कवर, जल निकासी, नियमित निरीक्षण और समय पर उठाव जरूरी है। साथ ही मिलिंग प्रक्रिया में तेजी लाने से खुले में रखे स्टॉक को कम किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में करीब 488 करोड़ रुपये के Paddy का खुले में पड़ा होना बारिश के बीच गंभीर चिंता का विषय है। 114 संग्रहण केंद्रों पर रखे इस स्टॉक को जल्द सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना जरूरी है।
बस्तर, रायपुर और दुर्ग में बड़ी मात्रा में धान अटका होने के साथ ही पुराने स्टॉक में सामने आई 68,491 टन की कमी और 122 मिलरों को जारी नोटिस व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करते हैं। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता धान का समय पर उठाव, सुरक्षित भंडारण और मिलिंग प्रक्रिया में तेजी लाना है।
