Child Rights को लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, कलाकारों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने महत्वपूर्ण चर्चा की। सोमवार शाम आयोजित “Creative Voices: A Meetup” में करीब 30 क्रिएटर्स शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य बच्चों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने और सोशल मीडिया की रचनात्मक ताकत का सकारात्मक इस्तेमाल करने पर विचार करना था।
कार्यक्रम में बच्चों के अधिकार, स्वास्थ्य, शिशु मृत्यु दर, मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों से इन विषयों को अपनी रचनात्मक सामग्री के माध्यम से व्यापक सार्वजनिक संवाद का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया।
WhatsApp पर 4thnation चैनल जॉइन करें
Child Rights पर क्रिएटर्स की अहम भूमिका
कार्यक्रम की शुरुआत एक रोचक परिचय गतिविधि से हुई। प्रतिभागियों ने अपने परिचय को बचपन की यादों से जोड़कर साझा किया। इस गतिविधि ने सभी को अपने बचपन के अनुभवों से जुड़ने और फिर आज के बच्चों की वास्तविकताओं तथा आकांक्षाओं पर बातचीत करने का अवसर दिया।
UNICEF छत्तीसगढ़ के कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट अनिल गुलाटी और हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. गजेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों को समाज के चेंजमेकर्स के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि रचनात्मक समुदाय बच्चों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता और सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
गुलाटी ने बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए रायपुर और पूरे छत्तीसगढ़ में बच्चों के मुद्दों को लेकर मजबूत संवाद की जरूरत बताई। उन्होंने क्रिएटर्स से अपील की कि वे बच्चों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करें और उन्हें अपनी डिजिटल पहुंच के माध्यम से लोगों तक पहुंचाएं।
यह भी पढ़ें: School Education Reform: छत्तीसगढ़ के 5 जिलों में होगी औचक जांच
Child Rights के लिए विश्वसनीय जानकारी जरूरी
बैठक में यह बात भी सामने आई कि सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़े संवेदनशील विषयों को उठाते समय विश्वसनीय और तथ्यपरक जानकारी जरूरी है।
अनिल गुलाटी ने बताया कि UNICEF तकनीकी जानकारी और विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकता है। इससे क्रिएटर्स विशेषज्ञ जानकारी को सरल और प्रभावी सोशल मीडिया कंटेंट में बदलकर ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकेंगे।
WhatsApp पर 4thnation चैनल जॉइन करें
बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक सेहत पर चर्चा
UNICEF छत्तीसगढ़ के हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. गजेंद्र सिंह ने बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर जानकारी साझा की। उन्होंने खासतौर पर बाल स्वास्थ्य, शिशु मृत्यु दर और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि इन विषयों का बच्चों के जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य पर लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए बच्चों से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दों पर समाज में जागरूकता और सही जानकारी आधारित संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है।
UNICEF छत्तीसगढ़ के हेल्थ ऑफिसर श्वेताभ त्रिपाठी ने भी कार्यक्रम में अपने बचपन से जुड़े अनुभव साझा किए।
सोशल मीडिया की ताकत और जिम्मेदारी
मीडिया प्रोफेशनल सना तमकीन ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स लोगों के व्यवहार, सोच और धारणाओं को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
खासकर युवा पीढ़ी पर सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए उन्होंने क्रिएटर्स से अपनी पहुंच और प्रभाव का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्रिएटर्स बच्चों और उनकी जरूरतों की आवाज बनकर समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाने में मदद कर सकते हैं।
जमीनी मुद्दों को रचनात्मक तरीके से उठाने पर जोर
वरिष्ठ पत्रकार डी. श्याम कुमार ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने अपने पत्रकारिता अनुभव साझा करते हुए जमीनी स्तर के मुद्दों को समझने और उन्हें संवेदनशीलता तथा प्रामाणिकता के साथ लोगों तक पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, कलाकार और डिजिटल क्रिएटर्स शामिल हुए। इनमें प्रिया लालवानी, आरजे अनिमेष, स्वाति खंडेलवाल, अंजनी गांगुली, स्पर्श लखानी, ताशिश उपाध्याय, प्रियांशु सिंह, देवेश बजाज, रुबल सिंह, सत्यम यदु, दामिनी बंजारे, अंकित दुबे और राहुल गुप्ता सहित अन्य प्रतिभागी मौजूद रहे।
Child Rights के लिए बदलाव का संकल्प
बैठक के अंत में प्रतिभागियों ने बच्चों से जुड़े मुद्दों को अपनी रचनात्मक आवाज और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सामने लाने की प्रतिबद्धता जताई।
क्रिएटर्स ने माना कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। इसका इस्तेमाल बच्चों के अधिकारों, स्वास्थ्य और जरूरतों को लेकर जागरूकता बढ़ाने तथा सकारात्मक सामाजिक संवाद तैयार करने के लिए भी किया जा सकता है।
इस पहल का उद्देश्य ऐसे क्रिएटर्स का समुदाय तैयार करना है, जो रचनात्मकता, डिजिटल प्रभाव और विश्वसनीय जानकारी को एक साथ जोड़कर बच्चों की आवाज को मजबूत कर सके।
रायपुर में आयोजित Child Rights केंद्रित Creative Voices Meetup ने यह संदेश दिया कि बच्चों के मुद्दों को समाज के बड़े संवाद का हिस्सा बनाने में क्रिएटिव समुदाय की अहम भूमिका हो सकती है। 30 इंफ्लुएंसर्स, कलाकारों और कंटेंट क्रिएटर्स का यह जुटान बच्चों के स्वास्थ्य, मानसिक सेहत और अधिकारों पर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि सोशल मीडिया की ताकत को विश्वसनीय जानकारी और संवेदनशील रचनात्मकता के साथ जोड़ा जाए, तो यह बच्चों के लिए सकारात्मक और स्थायी बदलाव की मजबूत आवाज बन सकती है।
