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Phaleshwar Nath Mahadev मंदिर में CM साय ने की पूजा

Phaleshwar Nath Mahadev मंदिर में सावन मास और नागपंचमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय और परिवार के सदस्यों के साथ जशपुर जिले के गृहग्राम बगिया स्थित श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पहुंचे।

मैनी नदी के सुरम्य तट पर स्थित मंदिर में मुख्यमंत्री ने भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली के साथ छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।

मंदिर परिसर में चल रहे विशेष धार्मिक अनुष्ठान में मुख्यमंत्री और उनकी धर्मपत्नी ने श्रद्धालुओं के साथ अपने हाथों से पार्थिव शिवलिंग बनाए और उनका विधि-विधान से पूजन एवं अभिषेक किया।

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Phaleshwar Nath Mahadev में 1,11,111 पार्थिव शिवलिंग

Phaleshwar Nath Mahadev मंदिर में 17 से 19 अगस्त 2026 तक तीन दिवसीय विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है। इस अनुष्ठान में कुल 1 लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग के निर्माण और पूजन का संकल्प लिया गया है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु सामूहिक रूप से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर भगवान भोलेनाथ की आराधना कर रहे हैं। सामूहिक शिव आराधना के माध्यम से क्षेत्र और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति तथा लोककल्याण की कामना की जा रही है।

वैदिक मंत्रोच्चार और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। मैनी नदी के तट पर आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान बगिया और आसपास के क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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नागपंचमी पर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को नागपंचमी और पवित्र सावन मास की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सावन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है और भगवान भोलेनाथ लोकमंगल तथा कल्याण के प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने कामना की कि महादेव की कृपा छत्तीसगढ़ के प्रत्येक परिवार पर बनी रहे। उन्होंने प्रदेश के अन्नदाता किसानों के खेत-खलिहान समृद्ध होने और राज्य में सुख, शांति तथा खुशहाली लगातार बढ़ने की प्रार्थना की।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और परमात्मा के प्रति श्रद्धा का अद्भुत समन्वय है। नदियां, वन, पर्वत और जीव-जगत हमारी आस्था और जीवन परंपरा के अभिन्न हिस्से हैं।

Phaleshwar Nath Mahadev अनुष्ठान से प्रकृति और लोककल्याण का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि सावन में शिव आराधना हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, लोककल्याण और सेवा का संदेश देती है। इसी भावना के साथ सामूहिक पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन किया जा रहा है।

इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी ने बगिया के माहौल को पूरी तरह शिवमय बना दिया है। आसपास के क्षेत्र से भी लोग मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हो रहे हैं।

तीन दिन चलेगा विशेष धार्मिक अनुष्ठान

अनुष्ठान के पहले दिन 17 अगस्त को पार्थिव शिवलिंग निर्माण के साथ पूजन, अभिषेक, आरती और प्रसाद वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान शिव की आराधना की।

18 अगस्त को भी पार्थिव शिवलिंग निर्माण, पूजन और अभिषेक के बाद आरती एवं प्रसाद वितरण किया जाएगा। इसके लिए मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजन की व्यवस्थाएं जारी रहेंगी।

तीन दिवसीय अनुष्ठान का समापन 19 अगस्त को पार्थिव शिवलिंग पूजन और विशेष पूर्णाहुति के साथ होगा। पूर्णाहुति के बाद धार्मिक अनुष्ठान का विधिवत समापन किया जाएगा।

आस्था का प्रमुख केंद्र बना मंदिर

Phaleshwar Nath Mahadev मंदिर में चल रहे इस विशेष आयोजन से बगिया और आसपास का पूरा क्षेत्र शिवभक्ति में सराबोर है। मैनी नदी के तट पर वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं के जयकारों से आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।

मुख्यमंत्री का परिवार सहित मंदिर पहुंचना और सामूहिक पार्थिव शिवलिंग निर्माण में शामिल होना आयोजन के प्रति उनकी धार्मिक आस्था और क्षेत्र से जुड़ाव को भी दर्शाता है।

जशपुर जिले से जुड़ी प्रशासनिक और स्थानीय जानकारी के लिए जशपुर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है। वहीं राज्य सरकार से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ शासन का आधिकारिक पोर्टल उपयोगी है।

लोकमंगल और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना

एक लाख 11 हजार 111 पार्थिव शिवलिंग के निर्माण और पूजन का यह संकल्प सामूहिक आस्था का बड़ा धार्मिक आयोजन है। श्रद्धालु भगवान शिव से प्रदेश की शांति, समृद्धि, खुशहाली और लोककल्याण की कामना कर रहे हैं।

Phaleshwar Nath Mahadev मंदिर में तीन दिनों तक चलने वाला यह अनुष्ठान सावन और नागपंचमी की धार्मिक आस्था को सामूहिक शिव आराधना से जोड़ रहा है। वैदिक मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच बगिया का यह मंदिर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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