Shivrinarayan Kanwar Yatra ने सावन के तीसरे रविवार को शिवरीनारायण से खरौद तक आस्था और भक्ति का अद्भुत माहौल बना दिया। शबरी की नगरी शिवरीनारायण से छत्तीसगढ़ की काशी कहे जाने वाले खरौद स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर तक निकली इस भव्य कांवड़ यात्रा में हजारों शिवभक्त शामिल हुए।
यह आयोजन लगातार पांचवें वर्ष किया गया। गाजे-बाजे, डीजे, धुमाल, भव्य झांकियों और बाबा महाकाल की शाही पालकी ने पूरे मार्ग को शिवमय कर दिया। रास्तेभर ‘बोल बम’, ‘हर-हर महादेव’, ‘बम-बम भोले’ और ‘जय जय शिवशंकर’ के जयकारे गूंजते रहे।
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के अनुसार खरौद स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आस्था केंद्र है। खरौद को प्राचीन मंदिरों की वजह से ‘छत्तीसगढ़ की काशी’ भी कहा जाता है।
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Shivrinarayan Kanwar Yatra का खास आकर्षण शाही पालकी
Shivrinarayan Kanwar Yatra में उज्जैन की तर्ज पर बाबा महाकाल की शाही पालकी निकाली गई। पालकी को आकर्षक रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया था। आयोजन में बाबा महाकाल को राजसी ठाठ-बाट के साथ सम्मान दिया गया।
आयोजकों के अनुसार उज्जैन में बाबा महाकाल की पालकी को कई पीढ़ियों से सलामी देने वाले बैरागी परिवार की ओर से विशेष तोप सलामी दी गई। घोड़ों के दल ने भी ध्वज सलामी दी, जबकि एनसीसी के कैडेट्स ने परेड के जरिए बाबा को विशेष सलामी अर्पित की।
यात्रा पुराना रपटा घाट से शुरू होकर रेस्ट हाउस रोड, केरा चौक, मेन रोड, बॉम्बे मार्केट, नटराज चौक और शबरी चौक बस स्टैंड होते हुए खरौद रोड से लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर पहुंची।
भव्य झांकियों और सलामी ने मोहा मन
यात्रा में महाराष्ट्र के अमरावती से आए करीब 20 कलाकारों की टीम ने जीवंत झांकियों की प्रस्तुति दी। इनके साथ विशाल नंदी की झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही।
विशालकाय नंदी की झांकी में भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान महादेव को शिव पंचायतन परिवार के साथ दर्शाया गया। त्रिशूल, डमरू और वासुकि के साथ भगवान शिव की प्रतिमा ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा।
आदियोगी की विशाल प्रतिमा, अघोरी टीम का फायर शो और अलग-अलग वेशभूषा में सजे पात्र भी यात्रा का हिस्सा रहे। यात्रा में देशभक्ति और समसामयिक थीम से जुड़ी झांकी भी शामिल की गई।
डीजे और धुमाल की धुन पर शिवभक्त जमकर झूमते नजर आए। पूरे शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।
फूलों की बारिश और सेवा से हुआ स्वागत
Shivrinarayan Kanwar Yatra के पूरे मार्ग में स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं का जगह-जगह स्वागत किया। लोगों ने यात्रा पर पुष्पवर्षा की और शिवभक्तों के लिए चाय, पानी, शरबत, पोहा, पूड़ी, खीर और फल की व्यवस्था की।
कई परिवारों ने अपने घरों और दुकानों के सामने बाबा महाकाल की पालकी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
शिवरीनारायण का धार्मिक महत्व भी काफी पुराना है। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग शिवरीनारायण को धार्मिक नगरी बताते हुए इसे राम और माता शबरी से जुड़ी आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बताता है।
लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर में विशेष अभिषेक
खरौद पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान लक्ष्मणेश्वर महादेव की विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिर में पंचामृत से अभिषेक किया गया और भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन किए।
सरकारी जानकारी के मुताबिक लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर की पौराणिक मान्यता भगवान श्रीराम के कालखंड से जुड़ी है। मान्यता है कि भगवान लक्ष्मण ने यहां मंदिर की स्थापना की थी।
भंडारे के साथ हुआ यात्रा का समापन
यात्रा के समापन के बाद मध्यनगरी चौक में डोम पंडाल के नीचे विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। खरौद मंदिर से भंडारा स्थल तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष बस सेवा भी रखी गई।
भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने चावल, दाल, पूड़ी, सब्जी और खीर का प्रसाद ग्रहण किया। इस तरह धार्मिक आस्था, सेवा और सामाजिक सहभागिता के साथ भव्य आयोजन का समापन हुआ।
Shivrinarayan Kanwar Yatra ने इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं को एक साथ जोड़ते हुए शिवभक्ति का विशाल स्वरूप दिखाया। शाही पालकी, आकर्षक झांकियां, पुष्पवर्षा, जयकारों और भंडारे ने इस यात्रा को यादगार बना दिया। शिवरीनारायण से खरौद तक उमड़ा भक्तों का जनसैलाब छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत तस्वीर पेश करता नजर आया।
