Naxalism Chhattisgarh को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 16 अगस्त को बड़ा बयान दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है, हालांकि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के शब्दों में मौजूद “दिमागी नक्सल” की चुनौती का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने ये बातें रायपुर के टाउन हॉल में छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की ओर से आयोजित स्वतंत्रता दिवस प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान कहीं। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन, संघर्ष और तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया।
📲 4thNation चैनल से जुड़ें: WhatsApp Channel
PM मोदी के बयान का CM साय ने किया समर्थन
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री मोदी के 15 अगस्त के लाल किले से दिए गए भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ का विशेष रूप से जिक्र किया। साय ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद पर काबू पाने के बाद अब वैचारिक स्तर पर मौजूद चुनौती को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता मिली है, लेकिन उनके अनुसार “दिमागी नक्सल” अभी मौजूद हैं। उन्होंने युवाओं को देश के विकास से जोड़ने और ऐसी विचारधाराओं को पहचानने की बात कही।
यह भी पढ़ें: Gold Smuggling Chhattisgarh में बड़ी कार्रवाई
Naxalism Chhattisgarh पर सरकार का फोकस
छत्तीसगढ़ में लंबे समय से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि सुरक्षा अभियानों और विकास कार्यों के विस्तार से ऐसे इलाकों में परिस्थितियां बदल रही हैं।
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। उन्होंने देश और प्रदेश के विकास में शांति तथा सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया।
Naxalism Chhattisgarh के बीच बोटेर में पहली बार तिरंगा
इसी बीच नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के बोटेर गांव में स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह इलाका लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहा है।
बोटेर के सरकारी प्राथमिक स्कूल और 29वीं बटालियन ITBP के कैंप में ध्वजारोहण किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पहले नक्सली गतिविधियों और उनके कथित प्रतिबंधों के कारण गांव में राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन नहीं हो पाता था।
अबूझमाड़ के गांव में बदली तस्वीर
ऑर्चा थाना प्रभारी राजेश कुमार पांडे के अनुसार, बोटेर में पहली बार ध्वजारोहण हुआ। इस अवसर पर ग्रामीणों को जलपान भी कराया गया। उनके मुताबिक, पुलिस कैंप खुलने के बाद ग्रामीणों में उत्साह दिखाई दे रहा है और लोग सुरक्षा बलों से गर्मजोशी से मिल रहे हैं।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारे लगाए। ITBP जवानों की मौजूदगी में हुआ यह आयोजन ग्रामीणों के लिए खास रहा।
Naxalism Chhattisgarh के बाद विकास की नई उम्मीद
बोटेर में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाना केवल एक समारोह नहीं, बल्कि क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों का प्रतीक भी माना जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ प्रशासनिक गतिविधियों और विकास कार्यों को दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाने की कोशिश जारी है।
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ पुनर्वास और विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। गृह मंत्रालय भी वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराता है।
स्वतंत्रता सेनानियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन
रायपुर के टाउन हॉल में आयोजित प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों के प्रोफाइल और तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। मुख्यमंत्री साय ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले प्रदेश के नायकों को याद किया।
इस आयोजन ने स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक महत्व के साथ छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन के स्थानीय इतिहास को भी सामने रखा। राज्य के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े नायकों की भूमिका को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में ऐसी प्रदर्शनियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
Naxalism Chhattisgarh को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान और अबूझमाड़ के बोटेर में पहली बार तिरंगा फहराया जाना राज्य में बदलती तस्वीर को सामने लाता है। सरकार के अनुसार सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में महत्वपूर्ण सफलता मिली है, जबकि अब दूरस्थ क्षेत्रों में विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक पहुंच बढ़ाना अगली बड़ी प्राथमिकता है। बोटेर में बच्चों और ग्रामीणों के बीच तिरंगे का उत्सव इसी बदलाव की एक अहम झलक है।
