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दुर्ग में Digital Justice पर महत्वपूर्ण कार्यशाला

Digital Justice को मजबूत बनाने की दिशा में दुर्ग जिला न्यायालय में महत्वपूर्ण पहल की गई। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा द्वारा 2 अगस्त 2026 को रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला “Strengthening Digital Justice Through New Criminal Laws” में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जिला स्तरीय संयुक्त कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला का विषय “मीडिएशन 3.0, न्याय श्रुति एवं ICJS” रहा। इसका उद्देश्य नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ तकनीक आधारित न्याय वितरण प्रणाली को और मजबूत करना था।

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Digital Justice कार्यशाला का उद्देश्य

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग की इस पहल में न्यायिक अधिकारियों, अभियोजन अधिकारियों और न्यायिक कर्मचारियों को डिजिटल न्याय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई।

कार्यशाला में खास तौर पर Mediation 3.0, न्याय श्रुति एप्लिकेशन, ICJS और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के प्रबंधन जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी साझा की गई।

राज्य में न्यायिक नवाचार और तकनीक आधारित सुधारों को बढ़ावा देने में न्यायमूर्ति पी. पी. साहू के मार्गदर्शन और प्रेरणा का भी उल्लेख किया गया।

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Mediation 3.0 पर विशेष प्रस्तुति

कार्यक्रम की शुरुआत कंप्यूटराईजेशन समिति के अध्यक्ष एवं जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश दीपक कोसले के स्वागत उद्बोधन से हुई।

उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्य और उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में डिजिटल तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण है। न्यायिक प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण के लिए तकनीक आधारित कार्य-संस्कृति को मजबूत करना जरूरी है।

इसके बाद व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी कामिनी जायसवाल ने Mediation 3.0 पर प्रस्तुति दी। उन्होंने मध्यस्थता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान आवश्यकता और वैकल्पिक विवाद समाधान में इसकी भूमिका को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

उन्होंने प्रोजेक्टर पर स्लाइड्स के जरिए विषय को सरल तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे प्रतिभागियों को मध्यस्थता की व्यावहारिक प्रक्रिया समझने में मदद मिली।

Digital Justice में न्याय श्रुति और ICJS की भूमिका

कार्यशाला के अगले सत्र में व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी रवि महोबिया ने न्याय श्रुति और ICJS के बारे में विस्तृत तकनीकी जानकारी दी।

उन्होंने न्याय श्रुति एप्लिकेशन का वेबसाइट के माध्यम से लाइव प्रदर्शन किया। इस दौरान एप्लिकेशन के अलग-अलग मॉड्यूल और उनकी उपयोगिता को समझाया गया।

नवीन आपराधिक कानूनों के संदर्भ में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के प्रबंधन, डिजिटल रिकॉर्ड और न्यायिक कार्यप्रणाली में तकनीक के इस्तेमाल पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।

ICJS यानी Inter-operable Criminal Justice System का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े विभिन्न संस्थानों और उनके डेटा के बीच बेहतर डिजिटल समन्वय स्थापित करना है। eCourts की आधिकारिक सामग्री में ICJS के माध्यम से पुलिस और जेल जैसी प्रणालियों के साथ न्यायालयी प्रणाली के एकीकरण का उल्लेख किया गया है।

न्यायिक व्यवस्था में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल

कार्यशाला के मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने कहा कि मौजूदा समय में न्यायिक व्यवस्था में तकनीक का प्रभावी और जिम्मेदार इस्तेमाल समय की आवश्यकता है।

उन्होंने न्यायिक अधिकारियों, अभियोजन अधिकारियों और कर्मचारियों से Mediation 3.0 को केवल वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्था के रूप में नहीं देखने की अपील की।

उनके अनुसार, इसे न्यायालयों में सौहार्दपूर्ण वातावरण, मानवीय संवेदनशीलता, संतुलित व्यवहार और न्यायिक दक्षता बढ़ाने के माध्यम के रूप में अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों से शालीनता, संतुलन और सकारात्मक कार्य-संस्कृति बनाए रखने का आह्वान किया, ताकि न्याय वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जन-केंद्रित बन सके।

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अधिकारियों और कर्मचारियों ने लिया प्रशिक्षण

कार्यशाला में न्यायिक अधिकारी, लोक अभियोजक, शासकीय अधिवक्ता, जिला लोक अभियोजक, सहायक जिला लोक अभियोजक तथा आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।

प्रतिभागियों ने डिजिटल न्याय व्यवस्था, न्याय श्रुति, ICJS, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रबंधन और Mediation 3.0 से जुड़े विषयों पर चर्चा की तथा अपने विचार भी साझा किए।

कार्यक्रम का संचालन व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी प्रियंका गोस्वामी ने किया।

Digital Justice को मजबूत करने की दिशा में कदम

दुर्ग जिला न्यायालय की यह पहल न्याय व्यवस्था को तकनीक के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और विभिन्न संस्थानों के बीच डेटा समन्वय से न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

eCourts परियोजना के तहत देशभर में न्यायालयों के डिजिटल आधुनिकीकरण, eFiling, डिजिटल रिकॉर्ड और ICJS जैसे तकनीकी एकीकरण पर लगातार काम किया जा रहा है।

निष्कर्ष

Digital Justice की दिशा में दुर्ग जिला न्यायालय में आयोजित यह कार्यशाला न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। Mediation 3.0, न्याय श्रुति और ICJS जैसे डिजिटल माध्यमों की व्यावहारिक जानकारी से न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। नए आपराधिक कानूनों के दौर में तकनीक और न्यायिक प्रक्रिया का बेहतर समन्वय भविष्य की न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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