Eye Donation का एक प्रेरणादायक उदाहरण दुर्ग में सामने आया है। गुरुनानक नगर, दुर्ग निवासी स्वर्गीय श्रीमती झंकार बाई बोहरा के निधन के बाद उनके परिवार ने नेत्रदान का फैसला लिया। इस निर्णय के चलते उनके कॉर्निया दो जरूरतमंद नेत्रहीन लोगों की आंखों में रोशनी लौटाने में मदद कर सकते हैं।
परिवार की इस पहल को सामाजिक सेवा और मानवीय संवेदना की मिसाल बताया जा रहा है। नवदृष्टि फाउंडेशन के समन्वय से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई।
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परिवार ने लिया Eye Donation का फैसला
श्रीमती झंकार बाई बोहरा के निधन के बाद उनके भाई जीवन चंद जैन, जेठमल जैन, महेंद्र जैन और पारस झाबक ने नेत्रदान के लिए सहमति दी।
परिवार के इस निर्णय के बाद नवदृष्टि फाउंडेशन के सहयोग से आवश्यक प्रक्रिया शुरू की गई। मेडिकल टीम ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कॉर्निया कलेक्ट किया।
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के अनुसार कॉर्निया एक ऐसा ऊतक है जिसे मृत्यु के बाद दान किया जा सकता है और चिकित्सकीय उपयुक्तता जांच के बाद इसका उपयोग दृष्टि बहाल करने के लिए किया जा सकता है।
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Eye Donation से दो लोगों को मिल सकती है रोशनी
परिवार के इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दान किए गए कॉर्निया दो लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। नेत्रदान में पूरे नेत्र का प्रत्यारोपण नहीं किया जाता, बल्कि जरूरत के अनुसार कॉर्निया का उपयोग किया जाता है।
NOTTO की जानकारी के मुताबिक, मृत्यु के बाद दान किए गए दो कॉर्निया चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त होने पर अलग-अलग जरूरतमंद मरीजों के उपचार में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

मेडिकल टीम ने किया कॉर्निया कलेक्शन
नेत्रदान की प्रक्रिया शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की टीम ने पूरी की। टीम में डॉ. रिंकल अग्रवाल, डॉ. प्रनीस केरकेट्टा और नेत्रदान प्रभारी विवेक कसार शामिल रहे।
टीम ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत कॉर्निया सफलतापूर्वक कलेक्ट किया। नेत्रदान जैसी प्रक्रिया में समय महत्वपूर्ण होता है। NOTTO के ट्रांसप्लांट मैनुअल के अनुसार, कॉर्निया सामान्य परिस्थितियों में मृत्यु के बाद सीमित समय के भीतर रिट्रीव किया जाता है।
नवदृष्टि फाउंडेशन ने निभाई अहम भूमिका
Eye Donation की पूरी प्रक्रिया में नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्यों ने परिवार के साथ रहकर सहयोग किया। कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, रितेश जैन, हरमन दुलई, मुकेश राठी, प्रभुदयाल उजाला और उज्ज्वल पींचा इस दौरान मौजूद रहे।
संस्था को डॉ. अजय गोवर्धन और श्री कमल लुनिया का भी विशेष सहयोग मिला। संस्था के सदस्यों ने परिवार को प्रक्रिया से जुड़ी आवश्यक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराया।
परिवार ने दिया भावुक संदेश
स्वर्गीय झंकार बाई बोहरा के भतीजे उज्ज्वल जैन ने बताया कि उनकी बुआ धार्मिक प्रवृत्ति की थीं और हमेशा पूजा-पाठ तथा धार्मिक कार्यों में सक्रिय रहती थीं।
उन्होंने कहा कि उनके जाने के बाद भी उनके नेत्रों के माध्यम से दो लोगों के जीवन में उजाला आने का अवसर परिवार के लिए संतोष की बात है। परिवार ने उनके सेवा और सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़ने की बात कही।
Eye Donation से जागरूकता का संदेश
नवदृष्टि फाउंडेशन के रितेश जैन ने कहा कि झंकार बाई बोहरा का नेत्रदान समाज में जागरूकता बढ़ाने वाला कदम है। उनके अनुसार, इस तरह के फैसले दूसरे परिवारों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
NOTTO भी नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए देशभर में अभियान और सूचना सामग्री उपलब्ध कराता है। सरकारी जानकारी के अनुसार, आंखों या कॉर्निया के दान के लिए उम्र अकेले निर्णायक बाधा नहीं है; अंतिम चिकित्सकीय उपयुक्तता विशेषज्ञ तय करते हैं।
नेत्रदान को लेकर भ्रांतियां दूर करना जरूरी
नेत्रदान को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। NOTTO के अनुसार, कॉर्निया दान के बाद चेहरे को विकृत नहीं किया जाता और प्रक्रिया सम्मानपूर्वक की जाती है। साथ ही, चश्मा पहनने या कुछ सामान्य आंखों की समस्याएं अपने आप नेत्रदान को असंभव नहीं बनातीं।
ऐसे में विशेषज्ञ संस्थाओं से सही जानकारी लेना और परिवार के सदस्यों के साथ पहले से अपनी इच्छा साझा करना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
दुर्ग की Eye Donation की यह पहल मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायक उदाहरण है। स्वर्गीय झंकार बाई बोहरा के परिवार ने दुख की घड़ी में नेत्रदान का फैसला लेकर दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी की उम्मीद जगाई है। नवदृष्टि फाउंडेशन और मेडिकल टीम के सहयोग से कॉर्निया कलेक्शन की प्रक्रिया पूरी हुई। ऐसे संवेदनशील निर्णय समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ दूसरों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
