Bhupesh Baghel को छत्तीसगढ़ के 2023 विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका के मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर खारिज करने की मांग ठुकरा दी गई थी। इसका मतलब है कि याचिका अब मेरिट के आधार पर आगे बढ़ेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने Bhupesh Baghel की याचिका का निपटारा कर दिया। उन्होंने 15 जून 2026 के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उनकी ओर से चुनाव याचिका खारिज करने के लिए दायर आवेदन को अस्वीकार किया था।
Bhupesh Baghel के खिलाफ क्या है मामला?
यह मामला 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। पाटन विधानसभा सीट से Bhupesh Baghel चुनाव जीते थे। उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले विजय बघेल ने चुनाव याचिका दायर की थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 16 नवंबर 2023 को मतदान खत्म होने से पहले निर्धारित 48 घंटे की silence period के दौरान रैली या रोड शो आयोजित किया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह चुनावी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन था।
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2023 चुनाव में कितने वोट मिले थे?
2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट पर Bhupesh Baghel को 95,438 वोट मिले थे। उन्होंने भाजपा के विजय बघेल को हराया था, जिन्हें 75,715 वोट मिले थे। चुनाव परिणाम के बाद विजय बघेल ने चुनाव प्रक्रिया से संबंधित आरोपों को लेकर अदालत का रुख किया।
चुनाव याचिका में मुख्य तौर पर 48 घंटे की प्रतिबंधित अवधि में कथित चुनाव प्रचार को आधार बनाया गया है। इस अवधि का उद्देश्य मतदाताओं को मतदान से पहले बिना चुनावी प्रचार के स्वतंत्र रूप से विचार करने का अवसर देना है।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज क्यों नहीं की?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 15 जून 2026 के आदेश में कहा कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप ऐसे हैं, जिन्हें केवल शुरुआती स्तर पर कानूनी आधारहीन बताकर खारिज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने Representation of the People Act, 1951 की विभिन्न धाराओं से जुड़े तर्कों पर विचार किया। अदालत ने माना कि याचिका में पर्याप्त pleadings हैं और इसमें लगाए गए आरोप, यदि सबूतों से साबित होते हैं, तो चुनाव कानून के तहत गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कई आपत्तियां तथ्य और सबूत से जुड़ी हैं। इसलिए इनका फैसला प्रारंभिक स्तर पर नहीं बल्कि ट्रायल के दौरान साक्ष्यों की जांच के बाद किया जाना चाहिए।
Section 126 का विवाद क्या है?
इस मामले में चुनाव याचिका का एक प्रमुख आधार Representation of the People Act की Section 126 है। यह प्रावधान मतदान समाप्त होने से पहले के निर्धारित 48 घंटे में चुनाव संबंधी प्रचार या ऐसी सामग्री पर रोक से जुड़ा है, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है। चुनाव आयोग भी Section 126 के तहत 48 घंटे की अवधि के नियम को स्पष्ट करता है।
याचिका में आरोप है कि इसी प्रतिबंधित अवधि में कथित रैली या रोड शो हुआ था। हालांकि, आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। अदालत को ट्रायल के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन दावों पर निर्णय करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
Bhupesh Baghel ने हाईकोर्ट के 15 जून के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया, जिसके तहत चुनाव याचिका को शुरुआती चरण में खारिज करने से इनकार किया गया था।
इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि Bhupesh Baghel के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का प्रभाव फिलहाल इतना है कि चुनाव याचिका को केवल प्रारंभिक आपत्तियों के आधार पर खत्म नहीं किया गया है।
अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान सामने आने वाले तथ्यों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होगा।
अब आगे क्या होगा?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने 15 जून के आदेश में चुनाव याचिका को मेरिट पर सुनवाई के लिए आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया था। अदालत ने कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सहित साक्ष्यों की admissibility और evidentiary value जैसे मुद्दों पर उचित चरण में फैसला किया जाएगा।
इसलिए अब मामले में मुख्य ध्यान आरोपों के समर्थन में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर रहेगा। Bhupesh Baghel की ओर से भी तथ्य और कानून दोनों आधारों पर अपना पक्ष रखने का अवसर रहेगा।
Bhupesh Baghel मामले का राजनीतिक असर
यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। Bhupesh Baghel कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और 2023 विधानसभा चुनाव में पाटन से निर्वाचित हुए थे।
हालांकि, मौजूदा अदालती स्थिति को किसी चुनावी अपराध का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। अभी चुनाव याचिका की न्यायिक जांच जारी रहेगी और आरोपों की सत्यता का फैसला अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।
Bhupesh Baghel के खिलाफ चुनाव याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने मामले को खत्म करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ने दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब आरोपों की मेरिट और साक्ष्यों की जांच होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश आरोपों को सही ठहराने वाला अंतिम फैसला नहीं है। अब इस हाई-प्रोफाइल चुनाव याचिका में आगे की सुनवाई और साक्ष्य ही तय करेंगे कि 2023 के पाटन चुनाव को लेकर लगाए गए आरोपों का कानूनी परिणाम क्या होता है।
