06 अगस्त 2026 | नई दिल्ली/कोलकाता। Yusuf Pathan और मुर्शिदाबाद के दो अन्य सांसदों के फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर NCPI में शामिल हुए तीन सांसदों ने दिल्ली में आयोजित NDA बैठक से दूरी बनाए रखी। हालांकि कुछ घंटे बाद यही सांसद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल हुए। इस घटनाक्रम के बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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Yusuf Pathan समेत तीन सांसद NDA बैठक में क्यों नहीं पहुंचे?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बहरामपुर से सांसद Yusuf Pathan, मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने मंगलवार को आयोजित NDA बैठक में हिस्सा नहीं लिया।
तीनों सांसद हाल ही में TMC छोड़कर NCPI में शामिल हुए हैं। उनका कहना है कि पार्टी बदलने का मतलब यह नहीं है कि वे NDA का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP को समर्थन देने का कोई सवाल नहीं है।
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BJP को समर्थन पर Yusuf Pathan और अन्य सांसदों का स्पष्ट रुख
अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने कहा कि वे NCPI के सदस्य हैं, लेकिन NDA का हिस्सा नहीं हैं। इसलिए भाजपा का समर्थन करने की खबरें सही नहीं हैं।
Yusuf Pathan ने भी इसी रुख का समर्थन किया। तीनों नेताओं के बयान के बाद यह साफ हो गया कि फिलहाल वे भाजपा समर्थक राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब बंगाल की राजनीति में दल-बदल और नए राजनीतिक समीकरण लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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Yusuf Pathan मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की बैठक में क्यों पहुंचे?
NDA बैठक में शामिल नहीं होने के कुछ घंटों बाद Yusuf Pathan समेत तीनों सांसद दिल्ली स्थित बंग भवन में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल हुए।
बैठक में हाल ही में NCPI से जुड़े करीब 20 सांसदों ने हिस्सा लिया। लगभग एक घंटे चली इस बैठक में सांसदों ने अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की।
अबू ताहेर ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों पर चर्चा के लिए बुलाया था। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के मुद्दे पर मुख्यमंत्री से मिलना और किसी राजनीतिक गठबंधन में शामिल होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
NCPI नेतृत्व भी असहज?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन सांसदों के इस रुख से NCPI नेतृत्व भी पूरी तरह सहज नजर नहीं आया।
हालांकि पार्टी की ओर से कहा गया कि सभी 20 सांसद एकजुट हैं और संगठन के भीतर किसी तरह का मतभेद नहीं है। इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जारी हैं।
शताब्दी रॉय के बयान से बढ़ी सियासी चर्चा
NCPI सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि मुर्शिदाबाद के तीन सांसदों की कुछ राजनीतिक मजबूरियां हो सकती हैं और मुख्यमंत्री भी इस स्थिति को समझते हैं।
वहीं सांसद रचना बनर्जी ने कहा कि पार्टी के सभी सांसद एकजुट हैं। इसके बावजूद शताब्दी रॉय की टिप्पणी के बाद राजनीतिक अटकलों को और बल मिला।
बैठक में उठे स्थानीय विकास के मुद्दे
बैठक के दौरान सांसदों ने अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़े कई मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने रखे।
रिपोर्ट के अनुसार, Yusuf Pathan ने अपने क्षेत्र से जुड़े 27 लाख रुपये के एक मामले को उठाया। इसके अलावा कई सांसदों ने विधानसभा चुनाव के बाद अपने समर्थकों को स्थानीय स्तर पर काम करने में आने वाली दिक्कतों की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री ने इन मामलों में सहयोग का भरोसा दिया।
बंगाल की राजनीति पर क्या होगा असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Yusuf Pathan और अन्य सांसदों द्वारा NDA बैठक से दूरी बनाने तथा BJP को समर्थन से इनकार करने का संदेश पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि TMC छोड़कर गए नेता भी भाजपा से दूरी बनाए रखते हैं, तो इसका असर राज्य के मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि इसके चुनावी प्रभाव को लेकर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
Yusuf Pathan समेत तीन सांसदों का NDA बैठक से दूर रहना और बाद में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं का कारण बन गया है। फिलहाल तीनों नेताओं ने BJP को समर्थन देने से साफ इनकार किया है। आने वाले दिनों में NCPI, TMC और भाजपा की राजनीतिक रणनीति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।
