Skip to main content

4thnation

NEET Paper Leak Protest: जंतर-मंतर पर पहुंचे पुलिस कांस्टेबल के दावे पर पुलिस का पलटवार

NEET Paper Leak Protest के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर उस समय नया मोड़ आ गया जब उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल शेर सिंह प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और दावा किया कि उन्होंने आंदोलन का समर्थन करने के लिए अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि कुछ ही घंटों बाद उत्तराखंड पुलिस ने उनके दावों को खारिज करते हुए बताया कि शेर सिंह पहले से ही निलंबित हैं और उनके खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई चल रही है।

👉 4thNation WhatsApp चैनल से जुड़ें: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


NEET Paper Leak Protest: जंतर-मंतर पर क्या हुआ?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शन के दौरान शेर सिंह मंच पर पहुंचे और आंदोलनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 15 दिन पहले उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया गया है।

शेर सिंह ने कहा कि उनकी तीन बहनें भी इस प्रदर्शन में शामिल हुई थीं और घायल हुईं। उनके अनुसार देश और युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए नौकरी का नुकसान कोई बड़ी बात नहीं है।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की अपील की और कहा कि लोकतंत्र में बदलाव का रास्ता हिंसा नहीं बल्कि मतदान है।


NEET Paper Leak Protest पर उत्तराखंड पुलिस का बड़ा खुलासा

शेर सिंह के दावों के कुछ घंटों बाद उत्तराखंड पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी किया।

कुमाऊं रेंज की पुलिस महानिरीक्षक (IG) निवेदिता कुकरेती ने वीडियो संदेश जारी कर बताया कि शेर सिंह 28 जून से पिथौरागढ़ में अपनी ड्यूटी से बिना अनुमति अनुपस्थित थे।

उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक द्वारा नोटिस भेजे जाने के बावजूद जवाब नहीं मिलने पर 20 जुलाई को उन्हें निलंबित कर दिया गया।

पुलिस के अनुसार शेर सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ एक गैंगस्टर से कथित सांठगांठ को लेकर कानूनी कार्रवाई भी चल रही है। इसलिए उनका इस्तीफे वाला दावा पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।

यह भी पढ़ें: World Breastfeeding Week: स्तनपान और स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने में मीडिया निभा सकता है बड़ी भूमिका


भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

अपने संबोधन में शेर सिंह ने बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि पटवारी भर्ती और वन विभाग जैसी परीक्षाओं के पेपर तक बिक रहे हैं।

हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य लगातार प्रभावित हो रहा है और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।


NEET Paper Leak Protest: राजनीति पर भी रखी राय

शेर सिंह ने आंदोलन को राजनीतिक मंच बनने से बचाने की बात कही।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को आंदोलन का समर्थन करना चाहिए, लेकिन इसका श्रेय लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने सांसद चंद्रशेखर आजाद का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने संसद में अपनी बात रखी, जबकि अन्य नेता मंच पर आकर भाषण और फोटो खिंचवाने तक सीमित रहे।

भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों के राजनीति में आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति बुरी नहीं है और समाज के लिए काम करने वाले लोगों को संसद में होना चाहिए।


समान शिक्षा प्रणाली की मांग

अपने भाषण के दौरान शेर सिंह ने देश में समान शिक्षा प्रणाली लागू करने की मांग भी उठाई।

उन्होंने कहा कि यदि देश में “वन नेशन, वन टैक्स” लागू हो सकता है तो “एक समान शिक्षा प्रणाली” भी लागू की जा सकती है।

उन्होंने दिल्ली पुलिस के जवानों से भी अपील की कि वे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई न करें क्योंकि वे भी किसानों और मजदूरों के परिवारों से आते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने भगत सिंह का प्रसिद्ध विचार दोहराते हुए कहा कि “क्रांति विचारों से आती है और विचार कभी नहीं मरते।”


मामले का दूसरा पक्ष भी जानना जरूरी

इस पूरे घटनाक्रम में दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

  • शेर सिंह का कहना है कि उन्होंने आंदोलन का समर्थन करने के लिए इस्तीफा दिया।
  • उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि वे पहले से निलंबित थे, लंबे समय से बिना अनुमति अनुपस्थित थे और उनके खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई जारी है।

ऐसे में इस मामले की अंतिम स्थिति संबंधित जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।


NEET Paper Leak Protest के दौरान उत्तराखंड पुलिस कांस्टेबल शेर सिंह की मौजूदगी ने आंदोलन को नया राजनीतिक और प्रशासनिक आयाम दे दिया। एक ओर उन्होंने खुद को युवाओं की आवाज बताते हुए शिक्षा और भर्ती प्रणाली में सुधार की मांग उठाई, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड पुलिस ने उनके दावों का खंडन करते हुए निलंबन और लंबित कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की। ऐसे में NEET Paper Leak Protest केवल परीक्षा प्रणाली पर सवालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी जवाबदेही, भर्ती प्रक्रिया और सार्वजनिक विश्वास की बहस का भी हिस्सा बन गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *