Sonam Raghuvanshi Bail मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (23 जुलाई 2026) को बड़ा फैसला सुनाते हुए मेघालय हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द कर दिया। अदालत ने नवविवाहिता पति राजा रघुवंशी की हत्या के मामले की आरोपी सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस चरण में आरोपी की रिहाई जारी रहने से मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हो सकती है।
Sonam Raghuvanshi Bail पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मेघालय सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के 29 जून के जमानत आदेश को निरस्त कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले का ट्रायल शुरू हो चुका है और यदि आरोपी फिलहाल जमानत पर रहती है तो इससे चल रही न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। इसलिए हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया जाना उचित है।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा नहीं होता है तो सोनम रघुवंशी दोबारा जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट में आवेदन कर सकती हैं।
क्या है Sonam Raghuvanshi Bail मामला?
यह मामला इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है। आरोप है कि शादी के बाद हनीमून के दौरान मेघालय में राजा रघुवंशी की हत्या कर दी गई थी, जिसमें उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी मुख्य आरोपी हैं।
सोनम रघुवंशी को पिछले वर्ष 9 जून को गिरफ्तार किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उनकी तीन जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज कर दी थीं। इसके बाद मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को गिरफ्तारी प्रक्रिया में त्रुटि का हवाला देते हुए उन्हें जमानत दे दी थी।
मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि गिरफ्तारी के आधार आरोपी को लिखित रूप से बताए गए थे। केवल गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) के स्थान पर गलती से धारा 403 लिख दी गई थी, जो एक टाइपिंग त्रुटि थी।
राज्य सरकार ने दलील दी कि इस त्रुटि से आरोपी के संवैधानिक अधिकारों का कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ।
गिरफ्तारी मेमो की गलती पर कोर्ट ने क्या कहा?
Sonam Raghuvanshi Bail मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल न बताने और पर्याप्त विवरण में कमी होने के बीच अंतर है।
पीठ ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारण बताए गए थे। केवल तकनीकी त्रुटि के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने माना कि इस गलती से आरोपी को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि यदि गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए थे, तो यह आपत्ति शुरुआती चरण में क्यों नहीं उठाई गई, जबकि पहले तीन जमानत आवेदन पहले ही खारिज हो चुके थे।
ट्रायल की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और अब आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया बाकी है।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष 50 से अधिक गवाह पेश करेगा, जिससे मुकदमे में समय लग सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा नहीं होता है, तो आरोपी नई जमानत याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होगी और वर्तमान आदेश उसके अधिकारों में बाधा नहीं बनेगा।
मामले की प्रमुख बातें
Sonam Raghuvanshi Bail केस अपडेट
- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द किया।
- सोनम रघुवंशी को तीन सप्ताह में सरेंडर करने का निर्देश।
- अदालत ने कहा कि जमानत ट्रायल को प्रभावित कर सकती है।
- गिरफ्तारी मेमो में धारा का उल्लेख टाइपिंग त्रुटि माना गया।
- छह महीने में ट्रायल पूरा नहीं होने पर दोबारा जमानत याचिका दायर की जा सकेगी।
Sonam Raghuvanshi Bail मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सर्वोपरि है। अदालत ने तकनीकी त्रुटि और गिरफ्तारी की वैधता के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए फिलहाल आरोपी को सरेंडर करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि ट्रायल में अनावश्यक देरी होने पर आरोपी को भविष्य में जमानत मांगने का अधिकार बना रहेगा।
