Mor Gaon Mor Pani अभियान के तहत दुर्ग जिला प्रशासन ने जलवायु परिवर्तन, गिरते भूजल स्तर और भविष्य की जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्षा जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की अभिनव पहल शुरू की है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के नेतृत्व में वाटरएड इंडिया (WaterAid India) के सहयोग से पाटन और धमधा विकासखंड के चयनित गांवों में यह अभियान संचालित किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य जल संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देना और चयनित गांवों को चरणबद्ध तरीके से Water Secure Villages (जल-सुरक्षित गांव) के रूप में विकसित करना है।
Mor Gaon Mor Pani के तहत मानसून से पहले तैयार हुई जल संरक्षण संरचनाएं
अभियान के अंतर्गत मानसून शुरू होने से पहले सभी प्रमुख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण पूरा कर लिया गया। इसका उद्देश्य इस वर्ष होने वाली बारिश के अधिकतम पानी का संचयन करना और उसे भूजल स्तर तक पहुंचाना है।
जिला प्रशासन के अनुसार, इससे भविष्य में पेयजल संकट को कम करने और जल स्रोतों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
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Mor Gaon Mor Pani: 6 इंजेक्शन वेल से होगा भूजल रिचार्ज
Mor Gaon Mor Pani अभियान के तहत चयनित गांवों में 6 इंजेक्शन वेल बनाए गए हैं। इनकी मदद से वर्षा जल को वैज्ञानिक पद्धति से सीधे भूजल स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
इन इंजेक्शन वेलों के माध्यम से लगभग 9,324 वर्गमीटर जलग्रहण क्षेत्र का वर्षा जल संरक्षित और पुनर्भारित होगा। इससे आसपास के 47 पेयजल स्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्राम घुघुवा, पतोरा, चुन्कत्ता, सेलूद, गोंडपेंड्री और फेकारी में स्थापित ये संरचनाएं भविष्य में लाखों लीटर वर्षा जल को भूजल में पहुंचाने का कार्य करेंगी।
घरेलू और सामुदायिक सोख्ता संरचनाओं पर भी विशेष जोर
जल संरक्षण के साथ-साथ घरेलू एवं सामुदायिक अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
ग्राम सेलूद और गोंडपेंड्री में लगभग 75 घरेलू सोख्ता संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इसके अलावा चयनित गांवों में 5 सामुदायिक सोख्ता गड्ढे हैंडपंपों के पास बनाए गए हैं।
इन संरचनाओं के माध्यम से व्यर्थ बहने वाले पानी को भूजल पुनर्भरण के लिए उपयोग किया जा रहा है। इससे जलभराव कम होगा, स्वच्छता बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
Mor Gaon Mor Pani अभियान को बनाया जा रहा जन-आंदोलन
अभियान के तहत प्रत्येक गांव में नियमित रूप से सामुदायिक बैठकें, ग्राम पंचायत बैठकें और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही “Reduce Water Wastage” अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को पानी के विवेकपूर्ण उपयोग, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
15 ग्राम पंचायतों में चल रहा अभियान
यह पहल पाटन विकासखंड की 7 और धमधा विकासखंड की 8 ग्राम पंचायतों सहित कुल 15 ग्राम पंचायतों में लागू की जा रही है।
जिला प्रशासन का लक्ष्य इन सभी गांवों को भविष्य में जल सुरक्षा के मॉडल के रूप में विकसित करना है, ताकि अन्य क्षेत्रों में भी इस मॉडल को अपनाया जा सके।
अगले चरण में होंगे और बड़े काम
जिला प्रशासन ने अभियान के अगले चरण की भी रूपरेखा तैयार कर ली है।
इसके तहत—
- लगभग 10 नई जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण।
- 150 घरेलू सोख्ता गड्ढों का निर्माण।
- 25 सामुदायिक सोख्ता गड्ढों का निर्माण।
- तालाबों और अन्य जल स्रोतों का संरक्षण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन।
इन योजनाओं के माध्यम से जिले में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
Mor Gaon Mor Pani अभियान दुर्ग जिले में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इंजेक्शन वेल, सोख्ता संरचनाओं और जनभागीदारी के माध्यम से जिला प्रशासन जल संकट से निपटने का स्थायी समाधान विकसित करने का प्रयास कर रहा है। यदि यह मॉडल सफल होता है तो Mor Gaon Mor Pani अभियान राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।
