Raipur Nakati Eviction एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बड़ा मुद्दा बन गया है। माना क्षेत्र के पास स्थित नकटी गांव में प्रशासन ने करीब 85 परिवारों को देर रात बेदखली नोटिस जारी कर दिए, जिसके बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।
बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर वर्षों से लोग रह रहे हैं, उसी स्थान पर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी (MLA Colony) विकसित की जानी है। प्रशासन इस जमीन को सरकारी भूमि बता रहा है, जबकि ग्रामीण अपने कब्जे और दस्तावेजों को वैध बता रहे हैं।
Raipur Nakati Eviction: देर रात प्रशासन की कार्रवाई
मोहम्मद मुहर्रम की सार्वजनिक छुट्टी के बावजूद शुक्रवार देर रात राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम नकटी गांव पहुंची। अधिकारियों ने बिना पूर्व सूचना के कई घरों की दीवारों पर बेदखली नोटिस चस्पा कर दिए।
रात के समय हुई इस कार्रवाई से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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ग्रामीणों ने जताया कड़ा विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि उनके परिवार कई दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं। उनके पास बिजली, पानी, राशन कार्ड सहित कई सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं।
इतना ही नहीं, कई परिवारों के मकान प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत बने हैं। ऐसे में उनका कहना है कि सरकार द्वारा बनाए गए घरों को अब अवैध बताना पूरी तरह अनुचित है।
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Raipur Nakati Eviction पर प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और मूल रूप से यह गांव की निस्तारी भूमि थी। समय के साथ इस पर लोगों ने कब्जा कर मकान बना लिए, जिन्हें प्रशासन अवैध अतिक्रमण मान रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में इसी भूमि पर विधायक कॉलोनी विकसित करने की योजना है। इसलिए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पहले भी हुआ था बेदखली का प्रयास
यह पहली बार नहीं है जब नकटी गांव में बेदखली की कार्रवाई हुई हो।
करीब एक वर्ष पहले भी जिला प्रशासन ने इसी जमीन को खाली कराने का प्रयास किया था। उस समय ग्रामीणों के भारी विरोध और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन को कार्रवाई रोकनी पड़ी थी।
अब दोबारा नोटिस जारी होने से गांव में तनाव का माहौल बन गया है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- वर्षों से रह रहे परिवारों को उजाड़ा न जाए।
- जिनके मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने हैं, उन्हें संरक्षण दिया जाए।
- वैकल्पिक पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था की जाए।
- बिना संवाद के बेदखली की कार्रवाई रोकी जाए।
आगे क्या हो सकता है?
स्थानीय लोगों के अनुसार आने वाले दिनों में गांव की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। यदि प्रशासन कार्रवाई जारी रखता है तो विरोध और तेज हो सकता है।
फिलहाल प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। स्थिति पर जिला प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।
Raipur Nakati Eviction मामला केवल बेदखली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुनर्वास, सरकारी योजनाओं और भूमि अधिकारों से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। एक ओर प्रशासन प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए सरकारी जमीन खाली कराने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर दशकों से बसे ग्रामीण अपने अधिकार और पुनर्वास की मांग पर अड़े हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।
