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Chhattisgarh Politicians Cases: 15 से ज्यादा सांसद-विधायकों पर 20 से अधिक आपराधिक मामले, हाईकोर्ट रिपोर्ट में खुलासा

Chhattisgarh Politicians Cases को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की मई 2026 की स्टेटस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 15 से अधिक सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 20 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई विभिन्न अदालतों में लंबित है। इन मामलों की नियमित निगरानी फास्ट ट्रैक कोर्ट और विशेष अदालतों के माध्यम से की जा रही है।

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Chhattisgarh Politicians Cases: किन नेताओं के नाम शामिल हैं?

हाईकोर्ट की रिपोर्ट के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक कवासी लखमा, विधायक देवेंद्र यादव तथा पूर्व सांसद मधुसूदन यादव सहित कई वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक मामलों की सुनवाई जारी है।

इन मामलों की सुनवाई राज्य के विभिन्न जिला न्यायालयों, विशेष अदालतों तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट में नियमित रूप से की जा रही है।


भूपेश बघेल के खिलाफ कौन-सा मामला लंबित है?

रायपुर स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (CBI) की अदालत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कैलाश मुरारका और विजय भाटिया के खिलाफ आपराधिक प्रकरण क्रमांक 5465/2018 विचाराधीन है।

इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B, 469, 471 तथा आईटी एक्ट की धारा 67-A के तहत आरोप लगाए गए हैं। इस मामले की सुनवाई के लिए जून 2026 में तिथि निर्धारित की गई थी।

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Chhattisgarh Politicians Cases में कवासी लखमा और देवेंद्र यादव के मामले

रायपुर की प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय में विधायक कवासी लखमा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष मामला लंबित है।

इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कवासी लखमा और विधायक देवेंद्र यादव के खिलाफ भी सुनवाई जारी है।

इन मामलों में अदालत समय-समय पर सुनवाई कर रही है और आगे की प्रक्रिया न्यायालय के समक्ष जारी है।


धोखाधड़ी और मारपीट के मामले भी लंबित

जांजगीर-चांपा जिले में बालेश्वर साहू, वेदप्रकाश साहू और गौतम राठौर के खिलाफ धोखाधड़ी तथा मारपीट से जुड़े मामलों की सुनवाई चल रही है।

वहीं कवर्धा जिले में अशोक कुमार साहू और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले में अदालत ने साक्ष्य प्रस्तुत करने की तिथि तय की थी।


पूर्व भाजपा विधायक और सांसद भी सूची में

गरियाबंद जिले की अदालत में भाजपा के पूर्व विधायक डमरूधर पुजारी और गोवर्धन मांझी के खिलाफ रास्ता रोकने और बलवा से जुड़े मामलों की सुनवाई जारी है।

इसी तरह राजनांदगांव की विशेष अदालत में पूर्व सांसद मधुसूदन यादव और मोहम्मद खालिद के खिलाफ निवेशकों से कथित धोखाधड़ी से जुड़े छह मामले विचाराधीन हैं।

इनमें से तीन मामलों की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने पहले ही अंतरिम रोक लगा रखी है, जबकि अन्य मामलों में आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।


अन्य जिलों में भी चल रही सुनवाई

बिलासपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट में विधायक अटल श्रीवास्तव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया चल रही है।

वहीं बलौदाबाजार जिले में विधायक देवेंद्र यादव के खिलाफ दंगा, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में मामला विचाराधीन है।

पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा और मारपीट से जुड़े मामले की सुनवाई भी अदालत में लंबित है।


हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग क्यों महत्वपूर्ण है?

हाईकोर्ट द्वारा जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की नियमित मॉनिटरिंग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर आपराधिक मामलों का समयबद्ध और निष्पक्ष निपटारा हो।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप देशभर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की निगरानी की जा रही है ताकि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।


Chhattisgarh Politicians Cases को लेकर जारी हाईकोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि राज्य के कई वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई जारी है। यह उल्लेखनीय है कि इन मामलों में अभी न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और अंतिम फैसला संबंधित अदालतों द्वारा सुनाया जाना बाकी है। किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक कानून की नजर में वह निर्दोष माना जाता है।

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