Ayodhya Ram Temple में श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई राशि के कथित गबन के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और विशेष अदालत ने उन्हें 29 जून 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ₹79.85 लाख बरामद किए गए हैं। मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
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Ayodhya Ram Temple दान विवाद क्या है?
एफआईआर के अनुसार, आरोपी मंदिर परिसर में लगे दानपात्रों से प्राप्त नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दान की राशि का कथित रूप से गबन किया गया।
यह मामला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर दर्ज की गई।
Ayodhya Ram Temple मामले में 8 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों में लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडेय सहित कुल आठ लोग शामिल हैं।
इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात, बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करने तथा आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाए गए हैं।
अभियोजन अधिकारी के.सी. वर्मा ने बताया कि सभी आरोपियों को 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। इसके बाद उन्हें भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
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Ayodhya Ram Temple मामले में पुलिस का दावा
पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार जांच के दौरान आरोपियों से ₹79.85 लाख बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बरामदगी और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि कुछ आरोपी मंदिर में दान की नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े थे। हालांकि, आरोपियों का दोष या निर्दोष होना अदालत में सुनवाई के बाद ही तय होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार की कार्रवाई SIT की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
उन्होंने कहा कि “मैंने पहले ही कहा था कि SIT रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। रिपोर्ट आ चुकी है और कार्रवाई शुरू कर दी गई है।”
मुख्यमंत्री ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शी कार्रवाई कर रही है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों ने एफआईआर में कुछ प्रमुख नामों को शामिल न किए जाने पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए।
हालांकि, पुलिस और सरकार का कहना है कि कार्रवाई SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। जांच आगे भी जारी रहेगी।
SIT जांच कैसे शुरू हुई?
दान राशि के कथित गबन का विवाद जून की शुरुआत में सामने आया था। इसके बाद 13 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया।
इस जांच दल की अध्यक्षता लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने की। प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को सरकार को सौंपी गई, जिसके आधार पर 25 जून की रात एफआईआर दर्ज हुई और 26 जून को गिरफ्तारियां की गईं।
Ayodhya Ram Temple से जुड़े इस दान राशि के कथित गबन मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत से पुलिस रिमांड प्राप्त किया है और ₹79.85 लाख बरामद होने का दावा किया है। वहीं विपक्ष ने जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत का फैसला महत्वपूर्ण रहेगा। जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, सभी आरोप न्यायालय में परीक्षण के अधीन हैं।
