Devendra Yadav ने भिलाई की पहचान, सेक्टर-9 अस्पताल, मैत्री बाग और भिलाई टाउनशिप की बसाहट को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। भिलाई नगर विधायक ने कहा कि भिलाई केवल एक शहर नहीं, बल्कि देश की विविध संस्कृति, श्रमिकों के संघर्ष और कई पीढ़ियों की यादों का प्रतीक है। इसकी पहचान और बसाहट को किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा।
मीडिया से चर्चा करते हुए Devendra Yadav ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) प्रबंधन ने पूर्व में हुए जनआंदोलन के दौरान स्पष्ट आश्वासन दिया था कि सेक्टर-9 अस्पताल को न तो बेचा जाएगा और न ही किसी निजी संस्था को लीज पर दिया जाएगा।
Devendra Yadav ने BSP प्रबंधन पर उठाए सवाल
विधायक Devendra Yadav ने कहा कि बीएसपी प्रबंधन ने यह भी आश्वासन दिया था कि मैत्री बाग और भिलाई टाउनशिप की मूल बसाहट को सुरक्षित रखा जाएगा। यदि भविष्य में कोई विशेष परिस्थिति बनती है तो इन परिसंपत्तियों को राज्य सरकार को सौंपने पर विचार किया जाएगा।
हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बीएसपी प्रबंधन इस दिशा में कोई स्पष्ट पहल नहीं कर रहा है। इससे स्थानीय नागरिकों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है।
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भिलाई टाउनशिप में नोटिस से बढ़ी चिंता
Devendra Yadav ने कहा कि लगातार संवाद और बैठक की मांग के बावजूद बीएसपी प्रबंधन चर्चा से बच रहा है। वहीं टाउनशिप क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को नोटिस जारी किए जाने की घटनाओं ने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
स्थानीय निवासियों के बीच यह आशंका बढ़ रही है कि कहीं वर्षों पुरानी बसाहट को समाप्त करने की तैयारी तो नहीं की जा रही। इस कारण कई परिवार अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
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Devendra Yadav बोले- भिलाई की पहचान मिटाने नहीं देंगे
विधायक Devendra Yadav ने कहा कि वे शुरू से ही भिलाई की बसाहट को बचाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं और आगे भी यह लड़ाई जारी रहेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि लीजधारकों की रजिस्ट्री प्रक्रिया रोक दिए जाने तथा लगातार नोटिस जारी किए जाने से लोगों में असुरक्षा का वातावरण बन गया है। साथ ही ऐसी चर्चाएं भी सामने आ रही हैं कि सेक्टर क्षेत्र के बड़े हिस्से को खाली कराकर निजी हाथों में सौंपने की योजना बनाई जा रही है।
भिलाई की विरासत और इतिहास का सवाल
Devendra Yadav ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की दूरदर्शी सोच के तहत भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना की गई थी। यह शहर राष्ट्रीय एकता, औद्योगिक विकास और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि भिलाई में देश के विभिन्न राज्यों से आए लोगों ने वर्षों से मिल-जुलकर जीवन बिताया है। ऐसे शहर की मूल पहचान और बसाहट को समाप्त करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
Devendra Yadav ने गांधीवादी आंदोलन की घोषणा की
Devendra Yadav ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल की नहीं बल्कि पूरे भिलाई की है। यह मुद्दा हर नागरिक, कर्मचारी, श्रमिक और परिवार के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने घोषणा की कि जनसंघर्ष की शुरुआत मीडिया के माध्यम से की जा चुकी है। आने वाले दिनों में वे उन परिवारों से मिलेंगे जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं और जनसमर्थन जुटाएंगे।
विधायक ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह गांधीवादी और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा।
Devendra Yadav का भावुक संदेश
अपने संबोधन में Devendra Yadav ने कहा, “भिलाई की बसाहट हमारी पहचान है। इसे बचाने के लिए यदि मुझे अपना सर्वस्व अर्पित करना पड़े तो भी मैं पीछे नहीं हटूंगा। भिलाईवासियों के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करता रहूंगा।”
इस बयान के बाद भिलाई की बसाहट और टाउनशिप को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है।
Devendra Yadav ने सेक्टर-9 अस्पताल, मैत्री बाग और भिलाई टाउनशिप की बसाहट को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है कि भिलाई की पहचान और विरासत को किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बीएसपी प्रबंधन से स्पष्ट जवाब मांगा है और जरूरत पड़ने पर व्यापक जनआंदोलन की चेतावनी भी दी है। आने वाले दिनों में Devendra Yadav की यह मुहिम भिलाई की राजनीति और सामाजिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
