Mission Drishti के तहत छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एक प्रेरणादायक पहल ने 42 मोतियाबिंद मरीजों के जीवन में नई रोशनी भर दी है। कभी नक्सल प्रभावित और विकास की मुख्यधारा से दूर रहे जगरगुंडा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने मिलकर यह महत्वपूर्ण अभियान चलाया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने दुर्गम गांवों तक पहुंचकर मरीजों की पहचान की और उनका निःशुल्क इलाज सुनिश्चित किया।
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Mission Drishti के तहत घर-घर पहुंची स्वास्थ्य टीम
Mission Drishti अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जगरगुंडा तहसील के दूरस्थ और अंदरूनी गांवों में विशेष सर्वे अभियान चलाया।
कठिन रास्तों और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों की पहचान की। इसके बाद मरीजों को विशेष वाहनों के माध्यम से जिला चिकित्सालय तक पहुंचाया गया।
यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है।
Mission Drishti के तहत 42 मरीजों का सफल ऑपरेशन
जिला चिकित्सालय में सिविल सर्जन डॉ. एम.आर. कश्यप और नेत्र सर्जन डॉ. खुशबू देवांगन की देखरेख में 42 मरीजों की सफल सर्जरी की गई।
ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क किया गया और मरीजों को उपचार के दौरान सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
प्रशासन का उद्देश्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि मरीजों को सम्मान और विश्वास के साथ बेहतर जीवन की ओर लौटाना भी था।
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माड़वी मुये की कहानी बनी अभियान की पहचान
Mission Drishti की सबसे भावुक और प्रेरणादायक कहानी गेड़ापार गांव के निवासी माड़वी मुये की रही।
पिछले तीन महीनों से आंखों की रोशनी धुंधली होने के कारण वे सामान्य जीवन जीने में कठिनाई महसूस कर रहे थे। दोनों आंखों में मोतियाबिंद की समस्या के चलते उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो चुका था।
जिला अस्पताल में सफल ऑपरेशन के बाद उनकी आंखों की रोशनी वापस लौट आई। अस्पताल से छुट्टी के समय उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें नया जीवन मिला है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलती तस्वीर
सुकमा लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है। लेकिन अब यहां स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास से जुड़ी योजनाओं का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है। अब मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ रहा है।
Mission Drishti जैसे अभियान इस बदलाव को और अधिक मजबूत बना रहे हैं।
मरीजों को मिला विशेष सहयोग
ऑपरेशन के बाद मरीजों को फल और अन्य आवश्यक सामग्री भी वितरित की गई।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सभी मरीजों को सुरक्षित उनके गांवों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति विश्वास और संतोष का माहौल देखने को मिला।
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के परिजनों को भी ऑपरेशन के बाद आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी।
Mission Drishti अब बन रहा जन-जागरूकता अभियान
जिला प्रशासन ने डिस्चार्ज हुए मरीजों और उनके परिवारों से अपील की है कि वे अपने आसपास रहने वाले जरूरतमंद लोगों को भी उपचार के लिए प्रेरित करें।
इस पहल का उद्देश्य ऐसे लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है जो जानकारी या संसाधनों की कमी के कारण इलाज नहीं करा पाते।
धीरे-धीरे Mission Drishti केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि जन-जागरूकता आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ा भरोसा
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाएं अब सीधे उनके गांवों तक पहुंच रही हैं।
पहले जहां इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब प्रशासन स्वयं गांवों तक पहुंचकर मरीजों की मदद कर रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है।
Mission Drishti ने सुकमा के दूरस्थ गांवों में रहने वाले 42 मोतियाबिंद मरीजों के जीवन में नई उम्मीद और नई रोशनी लाई है। यह अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुशासन, संवेदनशीलता और सेवा भावना का उदाहरण है। Mission Drishti के माध्यम से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।
