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Trump’s war with Iran पर अमेरिकी सीनेट का बड़ा फैसला

Trump’s war with Iran को लेकर अमेरिका की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रिपब्लिकन बहुमत वाली अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने या आगे बढ़ाने से पहले कांग्रेस की मंजूरी लेने का निर्देश देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

मंगलवार को हुए मतदान में यह प्रस्ताव 50-48 मतों से पारित हुआ। कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिससे ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।

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Trump’s war with Iran पर सीनेट वोटिंग में क्या हुआ?

अमेरिकी सीनेट में पारित यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा माना जा रहा है।

इस प्रस्ताव का उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप को यह संदेश देना है कि कांग्रेस के कई सदस्य Trump’s war with Iran को लेकर चिंतित हैं और युद्ध को जल्द समाप्त होते देखना चाहते हैं।

मतदान में रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, Lisa Murkowski, Susan Collins और Bill Cassidy ने डेमोक्रेट्स का समर्थन किया।


Trump’s war with Iran पर रिपब्लिकन पार्टी में बढ़ती दरार

यह वोटिंग ट्रंप की अपनी पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को भी उजागर करती है।

नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले कई रिपब्लिकन सांसद राष्ट्रपति की विदेश नीति और युद्ध रणनीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हाल के महीनों में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रंप के अन्य प्रस्तावों का भी विरोध किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Trump’s war with Iran ने अमेरिकी जनता के बीच लोकप्रियता नहीं हासिल की है। युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि और आर्थिक दबाव ने जनता की नाराजगी बढ़ाई है।

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कांग्रेस की मंजूरी का क्या है नियम?

अमेरिका में 1973 के War Powers Resolution के तहत राष्ट्रपति किसी सैन्य कार्रवाई को सीमित समय तक ही बिना कांग्रेस की मंजूरी के जारी रख सकते हैं।

संघीय कानून के अनुसार 60 दिनों से अधिक किसी युद्ध या सैन्य अभियान को जारी रखने के लिए कांग्रेस की अनुमति आवश्यक होती है।

हालांकि ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि अप्रैल में लागू युद्धविराम ने समय सीमा को रीसेट कर दिया है। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर 30 दिनों का अतिरिक्त विस्तार भी संभव है।


Trump’s war with Iran और युद्धविराम की वर्तमान स्थिति

व्हाइट हाउस का कहना है कि 7 अप्रैल को हुए युद्धविराम के बाद अब सक्रिय सैन्य संघर्ष नहीं चल रहा है। इसी कारण प्रशासन का दावा है कि अमेरिकी सेना को वापस बुलाने का सवाल फिलहाल नहीं उठता।

वहीं अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर हुए हैं।

इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने संबंधी व्यापक समझौते पर बातचीत करनी होगी।


क्या यह प्रस्ताव ट्रंप को रोक सकता है?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह प्रस्ताव सीधे तौर पर ट्रंप को युद्ध रोकने के लिए बाध्य नहीं करता।

मध्य-पूर्व विशेषज्ञ लौरा ब्लूमेनफेल्ड ने इसे “हथकड़ी नहीं बल्कि कलाई पर हल्का थप्पड़” बताया है। उनका कहना है कि इसका कानूनी प्रभाव सीमित है, लेकिन यह अमेरिकी जनता और कांग्रेस की भावना को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

फिर भी Trump’s war with Iran को लेकर यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस पर अतिरिक्त दबाव बनाने का काम करेगा।


आगे क्या होगा?

फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों युद्धविराम बनाए रखने पर सहमत हैं। आने वाले हफ्तों में परमाणु समझौते पर होने वाली बातचीत बेहद महत्वपूर्ण होगी।

यदि वार्ता सफल रहती है तो Trump’s war with Iran का अंत संभव हो सकता है। लेकिन बातचीत विफल होने की स्थिति में क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ सकता है।


Trump’s war with Iran को लेकर अमेरिकी सीनेट का यह फैसला कानूनी रूप से भले ही बाध्यकारी न हो, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश बेहद स्पष्ट है। कांग्रेस के दोनों सदनों द्वारा पारित यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन पर युद्ध समाप्त करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने का दबाव बढ़ा रहा है। आने वाले 60 दिन अमेरिका-ईरान संबंधों और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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