Chhattisgarh secret ganja corridor देश की सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में हुई बड़ी गांजा बरामदगियों ने यह संकेत दिया है कि राज्य ओडिशा के गांजा उत्पादन क्षेत्रों और उत्तर एवं पश्चिम भारत के बाजारों के बीच एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर बन चुका है।
तस्कर लगातार अपने तौर-तरीकों में बदलाव कर रहे हैं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को चुनौती दे रहे हैं। हालिया मामलों में करोड़ों रुपये के गांजा नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने पूरे तंत्र की जटिलता को उजागर कर दिया है।
Chhattisgarh secret ganja corridor क्यों बना तस्करों का पसंदीदा रूट?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति इसे तस्करों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बस्तर और बलरामपुर जैसे जिले उन मार्गों पर स्थित हैं जिनका उपयोग ओडिशा से गांजा लाकर उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।
इसी वजह से Chhattisgarh secret ganja corridor की चर्चा लगातार बढ़ रही है और राज्य राष्ट्रीय स्तर पर नारकोटिक्स नेटवर्क की जांच का केंद्र बन गया है।
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4.5 करोड़ रुपये के अंतरराज्यीय गांजा रैकेट का खुलासा
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा के अनुसार, महासमुंद पुलिस ने लगभग 4.5 करोड़ रुपये के गांजा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश के शामली से विनय शर्मा नामक कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप है कि वह शराब कारोबार की आड़ में अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क संचालित कर रहा था।
912 किलोग्राम गांजा से जुड़े इस मामले में तस्करों ने ट्रक में केले के नीचे गांजा छिपाया था और पहचान से बचने के लिए फर्जी नंबर प्लेटों का इस्तेमाल किया था।
Chhattisgarh secret ganja corridor में बदलते तस्करी के तरीके
जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तस्कर पुराने तरीकों पर निर्भर नहीं हैं।
वे खाद्य सामग्री के बीच गांजा छिपा रहे हैं, फर्जी वाहन नंबरों का इस्तेमाल कर रहे हैं और सुरक्षित ठिकानों पर स्टॉक जमा करके छोटी-छोटी खेपों में माल भेज रहे हैं।
बस्तर के केशरपाल गांव में एक घर से नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपाकर रखा गया 33 किलोग्राम से अधिक गांजा बरामद किया गया। यह दिखाता है कि तस्कर अब स्थानीय स्तर पर भंडारण की रणनीति भी अपना रहे हैं।
ओडिशा से यूपी और गुजरात तक फैला नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि अधिकांश गांजा ओडिशा के कंधमाल जिले और आसपास के क्षेत्रों से आता है।
हाल ही में रायगढ़ पुलिस ने 52 किलोग्राम गांजा मामले में ओडिशा की एक महिला सप्लायर सुभद्रा उर्फ मामी मलिक को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि वह संबलपुर रेलवे स्टेशन के पास गांजा उपलब्ध कराती थी, जिसे बाद में मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की ओर भेजा जाता था।
पुलिस का मानना है कि गुजरात जाने वाली खेपों की लगातार बरामदगी यह साबित करती है कि Chhattisgarh secret ganja corridor एक बड़े राष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है।
धमतरी और महासमुंद में लगातार बड़ी कार्रवाई
धमतरी जिले में केवल छह सप्ताह के भीतर सात बड़ी कार्रवाई की गई हैं।
इनमें शामिल हैं:
- 490.818 किलोग्राम गांजा (मूल्य लगभग 2.45 करोड़ रुपये)
- 131 किलोग्राम गांजा (मूल्य लगभग 65 लाख रुपये)
- 127 किलोग्राम गांजा से जुड़ा मामला
- 44 किलोग्राम गांजा की अलग खेप, जो कथित तौर पर गुजरात भेजी जा रही थी
वहीं महासमुंद में इस वर्ष दर्ज 110 एनडीपीएस मामलों में से 65 मामलों में पुलिस ने स्रोत से गंतव्य तक पूरे नेटवर्क की पहचान करने का दावा किया है।
महिलाओं की बढ़ती भूमिका से एजेंसियां सतर्क
जांचकर्ताओं का कहना है कि हाल के मामलों में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ती दिखाई दे रही है।
एजेंसियों के अनुसार महिला कुरियरों का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि यात्रा और नियमित जांच के दौरान उन पर अपेक्षाकृत कम संदेह किया जाता है।
यही कारण है कि अब पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियां महिला तस्करों की भूमिका पर भी विशेष नजर रख रही हैं।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि केवल गांजा बरामद करना पर्याप्त नहीं है।
मुख्य लक्ष्य उन वित्तपोषकों, संगठकों और नेटवर्क संचालकों तक पहुंचना है जो पूरे कारोबार को नियंत्रित करते हैं। तकनीकी निगरानी, व्हाट्सएप चैट विश्लेषण और कॉल डाटा रिकॉर्ड की मदद से अब पुलिस पूरे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रही है।
हालांकि तस्करों की बदलती रणनीतियां और अंतरराज्यीय नेटवर्क कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं।
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Chhattisgarh secret ganja corridor का लगातार सामने आना यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ अब केवल एक राज्य नहीं बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण नारकोटिक्स ट्रांजिट मार्गों में से एक बनता जा रहा है। ओडिशा से लेकर उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र तक फैले नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। हालिया गिरफ्तारियां और बड़ी बरामदगियां एजेंसियों की सफलता जरूर हैं, लेकिन तस्करों के बदलते तौर-तरीके इस लड़ाई को और चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। आने वाले समय में Chhattisgarh secret ganja corridor पर सख्त निगरानी और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता और बढ़ेगी।
