World Environment Day 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ के वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के कारण देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल है।
राज्य सरकार हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार कई योजनाओं का संचालन कर रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करना है।
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एक पेड़ मां के नाम अभियान बना जनआंदोलन
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में चलाया जा रहा “एक पेड़ मां के नाम” अभियान अब जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है।
वन मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में राज्यभर में करोड़ों पौधों का रोपण किया गया है। आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को व्यापक सफलता दिलाई है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जनजागरूकता इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
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World Environment Day 2026 और छत्तीसगढ़ की वन संपदा
World Environment Day 2026 के अवसर पर वन मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। यह राज्य की सबसे बड़ी प्राकृतिक पूंजी है।
वन विभाग द्वारा वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक पुनर्जनन और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से राज्य के हरित क्षेत्र को और मजबूत बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वन संरक्षण और वृक्षारोपण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है।
उदंती-सीतानदी में दूधराज का घोंसला बना आकर्षण
World Environment Day 2026 पर जैव विविधता का सकारात्मक संकेत
हाल ही में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज (Asian Paradise Flycatcher) द्वारा घोंसला बनाने का दुर्लभ दृश्य दर्ज किया गया है।
यह घटना राज्य की समृद्ध जैव विविधता और सुरक्षित पर्यावरणीय परिस्थितियों का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जा रही है। वन विभाग के अनुसार यह संकेत देता है कि संरक्षित वन क्षेत्रों में पक्षियों और वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण विकसित हो रहा है।
दूधराज का घोंसला पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है।
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जल संरक्षण और वन्यजीवों को मिला लाभ
हजारों संरचनाओं से बढ़ा जल स्तर
वन मंत्री ने बताया कि राज्य के वन क्षेत्रों में हजारों जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है।
इन संरचनाओं की वजह से वन्यजीवों को पूरे वर्ष पानी उपलब्ध हो रहा है। साथ ही भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
जल संरक्षण के इन प्रयासों का लाभ स्थानीय समुदायों और वन्यजीवों दोनों को मिल रहा है। इससे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिल रही है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ बढ़ रही आजीविका
वनाश्रित परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए राज्य सरकार लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है।
इससे जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय में भी वृद्धि हो रही है।
सरकार का लक्ष्य पर्यावरण और रोजगार के बीच संतुलन स्थापित करना है ताकि सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।
नागरिकों से पौधारोपण की अपील
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी लें।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है।
World Environment Day 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ ने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को फिर साबित किया है। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की सफलता, 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र और उदंती-सीतानदी में दूधराज के घोंसले की दुर्लभ मौजूदगी राज्य की पर्यावरणीय उपलब्धियों को दर्शाती है। World Environment Day 2026 हमें प्रकृति संरक्षण और हरित भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों की प्रेरणा देता है।
