छत्तीसगढ़ में ईंधन संकट से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

Chhattisgarh Health Services Hit By Fuel Shortage के बीच प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। डीजल और पेट्रोल की बढ़ती मांग तथा सप्लाई संकट के कारण एंबुलेंस और मेडिकल वाहनों के संचालन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

स्थिति को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

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Chhattisgarh Health Services Hit By Fuel Shortage पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि 108 संजीवनी एक्सप्रेस, 102 महतारी एक्सप्रेस, 1099 मुक्तांजलि वाहन और पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट अत्यावश्यक सेवाओं की श्रेणी में आते हैं।

इन सेवाओं में ईंधन की कमी होने पर सड़क दुर्घटना, गंभीर बीमारी और प्रसूता महिलाओं को समय पर मदद नहीं मिल पाएगी।

कलेक्टरों को दिए गए सख्त निर्देश

स्वास्थ्य संचालनालय की ओर से जारी पत्र में सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने जिले के पेट्रोल पंप संचालकों और ऑयल कंपनियों को तत्काल आदेश जारी करें।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एंबुलेंस और मेडिकल वाहनों को रीफ्यूलिंग के दौरान प्राथमिकता मिले।

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108 और 102 सेवाएं मरीजों के लिए लाइफलाइन

108 संजीवनी एक्सप्रेस सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान तुरंत सहायता पहुंचाने का काम करती है।

वहीं 102 महतारी एक्सप्रेस गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण सेवा मानी जाती है।

दूरस्थ क्षेत्रों में भी जरूरी हैं मेडिकल यूनिट

पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट दूरदराज और विशेष क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाती है।

इसके अलावा 1099 मुक्तांजलि वाहन अंतिम संस्कार सेवाओं के लिए उपयोग किए जाते हैं। ऐसे में ईंधन संकट का असर सीधे आम जनता पर पड़ सकता है।


बिलासपुर समेत कई जिलों में बढ़ी चिंता

पिछले कुछ दिनों में बिलासपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं।

कई पंपों पर डीजल खत्म होने जैसी स्थिति बनने से लोगों में पैनिक बाइंग भी बढ़ गई।

एंबुलेंस सेवाओं को लेकर बढ़ी चिंता

ईंधन संकट के कारण आम लोगों के साथ एंबुलेंस सेवाओं को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

इसी पृष्ठभूमि में स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल वाहनों को प्राथमिकता देने का फैसला लिया है।

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Chhattisgarh Health Services Hit By Fuel Shortage से ट्रांसपोर्ट प्रभावित

डीजल शॉर्टेज का असर अब लोकल ट्रांसपोर्ट पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

ट्रक, बस और मेटाडोर संचालकों को डीजल के लिए कई पेट्रोल पंपों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

ट्रांसपोर्टरों ने जताई नाराजगी

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी बुधवार को कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखने वाले हैं।

एसोसिएशन के अनुसार रायपुर-बिलासपुर मार्ग के करीब 80 फीसदी पेट्रोल पंपों पर डीजल उपलब्ध नहीं था।

जहां डीजल उपलब्ध था, वहां भारी वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।

सीमित मात्रा में दिया जा रहा डीजल

कई पेट्रोल पंपों पर कारों में केवल 10 लीटर और ट्रकों में अधिकतम 20 लीटर तक डीजल दिया गया।

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि भारी वाहनों का माइलेज कम होने के कारण इतनी कम मात्रा में डीजल से काम चलाना मुश्किल हो गया है।


वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव Syed Rashid Ali ने अरोरा पेट्रोल पंप पर डीजल वितरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उनका दावा है कि कर्मचारियों ने पहले डीजल देने से मना किया, लेकिन बाद में कुछ ट्रकों में चोरी-छिपे डीजल भरना शुरू कर दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया और एसोसिएशन ग्रुप में वायरल किया गया।

इसके बाद डीजल वितरण में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।


Chhattisgarh Health Services Hit By Fuel Shortage का बड़ा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन संकट लंबा खिंचता है तो इसका सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ेगा।

ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में एंबुलेंस सेवाएं बाधित होने से गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाएगा।

सरकार और प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि आवश्यक सेवाओं के लिए अलग ईंधन आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


Chhattisgarh Health Services Hit By Fuel Shortage ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था दोनों को चिंता में डाल दिया है।

108 संजीवनी एक्सप्रेस, 102 महतारी एक्सप्रेस और मेडिकल यूनिट जैसी सेवाएं लाखों लोगों के लिए लाइफलाइन हैं। ऐसे में इन वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी हो गया है।

यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर आम जनता, मरीजों और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

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