छत्तीसगढ़ में गोधाम योजना की स्थिति

Chhattisgarh news में इस समय राज्य सरकार की गोधाम योजना चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। प्रदेशभर में बेसहारा मवेशियों की बढ़ती समस्या को देखते हुए सरकार ने 1,460 गोधाम स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन जमीन आवंटन की धीमी प्रक्रिया के कारण योजना अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।

सरकार का उद्देश्य सड़कों पर घूम रहे मवेशियों को सुरक्षित स्थान देना और सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है। हालांकि कई जिलों में अब तक पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है।

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Chhattisgarh News: 1460 गोधाम खोलने का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रत्येक विकासखंड में 10-10 गोधाम खोलने की योजना बनाई है। इसी योजना के तहत पूरे प्रदेश में 1,460 गोधाम स्थापित किए जाने हैं।

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने 14 मार्च को बिलासपुर से 29 गोधामों का औपचारिक शुभारंभ भी किया था। इसके बाद उम्मीद जताई गई थी कि योजना तेजी से आगे बढ़ेगी।

लेकिन रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ समेत कई जिलों में पर्याप्त जमीन नहीं मिलने से काम धीमा पड़ गया है।

कई जिलों में जमीन की भारी कमी

राजधानी रायपुर सहित कई बड़े जिलों में सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थानीय प्रशासन को गोधाम निर्माण में परेशानी हो रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी चारा विकास और पशुओं के रखरखाव के लिए पर्याप्त जमीन तलाशना चुनौती बन गया है।

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Chhattisgarh News: सड़क पर मवेशियों से बढ़ी चिंता

प्रदेश में सड़कों पर घूमते बेसहारा मवेशी यातायात व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। कई सड़क दुर्घटनाओं में मवेशियों की मौजूदगी बड़ी वजह बन रही है।

इस मामले को लेकर Chhattisgarh High Court ने भी राज्य सरकार से सख्त सवाल पूछे हैं। अदालत ने पूछा कि यदि व्यवस्था सही है, तो पशु अब भी सड़कों पर क्यों दिखाई दे रहे हैं।

हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ा दबाव

हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद प्रशासन पर गोधाम योजना को तेजी से लागू करने का दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों को जल्द जमीन चिन्हित कर निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

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गोधाम के लिए चाहिए इतनी जमीन

सरकार के अनुसार गोधामों में चारा विकास को बढ़ावा देने के लिए न्यूनतम एक एकड़ जमीन जरूरी होगी।

राज्य सरकार द्वारा प्रति एकड़ 47 हजार रुपये प्रतिवर्ष की सहायता देने का प्रावधान किया गया है। वहीं अधिकतम पांच एकड़ भूमि तक 2.35 लाख रुपये वार्षिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रत्येक गोधाम में 200 गोवंश रखने की व्यवस्था

सरकार ने तय किया है कि प्रत्येक गोधाम में लगभग 200 गोवंश रखने की क्षमता होगी।

इससे बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा और किसानों की फसलों को नुकसान से भी बचाया जा सकेगा।


वेशियों के संरक्षण और संचालन के लिए मानदेय तय

राज्य सरकार ने गोधाम संचालन में काम करने वाले कर्मचारियों और पशुसेवकों के लिए मानदेय भी निर्धारित कर दिया है।

गोधाम कर्मचारियों को 10,916 रुपये प्रतिमाह और पशुसेवकों को 13,126 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।

पशुओं के रखरखाव के लिए अलग बजट

सरकार ने मवेशियों के चारे और रखरखाव के लिए अलग राशि तय की है।

  • पहले वर्ष 10 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन
  • दूसरे वर्ष 20 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन
  • तीसरे वर्ष 30 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन
  • चौथे वर्ष 35 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन

इसके अलावा चारा विकास कार्यक्रम के लिए एक एकड़ पर 47 हजार रुपये और पांच एकड़ पर 2.85 लाख रुपये तक का प्रावधान रखा गया है।


Chhattisgarh News में गोधाम योजना का भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गोधाम योजना सही तरीके से लागू होती है तो इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और बेसहारा मवेशियों की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो सकेगी।

हालांकि इसके लिए जमीन आवंटन प्रक्रिया को तेज करना और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

प्रदेश सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर जमीन उपलब्ध कराना है। जब तक पर्याप्त भूमि नहीं मिलेगी, तब तक गोधाम योजना पूरी गति नहीं पकड़ पाएगी।


Chhattisgarh news में गोधाम योजना को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी सामने आई है, लेकिन जमीन की कमी इसकी सबसे बड़ी बाधा बन रही है। 1,460 गोधाम स्थापित करने का लक्ष्य प्रदेश में बेसहारा मवेशियों की समस्या को कम कर सकता है, लेकिन इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तेजी से काम करने की जरूरत है।

यदि योजना समय पर पूरी होती है, तो इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में पशु संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

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