Chhattisgarh में चीनी मिलों का संकट गहराया

Chhattisgarh में सहकारी चीनी मिलों की हालत बेहद गंभीर हो चुकी है। राज्य की चारों सरकारी मिलें कुल 267 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही हैं, जबकि किसानों का 83.39 करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक बकाया है।

इस स्थिति ने न सिर्फ किसानों की आर्थिक हालत को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे Chhattisgarh में चीनी उत्पादन और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ा है।

किसानों का 10 दिन का अल्टीमेटम

राज्य के किसान संगठनों ने Chhattisgarh सरकार और मिल प्रबंधन को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है।

अगर इस अवधि में भुगतान नहीं किया गया, तो किसान चारों चीनी मिलों में ताला जड़ने की चेतावनी दे चुके हैं।

कई किसानों ने तो पहले ही गन्ना आपूर्ति रोक दी है, जिससे संकट और गहरा गया है।

यह भी पढ़ें: परशुराम महोत्सव का आयोजन: प्रत्येक ब्राह्मण भगवान परशुराम द्वारा प्रदत्त ज्ञान व शक्तियों का प्रयोग कर सनातनी

📢 छत्तीसगढ़ और देश की हर बड़ी राजनीतिक खबर सबसे पहले पाएं — अभी जुड़ें: 👉 https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


Chhattisgarh में बकाया भुगतान का पूरा आंकड़ा

Chhattisgarh की चीनी मिलों में बकाया राशि चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है।

  • कुल बकाया: 83.39 करोड़ रुपये
  • कुल घाटा: 267 करोड़ रुपये

यह आंकड़े बताते हैं कि स्थिति सिर्फ अस्थायी नहीं, बल्कि संरचनात्मक संकट बन चुकी है।


मिल-वार स्थिति और बढ़ता आर्थिक बोझ

भोरमदेव शुगर मिल

  • खरीदी: 25.58 लाख मीट्रिक टन
  • कुल मूल्य: 84.18 करोड़ रुपये
  • भुगतान: 57.49 करोड़ रुपये
  • बकाया: 26.69 करोड़ रुपये

पंडरिया शुगर फैक्ट्री

  • खरीदी: 1.21 लाख मीट्रिक टन
  • कुल मूल्य: 40.05 करोड़ रुपये
  • भुगतान: 13.73 करोड़ रुपये
  • बकाया: 26.32 करोड़ रुपये

यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि Chhattisgarh की मिलें किसानों को समय पर भुगतान करने में पूरी तरह असफल रही हैं।

उत्पादन में भारी गिरावट

Chhattisgarh में चीनी उत्पादन तेजी से गिर रहा है।

  • लक्ष्य (2025-26): 12.64 लाख मीट्रिक टन
  • वास्तविक उत्पादन: 56,707 मीट्रिक टन

साल-दर-साल गिरावट

भोरमदेव मिल

  • 2022: 38,552 टन
  • 2023: 43,393 टन
  • 2024: 25,901 टन

सरदार पटेल मिल

  • 2022: 33,690 टन
  • 2023: 43,393 टन
  • 2024: 16,451 टन

मां महामाया मिल

  • 2022: 23,807 टन
  • 2023: 26,030 टन
  • 2024: 18,398 टन

दंतेश्वरी मिल

  • 2022: 6,334 टन
  • 2023: 7,513 टन
  • 2024: 6,668 टन

यह गिरावट दिखाती है कि Chhattisgarh की चीनी इंडस्ट्री लगातार कमजोर होती जा रही है।


Chhattisgarh में राशन वितरण पर असर

उत्पादन घटने का सीधा असर Chhattisgarh के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर पड़ा है।

  • 50–60% राशन कार्ड धारकों को चीनी नहीं मिल पा रही
  • उचित मूल्य दुकानों में स्टॉक की भारी कमी

इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

क्या है केंद्र सरकार का नियम?

केंद्र सरकार के नियम के अनुसार:

  • गन्ना खरीद के 15 दिन के भीतर भुगतान अनिवार्य है

लेकिन Chhattisgarh की मिलों में कई महीनों से भुगतान लंबित है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।


आगे क्या होगा?

अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो:

  • मिलों में तालाबंदी हो सकती है
  • किसान आंदोलन तेज होगा
  • उत्पादन पूरी तरह ठप हो सकता है
  • PDS व्यवस्था और बिगड़ सकती है

Chhattisgarh के लिए यह स्थिति आर्थिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से गंभीर संकेत दे रही है।


Chhattisgarh में चीनी मिलों का संकट अब चरम पर पहुंच चुका है। किसानों का बकाया भुगतान, उत्पादन में गिरावट और सार्वजनिक वितरण पर असर — ये सभी संकेत बताते हैं कि यदि तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य की पूरी सहकारी चीनी व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है।

सरकार और प्रशासन के लिए यह समय है कि वे Chhattisgarh के किसानों और उपभोक्ताओं के हित में त्वरित और प्रभावी निर्णय लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *