Durg News — Durg जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। वन विभाग और पुलिस प्रशासन दुर्ग की संयुक्त टीम ने वन्यजीव अपराध के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करते हुए ग्राम दनिया (बोरी), धमधा में दो संरक्षित लंगूरों के अवैध शिकार के मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
यह कार्यवाही वन्यजीव संरक्षण की दिशा में दुर्ग प्रशासन के सख्त रवैये को दर्शाती है और अन्य शिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।
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कब और कहाँ हुई घटना?
यह पूरा मामला 7 अप्रैल 2026 का है। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम को गुप्त सूचना मिली कि ग्राम दनिया (बोरी), धमधा में एक व्यक्ति ने एयर गन से लंगूरों का शिकार किया है।
सूचना मिलते ही टीम ने तत्काल दबिश दी और घटनास्थल पर जाकर मामले की जांच की। इसके बाद मुख्य अभियुक्त की पहचान कर उसे गिरफ्तार करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
Durg News: क्या है पूरा मामला?
Durg News में यह सामने आया है कि मुख्य अभियुक्त अजय पटेल, पिता लुमन पटेल ने एयर गन का उपयोग करते हुए दो लंगूरों (सेम्नोपिथेकस एंटेलस) का अवैध शिकार किया।
लंगूर भारत में वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 02 के अंतर्गत संरक्षित वन्यजीव की श्रेणी में आता है। इसका शिकार करना एक गंभीर आपराधिक कृत्य है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
एयर गन जैसे अर्ध-स्वचालित हथियार से संरक्षित जीव का शिकार करना अभियुक्त की पूर्व-नियोजित मंशा को उजागर करता है।
लंगूर क्यों है संरक्षित वन्यजीव?
लंगूर (Semnopithecus entellus) भारत में पाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण वानर प्रजाति है। यह पारिस्थितिकी तंत्र में बीजों के प्रसार और वनों की जैव-विविधता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
भारत सरकार ने वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 02, अनुक्रमांक 24 के तहत लंगूर को संरक्षित वन्यजीव घोषित किया हुआ है। इसका शिकार, व्यापार या किसी भी रूप में दोहन पूर्णतः प्रतिबंधित है।
इस जीव के संरक्षण के बिना वनों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?
वन विभाग दुर्ग ने इस मामले में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 6983/17 पंजीबद्ध किया है। यह मामला निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत दर्ज किया गया है:
- धारा 09 – वन्य प्राणी के शिकार का प्रतिषेध
- धारा 39 – वन्य प्राणियों को सरकारी संपत्ति घोषित करना
- धारा 51 – उल्लंघन पर दंड का प्रावधान
ये तीनों धाराएं वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत आती हैं और दोषी पाए जाने पर अभियुक्त को कठोर सजा हो सकती है।
Durg News: अभियुक्त को कब तक की मिली न्यायिक रिमांड?
Durg News के इस मामले में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियुक्त अजय पटेल को माननीय न्यायालय में पेश किया।
न्यायालय ने अभियुक्त को 21 अप्रैल 2026 तक की न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल करने का आदेश दिया है। फिलहाल अभियुक्त न्यायिक हिरासत में है और मामले की आगे की जांच जारी है।
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वन विभाग की चेतावनी
वन विभाग के अधिकारियों ने इस गिरफ्तारी के बाद स्पष्ट रूप से कहा है कि वन्य जीवों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्यवाही जारी रहेगी। वन्यजीव अपराध की सूचना देने वाले नागरिकों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
निष्कर्ष
Durg News का यह मामला यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ में वन विभाग और पुलिस प्रशासन वन्यजीव अपराध के खिलाफ पूरी सख्ती से काम कर रहे हैं। अजय पटेल की गिरफ्तारी और उसे 21 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा जाना यह संदेश देता है कि कानून से कोई नहीं बच सकता।
लंगूर जैसे संरक्षित वन्यजीवों की सुरक्षा न केवल कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि यह हमारी प्राकृतिक विरासत और पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए भी अत्यंत जरूरी है। दुर्ग प्रशासन की यह कार्यवाही पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल है।

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