Chhattisgarh News: हाथी-इंसान संघर्ष की दर्दनाक कहानी – 135 मौतें, 33 हाथी करंट से मरे, फिर भी हाथी मित्र दल डटा है

Chhattisgarh News – छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ वन प्रभाग में हाथी और इंसान के बीच का संघर्ष एक गंभीर और दर्दनाक वास्तविकता बन चुका है। वर्ष 2000 से 2023 के बीच इस एक प्रभाग में 135 लोगों की जान गई और 33 हाथी करंट लगने से मारे गए — जो पूरे राज्य में सर्वाधिक है।

इस संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने 2018 में हाथी मित्र दल की शुरुआत की। यह वह टीम है जो रात के अंधेरे में, बिना नींद के, ड्रोन और टॉर्च लेकर हाथियों को ट्रैक करती है — ताकि गांव वाले सुरक्षित रह सकें।


मुख्य बातें – एक नजर में

Chhattisgarh News की इस विशेष रिपोर्ट के 5 चौंकाने वाले तथ्य:

  • धर्मजयगढ़ में 2000-2023 के बीच 135 लोग मारे गए और 33 हाथी करंट से मरे।
  • पूरे छत्तीसगढ़ में इस अवधि में 218 हाथियों की मौत हुई, जिनमें 39% मौतें मानवजनित कारणों से थीं।
  • पिछले 5 वर्षों में देशभर में 580 हाथियों की मौत हुई, जिनमें तीन-चौथाई करंट से।
  • अक्टूबर 2025 के अनुमान के अनुसार भारत में 22,446 हाथी हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ में 451 हाथी हैं।
  • हाथी मित्र दल के स्वयंसेवकों को महज ₹10,000 प्रति माह मिलते हैं और कोई बीमा नहीं है।

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Chhattisgarh News: धर्मजयगढ़ में हाथी-मानव संघर्ष की भयावह तस्वीर

Chhattisgarh News में धर्मजयगढ़ वन प्रभाग का नाम सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में आता है। यह प्रभाग छह वन रेंजों — छाल, धर्मजयगढ़, बोरो, कपू, लैलुंगा और बाकरुमा — में विस्तृत है।

यहां के जंगल खेतों से घिरे हुए हैं और किसान अपनी फसलों की रक्षा के लिए अक्सर बिजली की बाड़ (Electric Fence) का प्रयोग करते हैं। यही बाड़ हाथियों के लिए जानलेवा साबित होती है। फरवरी 2026 में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में देश में 580 हाथियों की मौत हुई, जिनमें तीन-चौथाई करंट लगने से मरे।


33 हाथी करंट से मरे – देश में सबसे ज्यादा मौतें यहीं

वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और प्रोजेक्ट एलीफेंट की मार्च 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 2000 से 2023 के बीच धर्मजयगढ़ में 33 हाथियों की मौत सिर्फ करंट से हुई — और यह पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक है।

इसी अवधि में इस प्रभाग में 135 लोगों की जान गई और 20 लोग घायल हुए। पूरे राज्य में 737 मानव मौतें और 91 घायल होने की 828 घटनाएं दर्ज की गईं। यह आंकड़े बताते हैं कि यह संघर्ष कितना गहरा और व्यापक है।


मनवारी बरेठ की दर्दनाक कहानी – जंगल गया पति, लौटी लाश

Chhattisgarh News में इस संघर्ष का सबसे दर्दनाक चेहरा है मनवारी बरेठ की कहानी। छाल रेंज से लगभग 7 किलोमीटर दूर बोगिया गांव की निवासी मनवारी और उनके पति 2023 में सुबह महुआ के बीज चुनने जंगल गए।

सुबह करीब 6.30 बजे अचानक हाथी सामने आ गया। दोनों अलग-अलग दिशाओं में भागे — लेकिन हाथी उनके पति के पीछे गया। सुबह 9 बजे उनका शव मिला, सीना और कंधा कुचला हुआ था।

मनवारी तीन बेटों की मां हैं। परिवार अब डर के साये में जीता है। महुआ के बीज जो एक पेड़ से महीने में ₹6,000 तक की कमाई देते थे, उन्हें पाने के लिए अब कोई अकेले नहीं जाता।


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Chhattisgarh News: हाथी मित्र दल – अंधेरे में रक्षक

Chhattisgarh News में हाथी मित्र दल एक ऐसी पहल है जिसे राज्य सरकार ने 2018 में शुरू किया। पश्चिम बंगाल और असम में इसे ‘गज मित्र’ कहते हैं।

यह दल हाथियों की गतिविधियों को ट्रैक कर पास के गांवों को अलर्ट करता है। धर्मजयगढ़ में जावेद शेख और उनके साथी इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। वे ड्रोन, टॉर्च, वॉकी-टॉकी और सर्च स्टिक लेकर रात को जंगल में निकलते हैं।

इस दल की नजर इस समय गौतमी दल पर है — दो नर, आठ मादा और पांच बच्चों वाला हाथियों का झुंड जिसने दिसंबर 2024 में कई घरों को नुकसान पहुंचाया था।


जावेद शेख और प्रकाश भगत – बिना नींद के काम करने वाले योद्धा

40 वर्षीय जावेद शेख कहते हैं: “हाथी इतनी चुपचाप चलते हैं कि किसी को पता ही नहीं चलता।” उन्होंने यह काम शौक से शुरू किया था, जब वे दोस्तों के साथ अपनी मोटरसाइकिल पर जाकर ग्रामीणों की मदद करते थे — ईंधन का खर्च खुद उठाते थे।

अब यह उनकी पूर्णकालिक जिम्मेदारी बन गई है। “कभी-कभी दो रातें लगातार नहीं सोते। दिन में पहला खाना 3.30 बजे खाया,” वे बताते हैं।

प्रकाश भगत, जो 2024 में हाथी मित्र दल से जुड़े, के पिता वन विभाग में उपरेंजर थे। उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर यह काम चुना। “रोज दो से तीन घंटे की नींद मिलती है,” वे कहते हैं।


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Chhattisgarh News: हाथी मित्र दल की चुनौतियां और खामियां

Chhattisgarh News में यह जानना जरूरी है कि हाथी मित्र दल कितनी बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है।

बजट का अभाव: हाथी मित्र दल के लिए कोई अलग बजट नहीं है। सारी फंडिंग सामान्य हाथी प्रबंधन बजट से होती है। स्वयंसेवकों को महज ₹10,000 प्रतिमाह मिलते हैं और कोई बीमा नहीं है।

Gaj Sanket App की खामी: आधिकारिक ट्रैकिंग ऐप सटीक लोकेशन नहीं देता। एक स्वयंसेवक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ऐप सिर्फ 0-20 किलोमीटर की सीमा बताता है, SMS अनियमित आते हैं। वन विभाग का कहना है कि सुधार जारी है।

उच्च जोखिम, कम सुरक्षा: जावेद शेख कहते हैं, “इसे आजीविका मानकर कोई नहीं कर सकता। जोखिम बहुत है और कोई बीमा नहीं।” मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडेय ने कहा है कि वे DFOs को बीमा व्यवस्था के लिए पत्र लिखेंगे।


जंगल सिकुड़ रहे हैं – संघर्ष बढ़ता जा रहा है

Chhattisgarh News में यह समझना जरूरी है कि यह संघर्ष क्यों बढ़ रहा है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि 2000 से 2024 के बीच छत्तीसगढ़ में 7% वन आवरण घट गया। इसमें 22% भूमि कृषि भूमि में और 6% आबादी क्षेत्र में बदल गई।

वन्यजीव जीवविज्ञानी सिद्धांत जैन (नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी) बताते हैं कि भारतमाला सड़क परियोजना, रेलवे विस्तार और खनन से जंगल और खंडित हो रहे हैं। “हाथियों की एक छोटी आबादी भी अब तीव्र और बार-बार टकराव का कारण बन रही है, क्योंकि जंगल उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर सकता।”

ऐतिहासिक रूप से उत्तरी छत्तीसगढ़ में हाथी 20वीं सदी की शुरुआत में स्थानीय रूप से विलुप्त हो गए थे। 1988 में 18 हाथी लौटे और 2017 तक यह संख्या 247 हो गई। अक्टूबर 2025 के DNA-आधारित अनुमान के अनुसार अब छत्तीसगढ़ में 451 हाथी हैं।

🔗 External Link: Project Elephant – Ministry of Environment, Forest and Climate Change

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समाधान क्या है? विशेषज्ञों की राय

Chhattisgarh News में रायपुर स्थित Conservation Core Society की संस्थापक सदस्य मीतू गुप्ता कहती हैं कि हाथी, तेंदुआ और भालू जैसे जानवरों के साथ संघर्ष के समाधान सामूहिक होने चाहिए।

“वन्यजीव संरक्षण तब तक संभव नहीं जब तक उन लोगों को शामिल न किया जाए जो इन जानवरों के साथ रहते हैं।” वे हाथी मित्र स्वयंसेवकों के लिए और बेहतर प्रशिक्षण, व्यवस्थित डेटा संग्रह और फील्ड सुरक्षा की जरूरत पर जोर देती हैं।

छत्तीसगढ़ में 9 हाथी कॉरिडोर चिन्हित हैं। भारत में कुल 150 हाथी कॉरिडोर हैं जिनमें से 40% में हाथियों की आवाजाही बढ़ी है। इन कॉरिडोर की सुरक्षा दीर्घकालिक समाधान की कुंजी है।

🔗 External Link: Wildlife Institute of India – Elephant Corridor Report


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Chhattisgarh News में हाथी-मानव संघर्ष की यह कहानी केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि मनवारी बरेठ जैसे परिवारों की पीड़ा की, जावेद शेख जैसे रात-रात जागने वाले रक्षकों के समर्पण की और उन हाथियों की मजबूरी की कहानी है जो सिकुड़ते जंगलों में जगह खोज रहे हैं। जब तक वन संरक्षण, स्मार्ट तकनीक, उचित मुआवजा और समुदाय की भागीदारी को एक साथ नहीं जोड़ा जाएगा, यह संघर्ष थमने वाला नहीं। Chhattisgarh News पर इस महत्वपूर्ण मुद्दे की अगली अपडेट के लिए हमसे जुड़े रहें।

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