Bijapur Maoist Hideout से 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक ऐतिहासिक बरामदगी की। बीजापुर जिले के घने जंगलों में एक सर्च ऑपरेशन के दौरान 7.2 किलोग्राम सोने की छड़ें मिलीं, जिनकी अनुमानित कीमत ₹11.16 करोड़ आंकी गई है।
पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि इस इलाके में नक्सलियों का एक गुप्त ठिकाना है। इसी सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया, जो इस बड़े खुलासे में तब्दील हो गया।
अधिकारियों ने इसे anti-insurgency ऑपरेशन के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
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7.2 किलो सोना कहाँ से आया? — जाँच में बड़े खुलासे
पुलिस की जाँच में पता चला कि माओवादी नेता रूपेश के आत्मसमर्पण के बाद एक बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बीजापुर शिफ्ट किया गया था। यह सब insurgent commander पापाराव के लिए रखा गया था।
इसके बाद पुलिस ने लगभग 10 दिनों तक आत्मसमर्पण किए हुए माओवादियों से पूछताछ की और तब जाकर इस Bijapur Maoist Hideout का पता लगाया गया।
सोने की authenticity, purity और origin की जाँच अभी जारी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा — “प्रथम दृष्टया ये gold bars लगती हैं, लेकिन forensic और metallurgical examination के बाद ही इनकी असली संरचना और कीमत की पुष्टि होगी।”
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Swiss मार्किंग का रहस्य — Bijapur Maoist Hideout का अनसुना सच
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य है — सोने की छड़ों पर Swiss मार्किंग। Bastar Range के Inspector General Sunderraj Pattilingam ने बताया कि यह मार्किंग उन ज्वैलर्स द्वारा की गई “deception” हो सकती है जिनसे यह सोना खरीदा गया था।
“यह Swiss marking बड़ी दिलचस्प है। हम अन्य माओवादी कैडरों से इन सोने की छड़ों के origin के बारे में पूछताछ कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।
पुलिस इस मामले की हर एंगल से जाँच कर रही है — यह Bijapur Maoist Hideout केस सिर्फ नक्सल नहीं, बल्कि एक बड़े financial crime network का भी पर्दाफाश कर सकता है।
11 मार्च को भी मिला था सोना — एक और खुलासा
यह पहली बार नहीं है। 11 मार्च 2026 को भी बीजापुर के एक अन्य माओवादी ठिकाने से लगभग 1 किलो सोना बरामद किया गया था। यह दर्शाता है कि जंगलों में अभी और ऐसे hideouts मौजूद हो सकते हैं।
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Maoist फंडिंग का नेटवर्क — ठेकेदारों और ग्रामीणों से वसूली
पुलिस के अनुसार यह धनराशि ठेकेदारों और ग्रामीणों से गैरकानूनी वसूली के जरिए जमा की गई थी। एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि जंगलों में अभी भी ऐसे और hideouts हैं।
“कई माओवादियों ने हथियारों के बिना आत्मसमर्पण किया, इसलिए ऐसे कई ठिकाने अभी भी हैं। वहाँ अभी भी सोना और पैसा है,” अधिकारी ने कहा।
Bijapur Maoist Hideout से जुड़े Financial Networks की जाँच
Intensified anti-Maoist operations ने इनके पूरे infrastructure को निशाने पर लिया है — arms stores, supply chains और financial networks सभी ध्वस्त किए जा रहे हैं।
Illegal Levy System कैसे काम करता था?
माओवादी ठेकेदारों से projects पर % लेते थे और ग्रामीणों पर भी “tax” लगाते थे। यह पैसा नक्सल commanders तक पहुँचता था और फिर arms या gold में convert होता था।
Amit Shah का बड़ा बयान — India अब Maoist-Free?
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने संसद में घोषणा की कि India अब Maoist-free हो गया है। यह बयान सरकार की 31 मार्च 2026 की deadline से एक दिन पहले आया — जो Left-wing extremism के उन्मूलन के लिए तय की गई थी।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में:
- 4,839 Maoists ने आत्मसमर्पण किया
- 706 Maoists मारे गए
- 2,218 Maoists गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए
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Chhattisgarh Anti-Maoist Operation के आँकड़े
| विवरण | संख्या/मूल्य |
|---|---|
| Maoists surrendered (3 वर्ष) | 4,839 |
| Maoists killed | 706 |
| Arrested & jailed | 2,218 |
| Gold recovered — Bijapur (March 31) | 7.2 किलो / ₹11.16 Cr |
| Gold recovered — Bijapur (March 11) | ~1 किलो |
Bastar, Dantewada, Sukma, Bijapur, Narayanpur, Kondagaon और Kanker — ये दशकों से Maoist insurgency के epicentre रहे हैं। इस Bijapur Maoist Hideout की बरामदगी इन जिलों में शांति की एक नई सुबह का संकेत है।
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Bijapur Maoist Hideout से एक बड़ा संदेश
Bijapur Maoist Hideout से 7.2 किलो सोने की बरामदगी सिर्फ एक जब्ती नहीं है — यह Chhattisgarh पुलिस और केंद्र सरकार की उस रणनीति की जीत है, जिसने नक्सलवाद की आर्थिक रीढ़ तोड़ने का काम किया है।
Swiss marking वाले gold bars, illegal levies का network और अभी भी जंगलों में छुपे hideouts — ये सब बताते हैं कि यह लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। लेकिन इस तरह की बरामदगियाँ यह जरूर साबित करती हैं कि Chhattisgarh में Maoist insurgency का अंत करीब है।
