Durg News — केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुके हैं। नगर पालिक निगम दुर्ग ने इन नियमों की जानकारी नागरिकों तक पहुँचाते हुए इनके अनुपालन की अपील की है।
यह नए नियम पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम हैं। इनके तहत थोक अपशिष्ट उत्पादकों और स्थानीय निकायों को स्रोत स्तर पर ही अपशिष्ट का प्रसंस्करण करना अनिवार्य किया गया है।
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Durg News: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 — क्या है यह नया कानून?
Durg News के अनुसार, यह नियम केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हैं।
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य देशभर में अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और जवाबदेह बनाना है। अब तक जो अपशिष्ट बिना किसी प्रसंस्करण के सीधे लैंडफिल में डाल दिया जाता था, उस पर अब सख्त रोक लगाई गई है।
यह नियम न केवल नगर निकायों, बल्कि हर उस इकाई पर लागू होते हैं जो बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न करती है।
नए नियमों की 5 प्रमुख विशेषताएं
अपशिष्ट सोपनिकी (Waste Hierarchy) का सिद्धांत
नए नियम “अपशिष्ट सोपनिकी” के वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित हैं। इसमें अपशिष्ट प्रबंधन की प्राथमिकताएं निम्न क्रम में निर्धारित की गई हैं:
1. अपशिष्ट की रोकथाम एवं न्यूनतम उत्पादन — सबसे पहले यह सुनिश्चित करना कि कम से कम कचरा उत्पन्न हो।
2. पुनः उपयोग (Reuse) — वस्तुओं को फेंकने के बजाय दोबारा उपयोग में लाना।
3. पुनर्चक्रण (Recycling) — अपशिष्ट को कच्चे माल के रूप में पुनः प्रयोग करना।
4. ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (Energy Recovery) — अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पन्न करना।
5. सुरक्षित निपटान — केवल अंतिम विकल्प के रूप में सुरक्षित निपटान।
यह क्रम यह सुनिश्चित करता है कि लैंडफिल का उपयोग अंतिम विकल्प के रूप में ही किया जाए।
लैंडफिल उपयोग पर सख्ती — अब डंपिंग नहीं चलेगी
Durg News के अनुसार, नए नियमों के तहत अब केवल गैर-पुनर्चक्रणीय, गैर-पुनर्प्राप्त योग्य एवं निष्क्रिय अपशिष्ट को ही लैंडफिल में भेजा जाएगा।
यदि कोई बिना छँटाई के अपशिष्ट लैंडफिल भेजता है, तो उस पर अधिक लैंडफिल शुल्क लगाया जाएगा। यह व्यवस्था डंपिंग को हतोत्साहित करेगी और स्रोत स्तर पर प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी।
इस पहल से देश में चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यावरण प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी।
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Durg News: थोक अपशिष्ट उत्पादक — कौन-कौन आएगा नए दायरे में?
नए नियमों में थोक अपशिष्ट उत्पादकों (Bulk Waste Generators) का दायरा काफी विस्तृत किया गया है। निम्नलिखित इकाइयाँ इस श्रेणी में शामिल की गई हैं:
- 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्र वाले भवन
- प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक जल उपयोग करने वाली संस्थाएँ
- प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली इकाइयाँ
इसमें विशेष रूप से ये शामिल हैं:
- आवासीय सोसायटियाँ
- विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान
- छात्रावास
- वाणिज्यिक प्रतिष्ठान
- शासकीय संस्थान
Durg News के पाठकों को यह जानना ज़रूरी है कि यदि उनकी संस्था या सोसायटी इन मानदंडों पर खरी उतरती है, तो उन्हें इन नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।
चार श्रेणियों में अनिवार्य अपशिष्ट पृथक्करण
नए नियमों के अंतर्गत अब हर थोक अपशिष्ट उत्पादक को अपशिष्ट को चार अलग-अलग श्रेणियों में पृथक करना अनिवार्य होगा:
1. गीला अपशिष्ट (Wet Waste) रसोई का कचरा, सब्जियों के छिलके, भोजन अवशेष आदि।
2. सूखा अपशिष्ट (Dry Waste) कागज, प्लास्टिक, धातु, काँच आदि पुनर्चक्रण योग्य सामग्री।
3. सैनिटरी अपशिष्ट (Sanitary Waste) डायपर, सैनिटरी पैड आदि स्वास्थ्य संबंधी अपशिष्ट।
4. विशेष देखभाल अपशिष्ट (Special Care Waste) बैटरी, ट्यूबलाइट, ई-कचरा आदि खतरनाक सामग्री।
इस पृथक्करण से पुनर्चक्रण प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और अपशिष्ट के मिश्रण से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण में महत्वपूर्ण कमी आएगी।
थोक उत्पादकों की नई जिम्मेदारियाँ — क्या करना होगा?
Durg News: स्थल पर ही प्रसंस्करण अनिवार्य
Durg News के अनुसार, नए नियमों के तहत थोक अपशिष्ट उत्पादकों को निम्नलिखित जिम्मेदारियाँ निभानी होंगी:
स्थल पर प्रसंस्करण — गीले अपशिष्ट का यथासंभव अपने परिसर में ही प्रसंस्करण करना अनिवार्य होगा। जैसे कम्पोस्टिंग, बायोगैस उत्पादन आदि।
EBWGR प्रमाणपत्र — यदि स्थल पर प्रसंस्करण संभव नहीं है, तो विस्तारित उत्तरदायित्व (Extended Bulk Waste Generator Responsibility — EBWGR) प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा।
सुरक्षित संग्रहण और परिवहन — अपशिष्ट के सुरक्षित संग्रहण, परिवहन एवं प्रसंस्करण की संपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
Durg News: ऑनलाइन पोर्टल से होगी रियल-टाइम निगरानी
नए नियमों की सबसे आधुनिक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अनुपालन की निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है।
इस पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। यानी कोई भी संस्था नियमों का उल्लंघन करती है तो उसे तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा।
यह डिजिटल व्यवस्था पूरे अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगी। अधिक जानकारी के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

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