रामनवमी-अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने 5 बड़े कदम — कलेक्टर का सख्त आदेश, जानें कानून और हेल्पलाइन

📍 दुर्ग, छत्तीसगढ़ |


Durg News: क्या है पूरा मामला?

Durg News में इस बार एक ऐसा मुद्दा है जो सीधे बच्चों के भविष्य और उनके मौलिक अधिकारों से जुड़ा है।

दुर्ग जिले में रामनवमी और अक्षय तृतीया जैसे पर्वों पर अक्सर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह कराए जाते हैं। धार्मिक भ्रांतियों और सामाजिक दबाव के चलते इन शुभ मुहूर्तों पर नाबालिग बच्चों की शादी करा दी जाती है।

इस गंभीर सामाजिक कुरीति को रोकने के लिए कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार दुर्ग जिला प्रशासन ने कठोर कदम उठाए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति और चाइल्ड लाइन की एक संयुक्त टीम गठित की गई है।

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रामनवमी और अक्षय तृतीया — क्यों बढ़ता है बाल विवाह का खतरा?

#### धार्मिक भ्रांतियां बनती हैं बड़ी वजह

Durg News के अनुसार रामनवमी और अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस धारणा के चलते ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बिना पंचांग देखे इन तिथियों पर विवाह संपन्न कर दिए जाते हैं।

कुछ परिवारों में यह परंपरागत मान्यता है कि इन शुभ दिनों पर किया गया विवाह जीवनभर सुखी रहता है। इसी भ्रांति का फायदा उठाकर नाबालिग बच्चों की शादी करा दी जाती है।

#### ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समस्या

Durg News क्षेत्र में यह समस्या केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है। शहरी क्षेत्रों में भी कुछ समुदायों में इस कुप्रथा का चलन है। यही कारण है कि प्रशासन ने शहरी और ग्रामीण दोनों स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था की है।


Durg News: कलेक्टर अभिजीत सिंह का सख्त आदेश

#### ज़ीरो टॉलरेंस की नीति

Durg News में कलेक्टर अभिजीत सिंह के इस कदम को विशेष महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दुर्ग जिले में बाल विवाह को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर के निर्देश के बाद जिला प्रशासन सक्रिय मोड में आ गया है। विभिन्न विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी बाल विवाह नज़रों से न बच सके।

#### जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा

केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान भी इस मुहिम का हिस्सा है। ग्राम पंचायत स्तर पर बैठकें, स्कूलों में जानकारी और सामुदायिक संवाद के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में शिक्षित किया जाएगा।


कौन-कौन सी टीमें हुई गठित?

#### चार विभागों की संयुक्त शक्ति

दुर्ग जिला प्रशासन ने बाल विवाह रोकने के लिए निम्नलिखित विभागों की संयुक्त टीम गठित की है:

1. महिला एवं बाल विकास विभाग — जिला स्तर पर समन्वय और निगरानी

2. पुलिस विभाग — त्वरित कार्रवाई और कानूनी दंड सुनिश्चित करना

3. पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति — ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी और जागरूकता

4. चाइल्ड लाइन (1098) — बच्चों से जुड़ी आपात सूचनाएं प्राप्त करना और कार्रवाई

#### ग्राउंड लेवल पर रहेगी नज़र

इन टीमों को रामनवमी और अक्षय तृतीया के आसपास के दिनों में विशेष रूप से सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी संदिग्ध विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की जाएगी।

Durg News के पाठकों को यह जानना चाहिए कि यह टीम केवल शिकायत आने पर नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव तरीके से भी निगरानी करेगी।


बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 — क्या कहता है कानून?

#### विवाह के लिए न्यूनतम आयु

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत भारत में विवाह की न्यूनतम आयु इस प्रकार निर्धारित है:

  • लड़की के लिए: न्यूनतम 18 वर्ष
  • लड़के के लिए: न्यूनतम 21 वर्ष

इससे कम आयु में किया गया कोई भी विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है और यह दंडनीय अपराध है।

#### Durg News: कानून की नज़र में कौन दोषी?

Durg News के पाठकों को यह जानना जरूरी है कि इस कानून के दायरे में सिर्फ माता-पिता ही नहीं, बल्कि हर वह व्यक्ति आता है जो किसी भी रूप में बाल विवाह से जुड़ा हो:

  • विवाह करने वाले वर पक्ष के परिजन
  • विवाह करवाने वाले पंडित या मौलवी
  • विवाह में सहयोग करने वाले रिश्तेदार
  • बाल विवाह की जानकारी होने के बावजूद चुप रहने वाले

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Durg News: किसे मिलेगी सज़ा और कितनी?

#### वर पक्ष के लिए दंड का प्रावधान

यदि 21 वर्ष से कम आयु का कोई पुरुष, 18 वर्ष से कम आयु की किसी बालिका से विवाह करता है, तो उसे निम्नलिखित दंड हो सकता है:

  • 2 वर्ष तक का कठोर कारावास, अथवा
  • ₹1 लाख रुपए तक का जुर्माना, अथवा
  • दोनों एक साथ

#### विवाह करवाने वालों पर भी होगी कार्रवाई

Durg News में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कानून के तहत सिर्फ दूल्हा या उसके परिवार को ही नहीं, बल्कि जो भी व्यक्ति बाल विवाह करवाता है, उसमें मदद करता है या उसे प्रोत्साहित करता है — उसे भी समान दंड का प्रावधान है।

यानी पंडित, काजी, परिवार के बड़े-बुजुर्ग या कोई भी व्यक्ति जो इस अपराध में सहभागी है — वह कानून की पकड़ में आ सकता है।


बाल विवाह की सूचना कहाँ दें? — हेल्पलाइन नंबर

Durg News क्षेत्र के नागरिकों के लिए यह जानकारी बेहद जरूरी है। यदि आपके आसपास कहीं बाल विवाह होने की जानकारी मिले, तो तुरंत इन नंबरों पर संपर्क करें:

विभागहेल्पलाइन नंबर
महिला एवं बाल विकास विभाग दुर्ग0788-2213363
महिला एवं बाल विकास विभाग दुर्ग0788-2323704
चाइल्ड हेल्पलाइन1098
पुलिस112 / 100
महिला हेल्पलाइन181

ये सभी नंबर 24×7 उपलब्ध हैं। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।


बाल विवाह के दुष्परिणाम — एक ज़रूरी नज़रिया

#### लड़कियों पर सबसे ज़्यादा असर

बाल विवाह का सबसे गहरा और दीर्घकालिक असर लड़कियों पर पड़ता है। कम उम्र में विवाह होने से उनकी पढ़ाई छूट जाती है, सपने टूट जाते हैं और वे आर्थिक रूप से पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाती हैं।

#### स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा

18 वर्ष से पहले विवाह और गर्भधारण से मातृ मृत्यु दर, कुपोषण और शिशु मृत्यु दर बढ़ती है। अपरिपक्व शरीर गर्भधारण के लिए तैयार नहीं होता, जिससे माँ और बच्चे दोनों के जीवन पर खतरा मंडराता है।

#### शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर असर

बाल विवाह शिक्षा के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। Durg News में आज भी कई ऐसे मामले सामने आते हैं जहाँ प्रतिभाशाली लड़कियों को सिर्फ इसलिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी क्योंकि कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई।


Durg News की यह रिपोर्ट एक ऐसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ प्रशासन की लड़ाई की कहानी है जो दशकों से बच्चों के जीवन को बर्बाद करती आई है।

कलेक्टर अभिजीत सिंह के नेतृत्व में दुर्ग जिला प्रशासन का यह कदम सराहनीय है। रामनवमी और अक्षय तृतीया पर सतर्कता बरतना, संयुक्त टीम गठित करना और कड़ी कानूनी कार्रवाई का संकल्प — ये सभी उस सही दिशा में उठाए गए कदम हैं जो बाल विवाह मुक्त दुर्ग का सपना साकार कर सकते हैं।

Durg News के पाठकों से विनम्र निवेदन है — अगर आपके आसपास कहीं बाल विवाह हो रहा हो, तो चुप न रहें। 1098, 112 या 181 पर तुरंत सूचना दें। एक फोन कॉल किसी बच्चे की ज़िंदगी बदल सकती है।

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