छत्तीसगढ़ विधानसभा में बवाल: LPG संकट, पोटा केबिन और धान मुद्दे पर टकराव

सोमवार की सुबह रायपुर में विधानसभा परिसर का माहौल सामान्य नहीं था। गलियारों में हलचल थी, पत्रकार तेजी से नोट्स बना रहे थे, और भीतर—सदन में—आवाज़ें ऊंची हो रही थीं।

Chhattisgarh Assembly Session का 11वां दिन कई मायनों में अलग रहा। एक तरफ राज्यपाल द्वारा लौटाया गया विधेयक चर्चा में आया। दूसरी ओर LPG संकट, धान खराब होने और पोटा केबिन विवाद ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया।

और सच कहें तो, सत्र खत्म होने में अब बस कुछ दिन ही बचे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है—क्या सरकार अपने अहम बिल समय पर पास करा पाएगी?


Chhattisgarh Assembly Session में राज्यपाल लौटाए बिल पर बहस

Chhattisgarh Assembly Session के 11वें दिन सबसे अहम घटनाक्रम रहा राज्यपाल द्वारा लौटाए गए एक विधेयक पर चर्चा। बताया जा रहा है कि राज्यपाल रमेन डेका ने पहले इस बिल को पुनर्विचार के लिए सरकार को वापस भेजा था।

दरअसल बजट सत्र में तीन अहम विधेयक पेश होने थे। इनमें छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 और लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक 2026 भी शामिल हैं।

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक—यानी धर्म परिवर्तन से जुड़ा कानून—राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। भाजपा सरकार इसे आवश्यक बता रही है। मगर कांग्रेस लगातार इस पर सवाल उठा रही है।

संविधान का अनुच्छेद 200 राज्यपाल को अधिकार देता है कि वह किसी बिल को मंजूरी दें, रोकें या पुनर्विचार के लिए लौटा दें। यही वजह है कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति नहीं—संवैधानिक बहस भी बन गया है।

उधर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विभागों की अनुदान मांगों पर भी चर्चा हुई। विपक्ष ने मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने बजट और योजनाओं के क्रियान्वयन पर कई सवाल दागे।

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सरकारी नीतियों से जुड़ी जानकारी अक्सर सरकारी पोर्टल पर भी उपलब्ध होती है —
https://pib.gov.in


बजट सत्र का अंतिम चरण और बढ़ता दबाव

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र अब अंतिम दौर में है। सत्र 20 मार्च तक चलना है, जबकि विनियोग विधेयक को 18 मार्च तक पारित करना जरूरी है।

यानी सरकार के पास समय कम है। और काम ज्यादा।

इस बजट सत्र में अब तक ₹14,655 करोड़ से ज्यादा की अनुदान मांगें पारित हो चुकी हैं। इनमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण और खेल विभाग शामिल हैं।

सरकार ने इस साल करीब ₹1.72 लाख करोड़ का संकल्प बजट पेश किया है। बड़ा विजन है। मगर विपक्ष का कहना है—कागज पर बजट बनाना आसान है, जमीन पर लागू करना मुश्किल।

मैंने पिछले साल भी यही देखा था। बजट चर्चा के दौरान अक्सर स्थानीय मुद्दे अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ जाते हैं। इस बार भी कुछ वैसा ही हो रहा है।

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Key Facts: Chhattisgarh Assembly Session Day-11 की अहम बातें

• Chhattisgarh Assembly Session के 11वें दिन राज्यपाल द्वारा लौटाए गए एक विधेयक पर सदन में चर्चा हुई, जिससे संवैधानिक बहस भी तेज हो गई।

• इसी दिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विभागों की अनुदान मांगों पर भी चर्चा हुई, जहां विपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए।

• LPG सिलेंडर की कमी का मुद्दा भी सदन में जोर से उठा, और इस पर विपक्ष व सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखी गई।

• धान खरीदी केंद्रों से धान नहीं उठाने का आरोप भी लगा, जिसमें एक विधायक ने लगभग ₹30 करोड़ का धान खराब होने की बात कही।

• पोटा केबिन स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा मामला भी जीरो आवर में उठा, और विपक्ष ने इस पर चर्चा की मांग की।


Impact & Public Reaction

सदन के अंदर जो हुआ, उसका असर बाहर भी दिख रहा है। रायपुर में कई राजनीतिक कार्यकर्ता इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।

LPG सिलेंडर की कमी का मुद्दा खास तौर पर लोगों के बीच चर्चा में है। होटल संचालकों और आम उपभोक्ताओं ने भी शिकायत की है कि सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहे।

और पोटा केबिन विवाद ने तो भावनात्मक प्रतिक्रिया भी पैदा की है। आदिवासी इलाकों में चलने वाले इन आवासीय स्कूलों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

बीजापुर से आए एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा—“अगर बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं तो फिर इन हॉस्टलों का मतलब क्या?”

राजनीतिक तौर पर भी माहौल गरम है। विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। वहीं सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक नाटक बता रहा है।


Chhattisgarh Assembly Session अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। मगर माहौल शांत होने के कोई संकेत नहीं हैं।

सरकार को अगले कुछ दिनों में अहम विधेयक पास कराने हैं। विपक्ष अपने मुद्दों पर अड़ा हुआ है।

और सदन के बाहर लोग बस यही देख रहे हैं—अगले चार दिनों में राजनीति किस दिशा में जाएगी। शायद वही तय करेगा कि यह बजट सत्र याद कैसे रखा जाएगा।

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