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महाराष्ट्र भाषा विवाद पर घमासान: मंत्री की MNS प्रदर्शन में घुसने की कोशिश, कार्यकर्ताओं ने खदेड़ा

मुंबई: महाराष्ट्र में भाषा विवाद को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस बीच एक नाटकीय मोड़ तब आया जब राज्य सरकार में मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने विपक्षी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश की। लेकिन, MNS कार्यकर्ताओं ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से खदेड़ दिया।

घटना ठाणे के मीरा रोड की है, जहां ‘स्लैपगेट’ विवाद के खिलाफ व्यापारी वर्ग के विरोध को जवाब देने के लिए MNS कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे थे। यह प्रदर्शन उस घटना के विरोध में किया गया था, जिसमें एक मिठाई दुकानदार को हिंदी में बात करने पर MNS कार्यकर्ताओं ने थप्पड़ मारा था। पुलिस ने इस मार्च को अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद भारी अफरा-तफरी मच गई। कई MNS कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि जब व्यापारियों को विरोध की अनुमति दी गई, तो उन्हें क्यों रोका गया। कई कार्यकर्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में रहने वालों को मराठी सीखनी ही होगी, नहीं तो “परिणाम भुगतने होंगे”।

मुख्यमंत्री फडणवीस का जवाब

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सभी को प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन पुलिस की मंजूरी और मार्ग में बदलाव जैसे नियमों का पालन करना होता है। उन्होंने कहा, “MNS नेताओं को मार्ग बदलने के लिए कहा गया था, लेकिन वे अड़े रहे। इसलिए पुलिस ने उन्हें रोका।”

फडणवीस ने कटाक्ष करते हुए कहा, “महाराष्ट्र का मूड मैं जानता हूं। ऐसे प्रयोग यहां नहीं चलने वाले। मराठी व्यक्ति का दिल बड़ा होता है, वह छोटी सोच नहीं रखता।”

‘स्लैपगेट’ कांड की पृष्ठभूमि

भाषा विवाद की शुरुआत मीरा रोड के ‘जोधपुर स्वीट शॉप’ के मालिक बाबूलाल चौधरी और उनके स्टाफ बघराम पर हुए हमले से हुई थी। आरोप है कि सात MNS कार्यकर्ताओं ने उन्हें सिर्फ इसलिए पीटा क्योंकि उन्होंने हिंदी में बात की थी। इस हमले का वीडियो वायरल होने के बाद महाराष्ट्र में भाषा को लेकर बहस छिड़ गई।

ठाकरे बनाम भाजपा

यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो रहे हैं। उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई तथा MNS प्रमुख राज ठाकरे के फिर से एक होने की खबरें चर्चा में हैं। दोनों ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने ठाकरे परिवार पर हमला बोलते हुए कहा, “अगर हिंदी बोलने वालों को मारने की हिम्मत है, तो उर्दू, तमिल, तेलुगु वालों को भी मारो। अगर इतने ही बड़े बॉस हो तो बिहार, यूपी, तमिलनाडु आओ – यहां तुमको पटख-पटख कर मारेंगे।”

उद्धव ठाकरे का पलटवार

उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर “फूट डालो और राज करो” की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मैं किसी भाषा के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन जबरन थोपने का विरोध करूंगा। भाजपा इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।”

निष्कर्ष:

महाराष्ट्र में भाषा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। ‘स्लैपगेट’ की एक घटना ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है, जिसमें क्षेत्रीय अस्मिता, भाषायी पहचान और राजनीतिक रणनीति – तीनों का टकराव साफ नजर आ रहा है।