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धमतरी में जन संस्कृति मंच की इकाई गठित: कमलेश पांडे बने अध्यक्ष, वतांजलि गोस्वामी को सचिव की जिम्मेदारी

धमतरी, 23 जून 2025:
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से सजी धमतरी ज़मीन पर साहित्य, कला और जनचेतना को नई दिशा देने जन संस्कृति मंच (जसम) की इकाई का गठन कर दिया गया है। दुर्ग-भिलाई, रायपुर और बिलासपुर जैसे सांस्कृतिक नगरों के बाद अब धमतरी में भी जसम की स्थापना से प्रगतिशील साहित्यिक आंदोलन को नया आयाम मिला है।

धमतरी जसम के प्रथम अध्यक्ष देश के प्रतिष्ठित गीतकार त्रिभुवन पांडे के सुपुत्र कमलेश पांडे को बनाया गया है। वहीं वतांजलि गोस्वामी को संगठन का सचिव नियुक्त किया गया है।
उपाध्यक्ष के रूप में पत्रकार और लेखक जमाल रिजवी, सह-सचिव के रूप में युवा लेखक लोकेश्वर कुमार, और कोषाध्यक्ष व सांस्कृतिक दल प्रमुख के रूप में आकाश गिरी गोस्वामी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कार्यकारिणी सदस्यों में जीतू गढ़वी, अब्दुल रज्जाक, डॉ. विजय पंजवानी, साहिर, जानकी गुप्ता, माधुरी मारकंडे, प्रतिमा दीवान, खिलावन कुमार साहू, चेतनानंद और भरत साहू को शामिल किया गया है।


📍 बैठक का आयोजन

यह गठन धमतरी के जैनब पैलेस में आयोजित बैठक के दौरान किया गया, जिसमें जसम रायपुर के संरक्षक सदस्य राजकुमार सोनी और दुर्ग-भिलाई इकाई के कोषाध्यक्ष सुलेमान खान की विशेष उपस्थिति रही।
बैठक में जसम के संविधान का वाचन किया गया और सभी सदस्यों ने इस बात पर विमर्श किया कि वे संगठन से क्यों जुड़ रहे हैं। सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया कि आज के “अंधेरे समय” में एकजुट होकर सक्रिय संगठन से जुड़ना न केवल ज़रूरी है, बल्कि सांस्कृतिक प्रतिरोध का एक सशक्त माध्यम भी है।


🗣️ राष्ट्रीय नेतृत्व की प्रतिक्रिया

जसम के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविभूषण ने धमतरी इकाई के गठन को एक “सार्थक पहल” बताया और पूरी टीम को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि यह इकाई सांस्कृतिक धरातल पर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में एक मजबूत भूमिका निभाएगी।

राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने कहा कि आज के दौर में जब देश बहुलतावाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खतरे से जूझ रहा है, तब लेखकों और कलाकारों का संगठित होना और फासीवाद के खिलाफ आवाज़ उठाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने नए सदस्यों को अधिक सक्रिय, सृजनशील और प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।


🛤️ भविष्य की योजनाएं

जसम छत्तीसगढ़ के समन्वयक सियाराम शर्मा ने कहा कि धमतरी की इकाई निश्चित रूप से फासीवादी प्रवृत्तियों के खिलाफ सांस्कृतिक प्रतिरोध को सशक्त करेगी।
राजकुमार सोनी ने बताया कि जल्द ही गरियाबंद, राजनांदगांव, कवर्धा, बस्तर, अंबिकापुर, जांजगीर-चांपा जैसे जिलों में भी जसम की इकाइयों का गठन किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ में एक मजबूत प्रगतिशील सांस्कृतिक नेटवर्क स्थापित किया जा सके।


🎯 निष्कर्ष

धमतरी में जसम की इकाई का गठन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक हस्तक्षेप की दिशा में उठाया गया मजबूत कदम है। यह पहल छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़े साहित्यकारों, कलाकारों और विचारशील जनों के लिए उम्मीद की नई किरण है जो लेखन, कला और विचार के जरिए समकालीन चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए तत्पर है।