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विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रयास से एक व्यक्ति नहीं बन पाया ठगों का शिकार

दुर्ग (छत्तीसगढ़)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा साइबर ठगी से बचाव के लिए चलाए जा रहे अभियान प्रयास को एक सफलता मिली है। पैरावालेंटियर की समझाइश पर एक व्यक्ति एक करोड़ लाटरी मिलने के झांसे में फंसने से बच गया। वहीं एक अन्य मामले में बीमा पालिस रिफंड राशि पाने के एवज में ठगी का शिकार होने वाले व्यक्ति को विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वसान दिया है।
बता दें कि साइबर ठगी की बढ़ती वारदातों से बचाव के लिए सिविक सेंटर भिलाई में जागरुकता शिविर प्रयास आयोजित किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष व जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में नागरिकों को साइबर ठगों से किस प्रकार सावधान रहना है कि जानकारी दी जा रही है। इस अभियान को एक सफलता मिली है। धमधा निवासी रामू सारथी को एक करोड़ रु. की लाटरी लगने का फोन ठग द्वारा किया गया था। जिस पर रामू ने विश्वास कर लिया था। ठग ने उससे कहा था कि एक करोड़ की रकम लेने के लिए उसे 50 हजार रु. की रकम ट्रांसफर करनी होगी। इस रकम का इंतजाम करने भिलाई के सिविक सेंटर आया था। जहां उसे जागरुकता शिविर लगें होने की जानकारी मिली। शिविर में मौजूद लीगल पैरा वालेंटियर प्रशांत अग्रवाल को उसने इस संबंध में जानकारी दी। जिस पर प्रशांत ने उसे इस प्रकार की फोन काल्स के फेर में न पडऩे की समझाइस दी और बताया कि इस प्रकार से वह अपनी बड़ी रकम को गंवा देगा। इस समझाइश का असर हुआ और रामू ने रकम ट्रांसफर करने का विचार त्याग दिया।
एक अन्य मामले में भिलाई निवासी संतोष कुमार ने बताया कि कुछ महिने पहले उसके पास एक फोन आया था। जिस पर सामने वाले व्यक्ति ने बताया कि आपकी एक इंस्योरेंस पॉलिसी है, जो मैच्योर हो चुकी है। परंतु आपको भुगतान प्राप्त करने के लिए पैसे जमा करने होंगे। इस पर विश्वास कर संतोष ने उस व्यक्ति के एकाउंट में 20 हजार रुपए जमा करा दिये थे। जिसके बाद में न तो बीमा का पैसा मिला और न ही उस व्यक्ति से संपर्क हो पाया। संतोष कुमार द्वारा इस ठगी की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित प्रयास अभियान के शिविर में जाकर दी। जिस पर विधिक सेवा प्राधिकरण ने संज्ञान लेते हुए उचित कार्यवाही करने का आश्वासन संतोष कुमार को दिया गया।