World Tourism Day MCB के अवसर पर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर जनभागीदारी से स्वच्छता श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन ‘स्वच्छता ही सेवा’ और ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत किया गया।
कर्मघोगेश्वर, अमृतधारा, सीतामणी, चांगदेवी और सिद्ध बाबा सहित विभिन्न स्थलों पर स्वच्छाग्राहियों, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने साफ-सफाई में हिस्सा लिया।
अभियान का उद्देश्य पर्यटन स्थलों को स्वच्छ और आकर्षक बनाए रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देना रहा।
जिले की आधिकारिक पर्यटन जानकारी के अनुसार एमसीबी क्षेत्र प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व वाले कई स्थलों से समृद्ध है। अमृतधारा, रमदहा, सीता की रसोई और सिद्धबाबा पहाड़ प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हैं।
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World Tourism Day MCB में पर्यटन स्थलों पर श्रमदान
स्वच्छता कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने पर्यटन स्थलों के आसपास जमा कचरे को हटाया। स्वच्छाग्राहियों और ग्रामीणों ने श्रमदान के माध्यम से लोगों को नियमित साफ-सफाई का संदेश दिया।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पर्यटन स्थलों की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय समुदाय और यहां आने वाले पर्यटकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
पर्यटकों से विशेष रूप से अपील की गई कि वे प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों पर कचरा न फैलाएं तथा अपने साथ लाए गए कचरे को निर्धारित स्थान पर ही डालें।
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World Tourism Day MCB में प्लास्टिक से बनी जागरूकता आकृति
कर्मघोगेश्वर में स्वच्छता श्रमदान के दौरान एकत्र किए गए प्लास्टिक अपशिष्ट का रचनात्मक इस्तेमाल किया गया। स्वच्छाग्राहियों ने प्लास्टिक प्रतिबंध और स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करने वाली एक आकृति तैयार की।
इस पहल के जरिए प्लास्टिक के कम इस्तेमाल, कचरा नहीं फैलाने और पर्यटन स्थलों को साफ रखने का संदेश दिया गया।
यह गतिविधि इस बात को सामने लाती है कि स्वच्छता अभियान में एकत्र कचरे का रचनात्मक उपयोग भी जागरूकता का माध्यम बन सकता है।
पर्यटकों से स्वच्छता में सक्रिय भागीदारी की अपील
अभियान के दौरान जलप्रपातों, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक पर्यटन क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई।
पर्यटकों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने और कचरे को खुले में नहीं फेंकने का आग्रह किया गया। प्रशासन ने पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक और धार्मिक गरिमा बनाए रखने में सहयोग की अपील की।
अमृतधारा जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थल बारिश के मौसम में विशेष आकर्षण रखते हैं। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अमृतधारा जलप्रपात हसदेव नदी पर स्थित है और यहां प्राचीन शिव मंदिर भी है।
World Tourism Day MCB में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी
स्वच्छता श्रमदान में जनपद पंचायत अध्यक्ष मनेन्द्रगढ़ जानकी बाई कुसरो, मुख्य कार्यपालन अधिकारी वैशाली सिंह, जिला समन्वयक राजेश जैन सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए।
साल्ही, डोमनपारा, भलौर, भगवानपुर, हरचौका और अन्य क्षेत्रों के सरपंच, उपसरपंच, पंच, सचिव, रोजगार सहायक, मितानिन तथा ग्रामीणों ने भी श्रमदान किया।
स्वच्छाग्राहियों पूजा, गीता, मानकुंवरी, सीता राम बाई, ऋतु और आरती मिश्रा सहित बड़ी संख्या में जनसहभागियों ने पर्यटन स्थलों की साफ-सफाई में हिस्सा लिया।
स्वच्छ पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ
कार्यक्रम में पर्यटन स्थलों की स्वच्छता को स्थानीय पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर देखा गया। साफ और सुरक्षित पर्यटन स्थल आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ स्थानीय पर्यटन गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकते हैं।
पर्यटन मंत्रालय भी पर्यटन को स्थानीय समुदायों, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर देता है। मंत्रालय के अनुसार पर्यटन क्षेत्र सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान देता है तथा ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार का माध्यम भी बन सकता है।
एमसीबी जिले की आधिकारिक वेबसाइट भी पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसरों से जोड़ती है।
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स्वच्छ पर्यटन स्थल-सुंदर पर्यटन स्थल का संदेश
अभियान के दौरान ‘स्वच्छ पर्यटन स्थल-सुंदर पर्यटन स्थल’ का संदेश दिया गया। लोगों से पर्यटन स्थलों को साफ रखने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की गई।
इस पहल में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, स्वच्छाग्राहियों और पर्यटकों की सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित किया गया।
World Tourism Day MCB पर आयोजित स्वच्छता श्रमदान ने पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का संदेश दिया। प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर सफाई, प्लास्टिक के प्रति जागरूकता और पर्यटकों से सहयोग की अपील के जरिए स्वच्छ पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। नियमित सामुदायिक सहभागिता से इन स्थलों की प्राकृतिक और धार्मिक पहचान को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
