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World Breastfeeding Week: छत्तीसगढ़ में मातृ दुग्ध दान को मिला सम्मान, 10 माताओं को ‘माता यशोदा सम्मान’

World Breastfeeding Week के अवसर पर छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रायपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में स्तनपान के महत्व, मातृ दुग्ध दान और नवजात शिशुओं के बेहतर पोषण को लेकर व्यापक जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) तथा राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्र (SHSRC) द्वारा किया गया।

इस दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित 10 माताओं को “माता यशोदा सम्मान” से सम्मानित किया गया। इन माताओं ने अपने मातृ दुग्ध का दान कर उन नवजात शिशुओं की मदद की, जिन्हें किसी कारणवश अपनी मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पा रहा था।

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World Breastfeeding Week कार्यक्रम का उद्देश्य

World Breastfeeding Week के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना, शिशुओं के बेहतर पोषण को सुनिश्चित करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाना था।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक संजीव झा, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी भी उपस्थित रहे।

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World Breastfeeding Week में ‘माता यशोदा सम्मान’ बना मुख्य आकर्षण

कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण “माता यशोदा सम्मान” रहा।

राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित 10 माताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने मातृ दुग्ध का दान कर जरूरतमंद नवजात शिशुओं को जीवनदायी सहयोग दिया। इस पहल का उद्देश्य मातृ दुग्ध दान को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देना और अधिक से अधिक महिलाओं को इसके लिए प्रेरित करना है।

विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर उपलब्ध मातृ दुग्ध कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से नवजातों की रक्षा कर सकता है।


World Breastfeeding Week के दौरान ह्यूमन मिल्क बैंक पर विशेष जोर

कार्यक्रम की शुरुआत ह्यूमन मिल्क बैंक (Human Milk Bank) स्टॉल के अवलोकन से हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्थापित पहला ह्यूमन मिल्क बैंक उन नवजात शिशुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है जिन्हें अपनी माता का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता। इससे अनेक शिशुओं को सुरक्षित मातृ दुग्ध उपलब्ध कराया जा सकेगा।


स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- मां का दूध सर्वोत्तम आहार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए सबसे सुरक्षित, संपूर्ण और पौष्टिक आहार है।

उन्होंने कहा कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करना तथा छह महीने तक केवल मां का दूध देना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रदेश की लगभग 72 हजार मितानिन बहनों की भी सराहना की, जो वर्षों से दूरस्थ क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रही हैं।

मंत्री ने कहा कि समाज का संकल्प होना चाहिए कि कोई भी नवजात मां के अमूल्य दूध से वंचित न रहे।


मितानिन कार्यक्रम और पोषण पर सरकार का फोकस

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मितानिन कार्यक्रम पिछले 25 वर्षों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान, छह माह तक केवल मां का दूध और माताओं का संतुलित पोषण कुपोषण मुक्त समाज की मजबूत नींव है। साथ ही उन्होंने स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और प्रत्येक मां को उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।


World Breastfeeding Week क्यों है महत्वपूर्ण?

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • जन्म के पहले घंटे में स्तनपान नवजात मृत्यु दर कम करने में मदद करता है।
  • छह माह तक केवल मां का दूध सर्वोत्तम पोषण प्रदान करता है।
  • स्तनपान से संक्रमण और कुपोषण का खतरा कम होता है।
  • मातृ दुग्ध दान जरूरतमंद नवजातों के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है।
  • ह्यूमन मिल्क बैंक समय से पहले जन्मे और कमजोर शिशुओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है।

World Breastfeeding Week के अवसर पर आयोजित यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। माता यशोदा सम्मान, ह्यूमन मिल्क बैंक और स्तनपान जागरूकता जैसे प्रयास यह संदेश देते हैं कि स्वस्थ समाज की शुरुआत स्वस्थ नवजात और सशक्त माताओं से होती है। यदि स्तनपान और मातृ दुग्ध दान को जनआंदोलन का रूप दिया जाए तो आने वाले वर्षों में कुपोषण और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

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