USTR Poaching मामले में छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के आसपास वन्यजीवों के शिकार में विस्फोटक सामग्री के कथित इस्तेमाल का मामला सामने आया है। एंटी-पोचिंग टीम ने छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे इलाके में कार्रवाई करते हुए जंगली सूअर के शिकार से जुड़े दो संदिग्धों को पकड़ा है।
जानकारी के अनुसार, 29 सितंबर को गरियाबंद पुलिस के साइबर सहयोग और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग नेटवर्क से मिले फील्ड इनपुट के आधार पर कार्रवाई की गई।
रिसगांव रेंज के चिखलापानी इलाके में टीम ने दो लोगों को जंगली सूअर के शव को काटते हुए पकड़ा। वन विभाग के अनुसार, इस जंगली सूअर का शिकार विस्फोटक के इस्तेमाल से किए जाने की आशंका है।
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USTR Poaching केस में दो आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान ओडिशा के नबरंगपुर जिले के खिलोली गांव निवासी नरसिंह और मानसिंह को पकड़ा गया। मौके से दो अन्य संदिग्ध भागने में सफल रहे, जिनकी तलाश की जा रही है।
वन विभाग ने दोनों आरोपियों को 1 अक्टूबर को नगरी स्थित JMFC न्यायालय में पेश किया। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मामले में वन अपराध दर्ज किया गया है और कार्रवाई Wildlife (Protection) Act के तहत की जा रही है।
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13 जिंदा पोटाश बम और हथियार बरामद
वन टीम ने मौके से 13 जिंदा पोटाश बम बरामद किए। इसके अलावा टांगिया, चाकू, हंसिया, कट्टा और अन्य शिकार में इस्तेमाल होने वाले सामान भी जब्त किए गए।
अधिकारियों के अनुसार, यह बरामदगी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों के शिकार के लिए स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने वाले विस्फोटक उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर पहले भी मामले सामने आ चुके हैं।
एक अन्य मामले में नगरी क्षेत्र से जुड़े एक संदिग्ध की तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री के साथ स्लॉथ बीयर के 86 पंजे बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
USTR Poaching में सप्लाई चेन की भी जांच
ताजा मामले की जांच केवल मौके पर बरामद सामग्री तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद विस्फोटक सामग्री कहां से आई और क्या इसके पीछे कोई बड़ा खरीद, भंडारण या सप्लाई नेटवर्क है।
एक आरोपी से जुड़ी तलाशी के दौरान 29 कारतूस, दो बम या पटाखे जैसे सामान, 20 विस्फोटक पटाखे और संदिग्ध विस्फोटक सामग्री के कई पैकेट मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
वन विभाग ने संकेत दिया है कि जहां अवैध कब्जे, निर्माण या विस्फोटकों के इस्तेमाल से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य मिलेंगे, वहां Explosive Substances Act के तहत भी समानांतर कार्रवाई की जाएगी।
विस्फोटक से शिकार कितना खतरनाक?
अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे विस्फोटक उपकरणों का खतरा केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं रहता। यदि कोई जानवर इन्हें खा ले या इनके संपर्क में आने से विस्फोट हो जाए, तो उसकी मौत या गंभीर चोट हो सकती है।
इस तरह की सामग्री से पालतू पशुओं, वनकर्मियों और पुलिस या गश्ती दलों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि वन विभाग इसे वन्यजीव संरक्षण के साथ सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय मान रहा है।
शिकार का हॉटस्पॉट बना Keshkal-Kanker-Nabarangpur-Nagri बेल्ट
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने Keshkal-Kanker-Nabarangpur-Nagri बेल्ट को शिकार गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है।
लगातार शिकार और वन्यजीवों को परेशान किए जाने से घायल या भयभीत जानवरों के जंगल से बाहर निकलकर खेतों और आबादी की ओर आने की आशंका भी बढ़ सकती है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है।
रिजर्व क्षेत्र में एंटी-पोचिंग नेटवर्क द्वारा फील्ड इनपुट जुटाए जा रहे हैं। साथ ही पुलिस और वन विभाग के बीच समन्वय के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
कार्रवाई के दौरान मौके से भागे दो संदिग्धों की तलाश जारी है। वन विभाग और संबंधित एजेंसियां मामले में बरामद सामग्री तथा आरोपियों के संभावित संपर्कों की जांच कर रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, रिजर्व के आसपास वन्यजीव शिकार में विस्फोटक इस्तेमाल करने के मामलों की संख्या को देखते हुए यह जांच व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाई जा सकती है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई और मैदानी निगरानी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अवैध शिकार से बाघ, भालू और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
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USTR Poaching का ताजा मामला उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और उसके आसपास वन्यजीव शिकार में विस्फोटक सामग्री के कथित इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ाता है। 13 जिंदा पोटाश बम की बरामदगी, दो आरोपियों की गिरफ्तारी और फरार संदिग्धों की तलाश के बीच जांच अब कथित सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने पर केंद्रित है। फिलहाल मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और आगे की स्थिति जांच तथा अदालत की प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
